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🚩भाजपा का 48 सीट जीतने का दावा गलत साबित होगा।🚩@ ✒GBG⚔

Posted on 9th February 2020.
1. जग जाहिर है कि आज पत्रकारिता और इंफॉर्मेशन का संचार, गोदी  पत्रकारों और गोदी मीडिया के हाथों से निकल कर, आम इंसान के हाथों में आन पहुंचा है।

2.  हर नागरिक 24 x 7 x  365 दिन,  सच्च क्या है, थोड़ी सी कोशिश से जान सकता है। स्मार्ट फोन या पामटॉप, जो चाहिए कह लीजिए तथा इंटरनेट के जरिए  घटनाओं का इंस्टैंट प्रसारण आज आम सी बात है।

3.  हाला की इस अतिशीघ्र और अति विस्तृत वेब दुनिया में, झूठ और वहम का प्रसारण भी तेजी से होता है, लेकिन सत्य भी उतनी ही आसानी से उपलब्ध है।  आम जन में आज सत्य को जानने का सामर्थ्य और  अभिलाषा, दोनों ही बहुत इंप्रूव हुए हैं।

4.  यानी जनता सब जानती है,  और ना केवल जानती है बल्कि देखती भी है। जो अखबार और टेलीविजन अपनी मनमर्जी से एडिट कर के प्रसारित करते थे, आज अनएडिटीड ही उपलब्ध है, वह भी इंस्टैंट।

5.  ऊपर लिखे तथ्यों के  प्रकाश में दिल्ली और देश की जनता ने देखा कि किस तरह अरविंद केजरीवाल और आम पार्टी को हराने के लिए, भाजपा के नेताओं ने अपना पूरा जोर लगा दिया।

6.  यानी गोदी मेडिया, कितने ही  सीएम, मिनिस्टर, एमएलए,  यहां तक कि खुद गृह मंत्री और प्रधानमन्त्री तक,  एक अर्ध प्रदेश के छोटे लेकिन बेहद पॉपुलर नेता को हराने में जुट गए, लेकिन फ़िर भी चुनाव के दिन, सुबह से शाम तक वोटरों की ज्यादा भीड़ आप की स्टालों पे ही रही।  भाजपा और कांग्रेस की टेबलों पे कोई नज़र नहीं आया।

7.  ऐसे में, मनोज तिवारी का जनमत के ख़िलाफ़ 48 सीटें जीतने का दावा, हास्यप्रद लगता है।

8.  यदी आंशिक रूप से भी यह दावा सही निकला, तो केंद्र सरकार पूरे 5 साल नहीं चल पाएगी, क्यों कि जनता का गुस्सा सड़कों पे अा जाए गा।

9.  एसे में भाजपा को बांटो और राज करो, तथा प्रतिद्वंदी को नीचा दिखा कर खुद को बेहतर सिद्ध करने की नेगेटिव राजनीति, शहीदों के नाम पे वोट मांगने की राजनीति,  तथा  दंभ और    दादागिरी की फुक्री राजनीति को छोड़ कर,  काम और जनसेवा का रास्ता अपनाना चाहिए।

10.   केंद्र सरकार के लिए  इस बार दिल्ली जीतने से ज्यादा आवश्यक है दिल जीतना, और वह तभी संभव है, जब वह बेरोज़गारी को कम करे, मंदी अर्थव्यवस्था को कंट्रोल करे,  शिक्षा का स्तर ऊंचा करे, और लोगों को अच्छा आर्थिक व समाजिक माहौल दे, जिस में आम आदमी ज्यादा एंपावर्ड महसूस करे, ऐसा मेरा नम्र निवेदन है।

11. सिर्फ विनिंग इलेक्शन बाई हुक और क्रुक से काम नहीं चले गा, क्यों कि ये जो पब्लिक   है यह सब जानती है।
🚩🔱 सत्य ही शिव है 🔱🚩
 ✒गुरु बलवंत गुरुने ⚔

🚩क्या है कर्नाटक की जन्ता का जनादेश⁉🚩@✒GBG⚔

1.  कर्नाटक ने एक बहुत बढ़िया जनादेश दिया, और सही किया। जन्ता ने किसी एक दल को बहुमत नहीं दिया, और किसी की भी दाल गलने नहीं दी, यानि सत्ता की बोटी भूखे कूकर दल में कुछ इस तरह फेंकी, की कूकर दौड़ अभी भी जारी है। 

2.   बीजेपी को 104 सीट दी तो जदस और कांग्रेस को अलग अलग  37 और 78, यानि 115 सीट दी। 224 सीटों की विधान सभा में सरकार बनाने के लिए कम से कम 113 सीट चाहिए, यानी भाजपा को 9 विधायकों की दरकार है।

3.  आइये अब जनमत का इक दूसरा, लेकिन बेहद संजीदा और आवश्यक पहलू भी देखें, यानी देखें की किस दल को कितनी % जन्ता ने वोट दिया। आइये  देखें और परखें की शुद्ध जनादेश क्या कहता है।

4.  परसेंटेज ऑफ़ वोटस में कांग्रेस सब से आगे है। जन्ता ने कांग्रेस को 38 % वोट, भाजपा को 36.2% वोट और देवे-गौड़ा की जन्ता दल सेकुयलर को 18.3% वोट दिए। कुल मिला कर कांग्रेस और जदस को  38% +18.3 % वोट , यानी 56.3% वोट मिले।  इस हिसाब से जदस+कांग्रेस को जन्ता ने  भाजपा से 20.1%  वोट ज्यादा  दिए।

5.  नतीजा साफ है, जन्ता ने भाजपा को 36.2% वोट, और भाजपा के खिलाफ लड़ रही पार्टियों को 56.3% वोट दे कर, भाजपा के खिलाफ़ जन-आदेश दिया है। यानी जनादेश भाजपा और कांग्रेस, दोनों के खिलाफ है, लेकिन इस सब में ही छिपी है, जन्ता के जनादेश की असली पहेली।

6.   राजयपाल ने यदुरप्पा को 104 सीटों की बिनाह पर सरकार बनाने का निमन्त्रण और बहुमत सिद्ध करने के लिए 15 दिन का वक्त दिया, लेकिन साथ ही शीर्ष अदालत ने आज शाम 4.30 बजे तक फ्लोर टेस्ट का आदेश भी दे दिया, और यद्दूरप्पा द्वारा आनन फ़ानन में किये गए बड़े पुलिस तबादले, और बाकी तुग़लकी फैसलों पर भी रोक लगा दी। आखिर क्यों ⁉  यह विचारणीय है। जाहिर है की राज्यपाल के फैसले से शीर्ष अदालत सहमत नहीं, और इस के चलते संविधान के प्रावधानों का संज्ञान लेते हुए, शीर्ष अदालत ने अपना फैसला सुनाया।

7.   स्पष्ट है की कोर्ट ने न सिर्फ जदस+कांग्रेस संयुक्त के 115 सीटों का संज्ञान लिया हो गा, बल्कि इन दोनों दलों के जॉइंट वोट शेयर (56.3% वोट बैंक) का भी संज्ञान लिया हो गा। कोर्ट ने यह भी अवश्य देखा हो गा की किसी दल, जिसे अभी सिर्फ अंतरिम सरकार बनाने का मौका मिला है,  उस का नेता, बिना मुख्यमंत्री की शपथ लिए ही मुख्यमंत्री बन बैठा है। काहे भैया, क्या यह तुग़लक़ का ज़माना है, या संविधान का राज्य। कभी मत भूलिये गा की भारत व्यक्ति साशित राज्य नहीं, बल्कि एक सविंधान द्वारा शाषित लोकतान्त्रिक  प्रजातन्त्र है।

8.    एक बात अवशय उभर कर आई है, की जन्ता ने मेरे  द्वारा प्रसारित 'बदली कर,  बदली कर', के पैराडाइम को लागु किया, यानी कोंग्रेस को सब से ज्यादा वोट दे कर भी कम सीटें दे कर अकेले सरकार बनाने के क़ाबिल नहीं छोड़ा, लेकिन जनादेश भाजपा को सरकार बनाने का भी नहीं दिया गया है, इतना तो आंकड़ो से स्पष्ट है ।

9.  जनादेश का एक अत्यंत विशेस पहलू यह है, कि 'जन्ता-दल-सेकुयलर' और कॉंग्रेस के पास संयुक्त 115 सीटे हैं, और 56.3%  वोटर। तो इस के चलते सरकार इन्ही की होनी चाहिए, मुख्यमंत्री और ज्यादा मंत्री जदस के होने चाहिए। कहता चलूँ कि कर्नाटक की मिनिस्ट्री में तकरीबन 75 मिनिस्टर हुआ करते हैं, और अगर जदस संयुक्त/एकजुट रहती है, तो जदस का हर विधायक, देर सवेर मंत्री बन सकता है, और अपने चुनाव क्षेत्र के लिए कुछ खास कर सकता है।

10.  जन्ता का फैसला साफ़ है, किसी एक दल को सम्पूर्ण बहुमत नही दे कर, जन्ता ने मिलीजुली सरकार का जनादेश दिया है।  आगे क्या होता है, जो हो गा, ठीक हो गा, या गलत, इस का फैसला मैं जन्ता पे ही  छोड़ता हूँ,  नमो और अमित 8 से 9 विधायक जुटा लें गे या यद्दूरप्पा  को मैदान छोड़ कर भागना हो गा।

11.  यह भी कहता चलूँ कि यदी भाजपा सरकार बनाती है तो इसे अपनी बड़ी जीत के तौर पे,  और यदी सरकार बनाने में नाकामयाब रही तो उसे अपनी कुर्बानी के रूप में पेश करे गी। 

12.  याद रहे कि कर्नाटक की केवल 72.13% जन्ता ने ही एलक्शन में हिस्सा लिया। यानी बाकी तकरीबन 27% लोगों को या तो परवाह ही नहीं की कौन उन का सञ्चालन करे, या उन्हें अपने अधिकार की ज़िम्मेवारी निभाने का आभास ही नहीं है।

13.   अब गुरु गुरुने का मास्टर स्ट्रोक।  याद रहे की बहुमत का जुगाड़ न होने पर यदि यदुरप्पा और भाजपा पतली गली से निकले भी, फिर भी उन की कोशिश यही हो गी, की 2019 से पहले पहले, वह जदस के  दो तिहाई विधायकों को साम, दाम, दण्ड भेद का इस्तेमाल कर के तोड़ते हुए, कर्नाटक की जदस+कांग्रेस सरकार को गिरा सके। ऐसा कर के वह खुद को हीरो बनाने, और नमो की छवी चमकाने की एक बड़ी क़वायद में जुड़ सकते हैं।

14.  यह भी याद रहे की कम से कम अब तक भाजपा, जदस के किसी विधायक को तोड़ नहीं सकी, जिस के कारण स्पष्ट हैं। पहला सुप्रीम कोर्ट का खुला चयन, यानि ओपन वोटिंग द्वारा फ्लोर टेस्ट में उतरने का आदेश, दूसरा एंटी डेफेक्शनन कानून, और तीसरा व्हिप का लागू होना। जदस की सब से बड़ी विजय यही हो गी, की वह कम से कम 2 वर्ष तक, और हो सके तो 5 वर्ष तक अपनी एकता को भंग न होने दे।

🚩तत्तसत्तश्रीअकाल🚩
©@✒ गुरु बलवन्त गुरुने⚔