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🚩फ़िर वही चुनाव, फ़िर व्ही नौटँकी.🚩©✒GBG⚔

1. फ़िर शुरू होने जा रही है पप्पू और गप्पू, दीदी और पिद्दी के बीच दौड़, लालू और कालू में,  'माया बहन' और 'जुमला भाई'  में रेस।

2. हाँ इस युद्ध में लड़खड़ाती सी कुछ कलमें भी घूमती फिरती हैं,  साथ ही  भृष्ट कैमरे,  दो-मुंहिये  टेलीविजन एंकर और बिकाऊ पैेनलिस्ट  भी घिसी पिटी बातें कर के जन्ता को,  बेमुद्दा मुद्दों में उलझाये रखने की क़वायद में जुट गये हैं।

3.   यानि  लड़ाई  तो काहे की हो गी,  बस भोंपू प्रचारकों, जुमलेबाज़ों,  झूठों, और ठग्गों की मण्डी एक बार फ़िर से गर्म हो जाये गी ।

4.   चमचों की हाय-तौबा का हिसाब लगाना हो तो बस इतना ही जानना काफ़ी है, की इंदिरा की वानर सेना की तर्ज़ पे, प्रियंका की गुलाबी सेना भी बन चुकी है, और हद्द तो तब हुई, जब इस चमचों की सेना के सैनिकों ने गुलाबी नामकरण के पीछे का कारण, न तो LGBT से कोई सम्बन्ध बताया, न गुलाबी गैंग से कोई वास्ता, बस इतना ही कहा की प्रियंका पहचान सके कि उस के भग्त कौन हैं। वाह री चापलूसी,    यानी  पहले गांधी टोपी, फ़िर केजरीवाल की लिफाफा टोपी,  फ़िर मोदी मास्क, मोदी जैकेट  और अब प्रियंका की गुलाबी टी शर्ट। WTBH⁉

5.  युवा भी दो किस्म के हैं, एक तो वह जो सब कुछ छोड़ छाड़ के मुल्क में व्यवस्था परिवर्तन की दरकार रखते हैं, और दूसरे वह जो मौका परस्ती के कल्चर के चलते, कभी कोई टोपी, कभी कोई टीशर्ट, या फिर कोई मास्क चुनते हैं। यानी दलबदलू गैंग।

6.  दबा के चीखा चिल्ली हो रही है, और अभी और भी हो  गी। घिसियल बिकाऊ एंकर फिर किसी देसी विदेशी ओवैसी  या किसी पात्रा कुपात्रा की बेमात्रा बहस करवा कर लोगों को उलझायें गे।

7.   फ़िर हो गा इस भोंपू और उस भोंपू में युद्ध।  मायावी जुमलोँ और वादों के पहलवान एक बार फिर झूठ के राजनितिक अखाड़े में भिड़वाये जायें गे।   देखते हैं कौन जीतता है❓  जन्ता को तो हम ने सदा हारते ही देखा है ❕❗

8.   क़लम वाले खुद को क़लम का सिपाही कहते हैं।उन का मानना है कि आज नहीं तो कल, क़लम ही सुरखरुह हो गी। क़लम का नेवला सभी सर्पों और बिछुओं का वध करे गा, लेकिन सच्च यह है की आज लिखे हुए को पढ़ने वालों की बनिस्बत कहने सुनने वाले जयदा मकबूल हैं।  यानी कुत्ते तक भी लेखकों से बाज़ी मार गये हैं।  क़लम से लिखे कागजों पर तो पकौड़े मूंगफली ही बिक रहे हैं।

9.   आलम यह है, कि पप्पू हो या गप्पू, कोई साला बस की छत पे सवार है, कोई ट्रक का रथ बनाये बैठा है, कोई दीदी, कोई बहन जी, कोई भैया जी, कोई बाप जी, वही सब  कई बार चल चुके कारतूस, सब साले पुराने घिसे पिटे नौटंकी बाज़,  अपने काले धन के जोर पर खुद को रिफ्रेश कर के निकल पड़े हैं वोटरों के जंगल में, वोटर नामक मुर्गों का शिकार करने।

10.  यानी कुल मिला कर कुछ भी नया नहीं है। राजा भी कई आये और कई गये, कोई खुद को देश का चचा कहता था, कोई बापू, तो आज कल चौकीदार या प्रधान सेवक कहना फैशन में हैं।

11.  आज कल वाले  चाचा  और बापू को ठरकी सिद्ध करने में लगे हैं।  कोई तो उन की तस्वीर के पीछे लाल रंग से भरे गुबारों को छर्रेे वाली एयरपिस्टल से फोड़ कर, 'मैं भी गोडसे' होने के चस्के ले रहे हैं, और चचा और बापू के समर्थक यह कहने में मशग़ूल हैं की चौकीदार ही चोर है।

12.  मुझे तो लगता है की सभी साले चोर हैं, वह भी एक से बढ़ कर एक, और जन्ता है की सम्पूर्ण चूतिया गिरी की चैम्पियन है, वह भी एक से बढ़ कर एक।

13.   जन्ता के ज्यादा लोग तो धर्म वर्म के नाम, और जात पात के नाम पे ही निबट जाते हैं, बाकी शराब, रोटी-शोटि या 500 या 2000 के नोट के लिए ही वोट दे रहे हैं, यानि सुपर चुतियापे का आलम है, और लिखारी के पास, शाम तक रद्दी बन जाने वाले अखबार के  एक अँधेरे से किनारे में,  सिसक सिसक कर दम तोड़ रहा मात्र एक कॉलम है।

14.  क़लम वाले होने का भृम पालने वाले  इस बेनामी कालम पे क़लम घिसा रहे हैं।   ऐसे में यह इंटेलेक्चुअल क्या  घण्टा उखाड़ लें गे, इस भृष्ट व्यवस्था का। इन में से भी ज्यादा तर तो किसी लिटररी सोसाइटी  या किसी लिटरअरी अवार्ड के एवज़ में ही निबट जाते हैं। यानी इनाम या रिकोग्निशन का  बिस्कुट पेश, और कुत्ता फ़ारिग।  

15.  हाँ,  मुझे एक ख़ुशी अवश्य है कि मेरे देश का एक बड़ा युवा वर्ग जाग गया है। वह सड़कों पे है। कल यही लोग लोकसभा और विधान सभा में हों गे, और मेरे देश की तक़दीर बदलें गे।

16.  लेकिन याद रहे मित्रो, गज़ गज़ लम्बी ज़ुबान और कुएं से भीे गहरे हलक वालों का मुकाबला, क़लम से नहीं, डंडो और बंदूखों ही से सम्भव है।

17.  इस बार की इलेक्शन तो बस यही सिद्ध करे गी, की किस की धन थैली कितनी गहरी है, और ज़ुबान कितनी लम्बी। असली फैसला अभी बकाया रहे गा।

18.  अभी देश को रौशनी की ओर और चलना हो गा। अच्छे दिन क्रांती से ही सम्भव हैं। युवाओं को एक जुट होना चाहिये और सभी पुराने राजनितिक सिय्यारों को फ़ारिग कर देना चाहिए। यही हो गा असली सफाई अभियान।

19.  आखिर कब तक राज घरानोंऔर राजनितिक घरानों और उन के चमचों के परिवार के लोग,  जो किसी सच्ची प्रतिस्पर्धा में चपरासी बनने की काबलियत भी नहीं रखते, राजा होने का दावा ठोकते रहें गे ❓ आखिर कब तक ⁉

20.  यह सब  रोकना हो गा।  देश में चल रहे परिवारवाद, पार्टीवाद,  और व्यक्तिवाद  के चाटुकार कुत्तों के इस फर्ज़ीवाड़े को रोकना ही हो गा, फिर चाहे उन्हें ठोकना ही क्यों न पड़े।
🚩तत्त सत्त अकाल🚩
🚩वन्दे मातरम 🚩
© ✒गुरु बलवन्त गुरुने ⚔

🚩क्यों चाहिये भारत को मौजूदा सरकार से मुक्ति?🚩@✒GBG⚔

१.  जो लोग मौजूदा सरकार का विकल्प ही नहीं देख  पा रहे, आप अपनी अंतरात्मा से पूछिये, भारत और भरतीयता के लिए, क्या बदलाव जरूरी नहीं है ???

२.  जो लोग अभी भी मौजूदा सरकार की ख़ैर ख्वाहि में मसरूफ़ है, शायद नहीं समझ रहे कि इन की आर्थिक नीतियां और 'काम कम दिखावा ज्यादा' करने की नीतियां अगर यूँही चलती रही, तो देश को ब्राजील जैसे हालातों में आते देर न लगे गी.

३   यह हालात ऐसे होंगे,  जब ग़रीब के पास तो फूटी कौड़ी भी न हो गी और  माध्यमिक और उच्च माध्यमिक वर्ग रोज़मर्रा की जरूरतों में ही बुरी तरहं पिस कर रह जाये गा।

४.  केवल अती धनाढ्य वर्ग ही अपनी जरूरत पूरी कर पाये गा, या ढंग से जी पाये गा, क्यों की थैला भर के नोटों के बदले एक किलो अनाज लेने की औकात केवल विशिष्ठ  धनवानों के पास ही रह जाये गी।

५.  ऐसा समय भयंकर नतीजे पैदा कर सकता है।  यानी भूखे प्यासे लोग सड़कों पे आ जायें गे और अराजकता फैल जाये गी।

६.   आज देश को एक बेहतरीन आर्थिक दिशा दे सकने वाली सरकार की आवश्यकता है, यानि ऐसी सरकार की आवश्यकता है, जो किसी मनमोहन सिंह, अमर्त्य सेन, रघुराम राजन या और अर्थशास्त्रियों के चिंतन को क्रियावन्त कर सके, और देश को सच्चे मायनो में आर्थिक रूप से स्थिर कर सके।

७.   मौजूदा सरकार तो RBI के रिज़र्वज़ तक को निकलवाने की बात कर रही है। यह दुख़द है।

८.  केवल पहले से निर्माणाधीन पुलों या सड़कों का उद्घाटन करने से, या बड़े बड़े बुत्त बनाने से, या करन्सी का रंग बदलने से या शहरों और टापुओं के नाम बदलने से देश नहीं चलते। भारत एक ग़रीब और भृष्ट देश है, जिसे चलाने के लिए गम्भीर और समझदार प्रिविर्ति की आवश्यकता है।  पोस्टरबाजी से काम नहीं चले गा।

८.   देश वासियों को धर्म जात से ऊपर उठ कर वोट करना हो गा। किसी भी तरहं की बंटवारे की राजनीती से बचना हो गा।

९.  कुछ मित्र बदलाव का नाम सुन कर ही बेवजह नाराज़ हो जाते हैं।  मोदी जी को देश ने एक बहुत बड़ा मौका दिया, लेकिन मोदी जी ने शानो शौकत, रोबढोब, और सैर सपाटे तथा, एक प्रधानमन्त्री होने के बावजूद,  देश की बजाय, सरकारी औहदे, मशीनरी और  और व्यवस्था का इस्तेमाल सत्ता में बने रहने की कवायदों के चलते असंख्य चुनाव अभियानों के सञ्चालन और सम्बोधन में  ही किया।

१०.  अब आदरणीय मोदी जी को भी विपक्ष की जगह बैठना चाहिए, और पुन्ह  विचार करना चाहिए की अगले मौके,  वह वो सब कैसे करें गे, जो देश के हित में हो, केवल पार्टी के या निजी हित में नहीं।

११. इतना बड़ा मौका मिलने के बाद भी, और  एक विफ़ल सरकार का सञ्चालन करने के बाद, और प्रधान मंत्री होते हुए भी एक पार्टी प्रचारक के रूप में ज्यादा दिखने वाले मोदी जी को दूसरा मौका देने का फ़िलहाल कोई कारण नज़र नहीं आता है।
बदलाव आवश्यक है।
🚩सत्य मेव जयते🚩
@✒गुरु बलवंत गुरुने⚔

🚩अब शुरू होने वाली है लोकतंत्र की सब से बड़ी जंग🔥🚩हल्ला बोल, हल्ला बोल🚩✒GBG⚔

1.  हर शहर में छोटे छोटे राजनितिक प्रोपेगण्डा के गेंदबाज और बल्ले बाज़, यानी छोटे छोटे गेबल्ज़ की 'कोर टीमें' बनाई जा चुकी हैं, जिन का काम है, मौजूदा सरकार और मौजूदा नेता के हक़्क़ में दबा कर झूठ बोलना, और किसी भी प्रकार की विपरीत ध्वनि को दबाना।

2.   विपक्ष भी अब कमर कसने में लगा है। यानि मीडिया और सोशल मीडिया पे आरोपों प्रतिरोपों का संघर्ष सा छिड़ने वाला है।

3.  आप कुछ भी कहिये या शेयर कीजिये, आप को रोका जाये गा,  दबाया जाये गा, धमकाया भी जाये गा।

4.  तो मित्रो याद रहे, यदी आप देश से प्रेम करते हैं, तो पार्टी कोई भी हो, आप का मत्त कोई भी हो, जो सही न लगे, उस के खिलाफ आवाज़ अवश्य उठाइये, लेखनी अवश्य  चलाइये। यही आप के होने की निशानी है।

5.   ताक़तवर को सलाम करने की, चढ़ते सूरज को सलाम करने की अपनी ग़ुलाम मानसिकता को त्याग दी जीये। अब समय आ गया है, पगड़ी सम्भालने का, अतः आप अपनी अभिव्यक्ति की आज़ादी का सम्मान कीजिए।

6.  नेता आते जाते रहें गे, आप को वादों से लुभाते, और जुमलोँ के जंगलों में घुमाते फिराते, और यहां तक की धमकाते भी रहें गे।

7.  नेता किसी भी दल का हो, वादे करे गा, ऐसे वादे जो निभाये नहीं जाएँ गे।  जुमलोँ के तीर भी छोड़े जाएँ गे, कई किस्म के छोटे मोटे लालच और भय इत्यादि भी दिखलाये जाएँ गे। कोई चिंता न करें। अपनी अभिव्यक्ति को मरने मत दी जिए, ज़िंदा रखिये।

8.  अभिव्यक्ति की आज़ादी ही असली आज़ादी है। कानून की बंदिशे तो मुग़लों के समय भी थी, अंग्रेजों के समय भी और आज़ादी के बाद भी हैं, मौजूदा सरकार से पहले भी थी, और इस सरकार के उपरांत भी रहे गी,  लेकिन अभिव्यक्ति की आज़ादी सर्वोपरि है, कुछ कहिये, कुछ लिखिए, और सच्च का साथ दीजिये।

9.   अनिवार्य नहीं की सब का सच्च एक हो।  आप का और मेरा सच्च भिन्न हो सकते हैं। हमारी राजनितिक सोच अलग हो सकती है, लेकिन शोध चिंतन और चर्चा के बाद, जो भी आप को ठीक लगे, उस का साथ दीजिये।

10.  यदी आप किसी लोभ-वश या भय-वश किसी का साथ देते हैं,  तो समझ लीजिये कि मूलतः आप, असत्य के साथ खड़े हैं, और यदी आप केवल अपनी अंतहकरन की आवाज़ के साथ हैं, तो आप सत्य के योद्धा हैं।

11.   युद्ध मज़ेदार होने वाला है, मंगलमय चित के साथ इस युद्ध में उतरिये। सभी को शुभआशीष। सर्व का मंगल हो।
🚩तत्त सत्त अकाल🚩
©✒गुरु बलवन्त गुरुने⚔