1. राजनीती एक कड़वा सत्य है, और इस खेल में पुत्र पितृ हन्ता हो जाता है, भ्राता भृतःन्ता हो जाता है, और भृतिहरि तो राजा हो कर भी सन्यासी हो जाते हैं, जब की चोर उचक्के, और घोर पापी भी सत्ताधारी के शरणागत हो कर सत्ता सुख के बिस्कुटों का लाभ तो प्राप्त कर ही लेते हैं।
2. यह सब राजनैतिक नौटंकी भी चलती रहे गी, नौटंकी के खिलाफ़ आवाज़ भी उठती रहे गी।
3. मैं मूलतः न तो किसी राजनितिक दल के साथ हूँ, न ख़िलाफ़।
4. मेरी ख़िलाफ़त आम-जन के एक्सप्लोइटरज़ और एक्सप्लोइटेशन के ख़िलाफ़ है, सो वह हर हाल में जारी रहे गी।
5. सत्ताधारी को चेतावनी देना, और इस पर्योजन से उसे अपने मूल कर्तव्य के लिए प्रेरित करना ही मेरा मूल धर्म है।
6. पुन्ह परीणाम कुछ भी हो, यह मेरी चिंता नहीं।
7. राजा की अनितियों का खण्डन ही मेरा प्रयोजन है, राजा मोदी हो, या मनमोहन, या कोई और।
8. मुझे अपना कौटिल्य दीपक ज्वलन्त रखना है, क्यों कि यही दिया मेरी देश भक्ति का साधन, और पर्योजन है।
9. यही मेरी पूजा, अर्चना एंवम वन्दना है। वैसे भी पालतू कुत्तों की दुनिया में इक्का दुक्का सिंह भी होना अनिवार्य है।
🚩तत्त सत्त श्री अकाल🚩
✒GBG⚔
2. यह सब राजनैतिक नौटंकी भी चलती रहे गी, नौटंकी के खिलाफ़ आवाज़ भी उठती रहे गी।
3. मैं मूलतः न तो किसी राजनितिक दल के साथ हूँ, न ख़िलाफ़।
4. मेरी ख़िलाफ़त आम-जन के एक्सप्लोइटरज़ और एक्सप्लोइटेशन के ख़िलाफ़ है, सो वह हर हाल में जारी रहे गी।
5. सत्ताधारी को चेतावनी देना, और इस पर्योजन से उसे अपने मूल कर्तव्य के लिए प्रेरित करना ही मेरा मूल धर्म है।
6. पुन्ह परीणाम कुछ भी हो, यह मेरी चिंता नहीं।
7. राजा की अनितियों का खण्डन ही मेरा प्रयोजन है, राजा मोदी हो, या मनमोहन, या कोई और।
8. मुझे अपना कौटिल्य दीपक ज्वलन्त रखना है, क्यों कि यही दिया मेरी देश भक्ति का साधन, और पर्योजन है।
9. यही मेरी पूजा, अर्चना एंवम वन्दना है। वैसे भी पालतू कुत्तों की दुनिया में इक्का दुक्का सिंह भी होना अनिवार्य है।
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