1. केवल धारा 370 के चलते एक ऐसा माहौल बनता था, कि स्कूलों में पढ़ रहे विद्यार्थी, पाकिस्तान और लोकल गद्दारों की श्य पे, किताबें छोड़ पत्थर या बंदूक उठाते, देश के निशान और संविधान, दोनों की तौहीन करते, और खुद को जेहादी समझते। मुल्क की ही थाली में खाते भी और थूकते भी, और खा कर थूकने के लिए मूर्ख गंवारो या फ़िर शातिर राजनीतिक सियारों द्वारा सराहे भी जाते।
2. इस कुचक्र के चलते 5000 से ज्यादा फौजी, केवल कश्मीर में अपने कर्त्तव्य के निर्वाहन के चलते शहीद, हो गए। यह लोग भारत के विभिन्न हिस्सों से आते थे, जिन्हों ने कश्मीर, जम्मू और लद्दाख को भारत में बनाए रखने के लिए अपनी जान की बाज़ी लगाई।
3. 370 एक ऐसी गलत फहमी का नाम था, जिस के चलते, कोई बेटा अपनी मां को मां न कह कर, पड़ोसन को अम्मा समझता रहे, और इस धारा का पड़ोसन ने, और आस्तीन के स्रपों ने भरपूर फ़ायदा उठाया। लड़के को गद्दार बनाने की राह पे लगा कर।
4. पड़ोसन के आज़ादी नामक झूठे वादों के रसगुल्ले खा कर, कश्मीरी युवा बहका रहा। वह समझता था, पड़ोसन आंटी उसे अपना बेटा बनाए गी, यह ना समझते हुए, कि जिस से अपनी बलूच औलाद नहीं संभलती, वह भला तुम्हारा क्या भला करे गी।
5. ख़ैर कुल मिला कर कश्मीरी खुदकुशी के रास्ते पर चलते रहे। 370 नामक छुरी को देश के गले पर चलाते रहे, यह सोच कर कि वह भारत को हलाल कर रहे हैं। देश मजबूर सा हुआ सब बर्दाश्त करता रहा, फौजी इस भट्ठी का ईंधन बनते रहे, तथा भ्रष्ट नेता इस जलती भट्ठी में अपनी राजनीतिक मुर्गियां भूनते रहे।
6. इस ही समय देश में आम जनता में से एक ऐसा नेता उभर रहा था, जिस ने राजनीति बिल्कुल ग्रासरूट से शुरू की, जिस ने कश्मीर और हिमाचल, और तमाम देश की परिस्थितियों को बारीकी से समझा, आंदोलनों में हिस्सा लिया, जहां मौका मिला, बेबाक बात कही। उस नेता का नाम था नरेंद्र मोदी।
7. 15 साल गुजरात का मुख्य मंत्री रहने के बाद, इस नेता के पास राजनीति और व्यवस्था प्रबंधन की असीम प्रैक्टिकल नॉलेज और स्किल्स थी। ऐसे में परिवारवाद के चलते, भारत की लीडर शिप में एक खला उत्पन हुई, और समय रहते उस ख़ला को, विधि के विधान द्वारा, मोदी नामक इस नेता द्वारा भर दिया गया।
8. मोदी 370 धारा और तमाम बाकी प्रिपेक्षों के चलते, कशमीर में चल रहे तमाम ज़ुल्मो जबर के सभी मूल कारणों को समझते हैं, अतः मोदी ने ठान लिया कि इस नासूर का पक्का इलाज करना होगा।
9. मोदी ने इस काम के लिए अमित शाह और दोवाल को अपने खास सिपसालारों के रूप में चुना। बाकी भी सभी ने इस में अपना अपना योगदान दिया।
10. लेकिन इस ऑपरेशन के लिए मोदी ने इस्लामिक हलाल के बदले मूल भारतीय योद्धाओं की विधि, यानी राजपूतों, सिक्खों , गुरखों और मराठों की विधि, झटके को चुना। यानी ज्यादा हो हल्ला नहीं, बस एक ही बार में काम तमाम।
11. मैं आदरणीय मोदी जी और शाह जी को, इस असीम कामयाबी के लिए हार्दिक मुबारकबाद देता हूं। तमाम मुश्किलों के बावजूद आप ने जो कर दिखाया, वह अद्वितीय है।
🚩वन्दे मातरम🚩
🚩तत्त्व सत्व श्री अकाल🚩
✒गुरु बलवंत गूरूने⚔

