1. एक था पुराना-नगर, जिस में राजा 5 साल के लिए निर्वाचित किया जाता था। इस बार एक ऐसा व्यक्ति निर्वाचित हो गया, जो पहले भी इस ही नगर के एक उपनगर का15 साल से राजा चल रहा था। लेकिन 15 साल से राजपाठ भोग रहा यह राजा खुद को उपनगर का राजा न कह कर सिर्फ एक चाय पकौड़े वाला कहता था। ऐसा इस लिए की इस में देश के आम लोगों को बेवकूफ बनाने और उन का समर्थन जुटाने की राजनितिक सुविधा थी। राजा सच ही चाय पकौड़े के नाम पे चुनाव जीत गया और अब के समस्त नगर का राजा बन गया।
2. निर्वाचन के बाद पुराना-नगर का नाम नव-नगर रख दिया गया, और नवनिर्वाचित राजा ने खुद को जनसेवक और चौकीदार कहना शुरू कर दिया। इस में भी आम आदमी ही के समर्थन की राजनितिक सुविधा थी। वैसे राजा, दिन में चार पांच बार, पौशाक बदलने का, बेहतरीन खुंब इत्यादि खाने का, और बेहतरीन चश्मे, पेन इत्यादि का बहुत शौकीन था। यानी राजा जताता था कि वह तो अत्यंत सरल मानव है, लेकिन था वह एक जबरदस्त खिलाड़ी।
3. फिर कुछ ऐसा हुआ, कि सेवक बन कर राजा और शहर के धन्ना सेठ में आपस में खूब मित्रता हो गई, और राजन धन्ना सेठ का खूब सहयोग करने लगा। देखते ही देखते, धन्ना सेठ ने सारे बाजार पर कब्ज़ा कर लिया। देश में चमड़े के सिक्के चलाये गये, मनमर्ज़ी के कर लगाये गये, और जब जन्ता ने खुद को लुटा लुटा सा महसूस किया, तो चौकीदार ही चोर है, का शोर हर तरफ मचने लगा.
4. राजा घबरा गया, क्यों की वः पुन्ह निर्वाचन का याचक था। मरता क्या न करता। उस ने अपने फ़ौजी कमांडर को बुलाया, और उसे बड़े राजकीय सम्मान और, लाटसाहिब की कुर्सी, बंगले, ठाट-बाट का प्रलोभन दिया और पड़ोसी मुल्क पर एक छोटा सा हमला बोलने को कहा। हमले के बाद पड़ोसी मुल्क और नवनगर का माहौल गर्म हो गया। हर तरफ नव-नगर ज़िंदाबाद, पड़ोसी मुल्क मुर्दाबाद के नारे लगने लगे। अब जो कोई भी राजा या उस के चक्रम फैसलों के बारे कुछ कहता, उसे देशद्रोही, या राष्ट्र विरोधी कहा जाने लगा। नगर के टेलीविज़न और अख़बारों पर सारी बहस मुद्दों से हट कर राष्ट्रवाद और अराष्ट्रवाद में सिमट गयी। राजा की मित्र मण्डली और उन सभी ने, जिन्हें राजा के राजा बनने से लाभ था, राजा को भगवान का दर्जा दे दिया।
5. फ़िर चुनाव हुआ, राजा फ़िर निर्वाचित हुआ, और अब की बार वह डबल स्पीड पे धन्ना सेठ को सभी कारोबार का स्वामी बनाने में जुट गया। इस बार देश में प्लास्टिक के सिक्के चलाये गये, रोज़गार के नाम पर हर मुहल्ले में सट्टेबाज़ी के केंद्र खोले गये, दुश्मन देश ने नगर के उत्तरी और पश्चिमी इलाकों पे बार बार हल्ला बोलना शुरू किया। अब राजा शांति और अमन का अग्रदूत बन कर सामने आने लगा।
6. शहर के सभी लोग पकौड़े की ही दुकान करते थे, लेकिन जब सभी पकौड़े बनाते थे, तो शाम को खुद ही खा लेते थे, बहुत से बचे हुए पकौड़े फेंके जाने लगे। राजा ने पकौड़ों की दीवार बना कर दुश्मन देश से सुरक्षा का आवाहन किया, फिर क्या था, लोगों के सब्र का बाँध टूट गया, जन्ता ने राजा और उस के साथियों को पकौडों के ढेर में ही दबा दिया।
🚩तत्त सत्त अकाल🚩
@ 📚गुरु बलवन्त गुरुने⚔
2. निर्वाचन के बाद पुराना-नगर का नाम नव-नगर रख दिया गया, और नवनिर्वाचित राजा ने खुद को जनसेवक और चौकीदार कहना शुरू कर दिया। इस में भी आम आदमी ही के समर्थन की राजनितिक सुविधा थी। वैसे राजा, दिन में चार पांच बार, पौशाक बदलने का, बेहतरीन खुंब इत्यादि खाने का, और बेहतरीन चश्मे, पेन इत्यादि का बहुत शौकीन था। यानी राजा जताता था कि वह तो अत्यंत सरल मानव है, लेकिन था वह एक जबरदस्त खिलाड़ी।
3. फिर कुछ ऐसा हुआ, कि सेवक बन कर राजा और शहर के धन्ना सेठ में आपस में खूब मित्रता हो गई, और राजन धन्ना सेठ का खूब सहयोग करने लगा। देखते ही देखते, धन्ना सेठ ने सारे बाजार पर कब्ज़ा कर लिया। देश में चमड़े के सिक्के चलाये गये, मनमर्ज़ी के कर लगाये गये, और जब जन्ता ने खुद को लुटा लुटा सा महसूस किया, तो चौकीदार ही चोर है, का शोर हर तरफ मचने लगा.
4. राजा घबरा गया, क्यों की वः पुन्ह निर्वाचन का याचक था। मरता क्या न करता। उस ने अपने फ़ौजी कमांडर को बुलाया, और उसे बड़े राजकीय सम्मान और, लाटसाहिब की कुर्सी, बंगले, ठाट-बाट का प्रलोभन दिया और पड़ोसी मुल्क पर एक छोटा सा हमला बोलने को कहा। हमले के बाद पड़ोसी मुल्क और नवनगर का माहौल गर्म हो गया। हर तरफ नव-नगर ज़िंदाबाद, पड़ोसी मुल्क मुर्दाबाद के नारे लगने लगे। अब जो कोई भी राजा या उस के चक्रम फैसलों के बारे कुछ कहता, उसे देशद्रोही, या राष्ट्र विरोधी कहा जाने लगा। नगर के टेलीविज़न और अख़बारों पर सारी बहस मुद्दों से हट कर राष्ट्रवाद और अराष्ट्रवाद में सिमट गयी। राजा की मित्र मण्डली और उन सभी ने, जिन्हें राजा के राजा बनने से लाभ था, राजा को भगवान का दर्जा दे दिया।
5. फ़िर चुनाव हुआ, राजा फ़िर निर्वाचित हुआ, और अब की बार वह डबल स्पीड पे धन्ना सेठ को सभी कारोबार का स्वामी बनाने में जुट गया। इस बार देश में प्लास्टिक के सिक्के चलाये गये, रोज़गार के नाम पर हर मुहल्ले में सट्टेबाज़ी के केंद्र खोले गये, दुश्मन देश ने नगर के उत्तरी और पश्चिमी इलाकों पे बार बार हल्ला बोलना शुरू किया। अब राजा शांति और अमन का अग्रदूत बन कर सामने आने लगा।
6. शहर के सभी लोग पकौड़े की ही दुकान करते थे, लेकिन जब सभी पकौड़े बनाते थे, तो शाम को खुद ही खा लेते थे, बहुत से बचे हुए पकौड़े फेंके जाने लगे। राजा ने पकौड़ों की दीवार बना कर दुश्मन देश से सुरक्षा का आवाहन किया, फिर क्या था, लोगों के सब्र का बाँध टूट गया, जन्ता ने राजा और उस के साथियों को पकौडों के ढेर में ही दबा दिया।
🚩तत्त सत्त अकाल🚩
@ 📚गुरु बलवन्त गुरुने⚔


