1. उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति पिनाकी चन्द्र घोष देश के पहले लोकपाल अध्यक्ष बने। न्यायमूर्ति घोष मई 2017 में उच्चतम न्यायलय के न्यायधीश बने, और उपरांत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य थे। लोकपाल अध्यक्ष का वेतन और भत्ते भारत के प्रधान न्यायाधीश के बराबर होंगे। यह अपने आप में एक अतिमहत्वपूर्ण बात है, क्यों की सरकारी प्रोटोकोल में और ' किस का फ़ैसला किस पे भारी ' की तुलनात्मक विवेचना करते समय यह बात अहम रहे गी।
2. लोकपाल की मदद के लिए, लोकपाल समिति का गठन किया गया है, जिस में 8 सदस्य नियुक्त किए गए हैं। इस समिती के सदस्यों के वेतन भत्ते उच्चतम न्यायलय के न्यायाधीश के बराबर हों गे। नियमों के अनुसार, इनमें से चार न्यायिक सदस्य होने चाहिए और 4 अन्य सदस्य होने चाहिए। सदस्यों में से 50 प्रतिशत सदस्य अनुसूचित-जाति, जनजाति, या किसी अन्य पिछड़े या अल्पसंख्यक वर्ग से होने चाहिए, और इन में कम से कम एक महिला भी होनी चाहिए। अध्यक्ष लोकपाल और सदस्य पांच साल के कार्यकाल तक, या 70 साल की उम्र तक, अपने पद पे बने रह सकते हैं।
3. न्यायिक सदस्यों के नाम हैं, न्यायमूर्ति दिलीप भोसले, न्यायमूर्ति प्रदीप मोहंती, न्यायमूर्ति अभिलाषा कुमारी तथा न्यायाधीश अजय त्रिपाठी । न्यायाधीश अजय त्रिपाठी छतीसगढ़ के उच्च न्यायधीश हैं, जब की बाकी सभी विभिन्न उच्च न्यायलयों से सेवानिर्वित मुख्य न्यायधीश हैं। गैर न्यायिक सदस्य हैं, i). सशस्त्र सीमा बल की पूर्व पहली महिला प्रमुख अर्चना रामसुंदरम, ii). महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य सचिव दिनेश जैन, iii). पूर्व IRS अधिकारी महेंद्र सिंह, और iv). पूर्व IAS अधिकारी इंद्रजीत प्रसाद गौतम।
5. सरकार ने जस्टिस पिनाकी को लोकपाल नियुक्त कर के उन्हें जस्टिस रंजन के समकक्ष कर दिया गया है। धरातल पे यह समिती कितनी सार्थक सिद्ध होती है, वक़्त ही दर्शाए गा।
📚 गुरु बलवंत गुरने⚔
2. लोकपाल की मदद के लिए, लोकपाल समिति का गठन किया गया है, जिस में 8 सदस्य नियुक्त किए गए हैं। इस समिती के सदस्यों के वेतन भत्ते उच्चतम न्यायलय के न्यायाधीश के बराबर हों गे। नियमों के अनुसार, इनमें से चार न्यायिक सदस्य होने चाहिए और 4 अन्य सदस्य होने चाहिए। सदस्यों में से 50 प्रतिशत सदस्य अनुसूचित-जाति, जनजाति, या किसी अन्य पिछड़े या अल्पसंख्यक वर्ग से होने चाहिए, और इन में कम से कम एक महिला भी होनी चाहिए। अध्यक्ष लोकपाल और सदस्य पांच साल के कार्यकाल तक, या 70 साल की उम्र तक, अपने पद पे बने रह सकते हैं।
3. न्यायिक सदस्यों के नाम हैं, न्यायमूर्ति दिलीप भोसले, न्यायमूर्ति प्रदीप मोहंती, न्यायमूर्ति अभिलाषा कुमारी तथा न्यायाधीश अजय त्रिपाठी । न्यायाधीश अजय त्रिपाठी छतीसगढ़ के उच्च न्यायधीश हैं, जब की बाकी सभी विभिन्न उच्च न्यायलयों से सेवानिर्वित मुख्य न्यायधीश हैं। गैर न्यायिक सदस्य हैं, i). सशस्त्र सीमा बल की पूर्व पहली महिला प्रमुख अर्चना रामसुंदरम, ii). महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य सचिव दिनेश जैन, iii). पूर्व IRS अधिकारी महेंद्र सिंह, और iv). पूर्व IAS अधिकारी इंद्रजीत प्रसाद गौतम।
5. सरकार ने जस्टिस पिनाकी को लोकपाल नियुक्त कर के उन्हें जस्टिस रंजन के समकक्ष कर दिया गया है। धरातल पे यह समिती कितनी सार्थक सिद्ध होती है, वक़्त ही दर्शाए गा।
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