1. फ़िर शुरू होने जा रही है पप्पू और गप्पू, दीदी और पिद्दी के बीच दौड़, लालू और कालू में, 'माया बहन' और 'जुमला भाई' में रेस।
2. हाँ इस युद्ध में लड़खड़ाती सी कुछ कलमें भी घूमती फिरती हैं, साथ ही भृष्ट कैमरे, दो-मुंहिये टेलीविजन एंकर और बिकाऊ पैेनलिस्ट भी घिसी पिटी बातें कर के जन्ता को, बेमुद्दा मुद्दों में उलझाये रखने की क़वायद में जुट गये हैं।
3. यानि लड़ाई तो काहे की हो गी, बस भोंपू प्रचारकों, जुमलेबाज़ों, झूठों, और ठग्गों की मण्डी एक बार फ़िर से गर्म हो जाये गी ।
4. चमचों की हाय-तौबा का हिसाब लगाना हो तो बस इतना ही जानना काफ़ी है, की इंदिरा की वानर सेना की तर्ज़ पे, प्रियंका की गुलाबी सेना भी बन चुकी है, और हद्द तो तब हुई, जब इस चमचों की सेना के सैनिकों ने गुलाबी नामकरण के पीछे का कारण, न तो LGBT से कोई सम्बन्ध बताया, न गुलाबी गैंग से कोई वास्ता, बस इतना ही कहा की प्रियंका पहचान सके कि उस के भग्त कौन हैं। वाह री चापलूसी, यानी पहले गांधी टोपी, फ़िर केजरीवाल की लिफाफा टोपी, फ़िर मोदी मास्क, मोदी जैकेट और अब प्रियंका की गुलाबी टी शर्ट। WTBH⁉
5. युवा भी दो किस्म के हैं, एक तो वह जो सब कुछ छोड़ छाड़ के मुल्क में व्यवस्था परिवर्तन की दरकार रखते हैं, और दूसरे वह जो मौका परस्ती के कल्चर के चलते, कभी कोई टोपी, कभी कोई टीशर्ट, या फिर कोई मास्क चुनते हैं। यानी दलबदलू गैंग।
6. दबा के चीखा चिल्ली हो रही है, और अभी और भी हो गी। घिसियल बिकाऊ एंकर फिर किसी देसी विदेशी ओवैसी या किसी पात्रा कुपात्रा की बेमात्रा बहस करवा कर लोगों को उलझायें गे।
7. फ़िर हो गा इस भोंपू और उस भोंपू में युद्ध। मायावी जुमलोँ और वादों के पहलवान एक बार फिर झूठ के राजनितिक अखाड़े में भिड़वाये जायें गे। देखते हैं कौन जीतता है❓ जन्ता को तो हम ने सदा हारते ही देखा है ❕❗
8. क़लम वाले खुद को क़लम का सिपाही कहते हैं।उन का मानना है कि आज नहीं तो कल, क़लम ही सुरखरुह हो गी। क़लम का नेवला सभी सर्पों और बिछुओं का वध करे गा, लेकिन सच्च यह है की आज लिखे हुए को पढ़ने वालों की बनिस्बत कहने सुनने वाले जयदा मकबूल हैं। यानी कुत्ते तक भी लेखकों से बाज़ी मार गये हैं। क़लम से लिखे कागजों पर तो पकौड़े मूंगफली ही बिक रहे हैं।
9. आलम यह है, कि पप्पू हो या गप्पू, कोई साला बस की छत पे सवार है, कोई ट्रक का रथ बनाये बैठा है, कोई दीदी, कोई बहन जी, कोई भैया जी, कोई बाप जी, वही सब कई बार चल चुके कारतूस, सब साले पुराने घिसे पिटे नौटंकी बाज़, अपने काले धन के जोर पर खुद को रिफ्रेश कर के निकल पड़े हैं वोटरों के जंगल में, वोटर नामक मुर्गों का शिकार करने।
10. यानी कुल मिला कर कुछ भी नया नहीं है। राजा भी कई आये और कई गये, कोई खुद को देश का चचा कहता था, कोई बापू, तो आज कल चौकीदार या प्रधान सेवक कहना फैशन में हैं।
11. आज कल वाले चाचा और बापू को ठरकी सिद्ध करने में लगे हैं। कोई तो उन की तस्वीर के पीछे लाल रंग से भरे गुबारों को छर्रेे वाली एयरपिस्टल से फोड़ कर, 'मैं भी गोडसे' होने के चस्के ले रहे हैं, और चचा और बापू के समर्थक यह कहने में मशग़ूल हैं की चौकीदार ही चोर है।
12. मुझे तो लगता है की सभी साले चोर हैं, वह भी एक से बढ़ कर एक, और जन्ता है की सम्पूर्ण चूतिया गिरी की चैम्पियन है, वह भी एक से बढ़ कर एक।
13. जन्ता के ज्यादा लोग तो धर्म वर्म के नाम, और जात पात के नाम पे ही निबट जाते हैं, बाकी शराब, रोटी-शोटि या 500 या 2000 के नोट के लिए ही वोट दे रहे हैं, यानि सुपर चुतियापे का आलम है, और लिखारी के पास, शाम तक रद्दी बन जाने वाले अखबार के एक अँधेरे से किनारे में, सिसक सिसक कर दम तोड़ रहा मात्र एक कॉलम है।
14. क़लम वाले होने का भृम पालने वाले इस बेनामी कालम पे क़लम घिसा रहे हैं। ऐसे में यह इंटेलेक्चुअल क्या घण्टा उखाड़ लें गे, इस भृष्ट व्यवस्था का। इन में से भी ज्यादा तर तो किसी लिटररी सोसाइटी या किसी लिटरअरी अवार्ड के एवज़ में ही निबट जाते हैं। यानी इनाम या रिकोग्निशन का बिस्कुट पेश, और कुत्ता फ़ारिग।
14. क़लम वाले होने का भृम पालने वाले इस बेनामी कालम पे क़लम घिसा रहे हैं। ऐसे में यह इंटेलेक्चुअल क्या घण्टा उखाड़ लें गे, इस भृष्ट व्यवस्था का। इन में से भी ज्यादा तर तो किसी लिटररी सोसाइटी या किसी लिटरअरी अवार्ड के एवज़ में ही निबट जाते हैं। यानी इनाम या रिकोग्निशन का बिस्कुट पेश, और कुत्ता फ़ारिग।
15. हाँ, मुझे एक ख़ुशी अवश्य है कि मेरे देश का एक बड़ा युवा वर्ग जाग गया है। वह सड़कों पे है। कल यही लोग लोकसभा और विधान सभा में हों गे, और मेरे देश की तक़दीर बदलें गे।
16. लेकिन याद रहे मित्रो, गज़ गज़ लम्बी ज़ुबान और कुएं से भीे गहरे हलक वालों का मुकाबला, क़लम से नहीं, डंडो और बंदूखों ही से सम्भव है।
17. इस बार की इलेक्शन तो बस यही सिद्ध करे गी, की किस की धन थैली कितनी गहरी है, और ज़ुबान कितनी लम्बी। असली फैसला अभी बकाया रहे गा।
18. अभी देश को रौशनी की ओर और चलना हो गा। अच्छे दिन क्रांती से ही सम्भव हैं। युवाओं को एक जुट होना चाहिये और सभी पुराने राजनितिक सिय्यारों को फ़ारिग कर देना चाहिए। यही हो गा असली सफाई अभियान।
19. आखिर कब तक राज घरानोंऔर राजनितिक घरानों और उन के चमचों के परिवार के लोग, जो किसी सच्ची प्रतिस्पर्धा में चपरासी बनने की काबलियत भी नहीं रखते, राजा होने का दावा ठोकते रहें गे ❓ आखिर कब तक ⁉
20. यह सब रोकना हो गा। देश में चल रहे परिवारवाद, पार्टीवाद, और व्यक्तिवाद के चाटुकार कुत्तों के इस फर्ज़ीवाड़े को रोकना ही हो गा, फिर चाहे उन्हें ठोकना ही क्यों न पड़े।
🚩तत्त सत्त अकाल🚩
🚩वन्दे मातरम 🚩
© ✒गुरु बलवन्त गुरुने ⚔
20. यह सब रोकना हो गा। देश में चल रहे परिवारवाद, पार्टीवाद, और व्यक्तिवाद के चाटुकार कुत्तों के इस फर्ज़ीवाड़े को रोकना ही हो गा, फिर चाहे उन्हें ठोकना ही क्यों न पड़े।
🚩तत्त सत्त अकाल🚩
🚩वन्दे मातरम 🚩
© ✒गुरु बलवन्त गुरुने ⚔