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🚩दास्ताने कृष्ण अर्जुन, भील और गोपीयाँ🚩 @✒GBG⚔

1.   हाल ही में श्री कृष्ण की एक ऐसी कहानी पढ़ी, जिस में भगवान कृष्ण  भी एक दम मजबूर दिखे, और अर्जुन एक दम लाचार।

2.  इस ही प्रसङ्ग को पढ़ कर महात्मा तुलसीदास जी कह उठे थे,
'तुलसी नर था कब बलि, समय बड़ा बलवान,
भीलां लूटी गोपियां, वही अर्जुन वही बाण।'

3. प्रसङ्ग कुछ ऐसे है कि महाभारत का युद्ध समाप्त  हो चुका था। कृष्ण व्याध तीर से घायल थे। ऐसे में अर्जुन उनसे मिलने पहुंचे।

4.   कृष्ण ने अर्जुन से कहा कि पार्थ मुझसे मिलने गोपियां आ रही हैं लेकिन रास्ते में भीलों के कबीले हैं, जो उन को उठाने की फ़िराक़ में हैं,  तुम गोपीयों की  भीलों से रक्षा करना।

5.  अर्जुन को महाभारत विजय के बाद खुद पे अभिमान  हो चुका था। वह श्री कृष्ण से बोला, 'माधव मेरे होते भील गोपीयों को लूट लें, यह असम्भव है',  लेकिन काल का खेल कुछ ऐसा निकला की अर्जुन देखता ही रह गया और भीलों ने गोपियां लूट लीं।

6.  अर्जुन ठगा सा रह गया।  उसे अब समझ आया कि महाभारत के युद्ध में ताकत उस की नहीं, समय की थी, और समय जब अनूकूल न हो तो गोवर्धनधारी कृष्ण की गोपीयों को, गांडीवधारी बाहूबली अर्जुन के संरक्षण के बावजूद, भील तक भी लूट ले जाते हैं।

7.  अर्जुन और कृष्ण की इस दास्तान से एक शेर याद आया,
'बख्त के तख़्त से यक-लख्त उतारा हुआ शख्स,
तुमने देखा है कभी,  जीत के हारा हुआ शख्स ?'
🚩तत्त सत्त अकाल🚩
✒गुरु बलवन्त गुरुने⚔
शब्दार्थ:-
बख्त- किस्मत।
तख़्त- सिंघासन।
यक-लख्त - अचानक, एकदम जल्दी से।