Showing posts with label गुरु बलवन्त गुरुने. Show all posts
Showing posts with label गुरु बलवन्त गुरुने. Show all posts

🚩देर आये, सुस्त आये, कैसे कह दें दरुस्त आये?🚩@ ✒GBG⚔

1.  सरकार के तीन नये कानून लाने के फैसले हैं तो बहुतु अच्छे लेकिन एक तो यह बहुत देरी से आये हैं, और दूसरा  इन का लागू होना भी एक बुझारत बूझने की क़वायद जैसा है।  एक तो है, तीन तलाक को ख़ारिज करने का फैसला,  दूसरा है GST को यकरंग करना, और तीसरा है ग़रीब सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण।

2.  हर अच्छी चीज़ का स्वागत करना, अभिन्नन्दन करना  अनिवार्य है,  अतः सरकार के  फैसलों का स्वागतम, लेकिन सच्च की कसौटी पे इन की सार्थकता का परखा जाना भी अनिवार्य है।

3.  याद रहे कि यह मुद्दे बिलकुल नये नहीं हैं। GST का मुद्दा  UPA के समय भी भुनाया गया, और तब भजपा ने इस का जम के विरोध किया था। तीन तलाक के मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय 2002 में शमीम आरा बनाम स्टेट ऑफ़ यूपी केस में तीन तलाक को पहले ही गैर संवैधानिक ठहरा चुकी है। सवर्णों के लिए आरक्षण का मुद्दा भी 27 साल से बार बार उछाला जाता रहा है। 1991 में नरसिम्हा सरकार ने सवर्णों को 10% कोटा देने का फैसला किया था, जिसे 1992 में सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक ठहराया। वो कहते हैं न की यदी बात कहने भर से बात बन सकती, तो न जाने कब का गधे ने खुद को घोडा कह कर घोडा बना लिया होता।  सरकार के इन फैसलों का असरदार होना  मुश्किल लग रहा है, आइये देखें कैसे।

4.  पहले बात करते हैं तीन तलाक बिल की। इस में कोई शक़ नहीं की 'तीन तलाक़' के प्रावधान के ख़िलाफ़ लाया जा रहा बिल मुस्लिम महिलाओं के मानव अधिकारों की रक्षा के लिए उठाया गया एक  बहुत अच्छा कदम है, और इस का भारतीय संविधान और भारतीयता की रक्षा में एक बड़ा योगदान रहे गा, लेकिन तभी, जब यह बिल पास हो कर कानून बन सका, अन्यथा यह सब केवल राजनितिक धांधली ही साबित हो गा।

5.   याद रखिये कि लोक सभा में तो 27-12-2018, को यह बिल पारित हो गया, जिस के लिए मोदी सरकार सराहना की पात्र है,  लेकिन राज्यसभा में भाजपा के साथी ही इस के ख़िलाफ़ खड़े नज़र आते हैं।

6.   जन्ता दल यूनाइटीड के वशिष्ठ नारायण सिंह ने इस बिल के बारे कहा कि, “We feel the way this bill is being rushed, it was avoidable and we feel more consultation should have taken place".   AIADMK के लीडर एम थम्बीदुराई ने कहा की वह भी मिनियोरिटीज़ की हिफाज़त के लिए, इस बिल की ख़िलाफ़त करें गे।

7.  अब यही लोग अपने राजनितिक फायदे के लिए कांग्रेस के भी ख़िलाफ़ खड़े हैं, और मुस्लिम महिलाओं के हक़्क़ हकूक के भी ख़िलाफ़ खड़े नज़र आते हैं। भाजपा और उस के नेता इन सभी तथ्यों से जानकार हैं। उन्हें मालूम है की यह सब नाटकबाज़ी चल रही है, ऐसे में वह बिल की ख़िलाफ़त करने वाले साथी दलों का हाथ क्यों नहीं झटक देते ?

8.  उत्तर है राजनितिक नुकसान का डर। तो कुल मिला कर  मुस्लिम औरतों का राजनितिक दिल लुभाने के लिए यह बिल एक अच्छा हथकंडा है, दर असल बिल लागू हो न हो, इस बात की किसी को परवाह नहीं।  यानी बिल का कानून बनना मुश्किल नज़र आता है, हाँ इस के ख़िलाफ़ या पक्ष में  हल्ला अवश्य मचाया जा सकता है, और कुछ वोट भी सहेजे  जा सकते है।

9.  अब GST की बात करें, तो जो काम किया ही 'एक राष्ट्र, एक कर' के असूल पर, तो उस  एक रुपी कर में दर्जनों स्लैब बनाने की क्या आवश्यकता थी, और फ़िर उस GST कानून में 300 से भी ज्यादा संशोधन किये जा चुके हैं।

10.  आम करदाता की तो बात ही छोड़िये, वकील और CA भी इस GST के  इंद्र-जाल ने अपना माथा पटकने पर मजबूर कर दिए हैं।  यानी,  साहिब और साहिब की टीम को कम से कम कोई कानून लाना है, तो पूरी तरहं जांच परख के लाओ।  यदी मेरे स्कूल की कक्षा में कोई एक ही विषय में बार बार ग़लती करे, तो उसे क्लास से बाहर कर दिया जाता था, लेकिन यहां कौन कहे, सुधर जाओ साहिब वरना 2019 में आप को जन्ता सत्ता से बाहिर कर दे गी।  अब चुनाव सर पे है,  और आचार संहिता भी लागु होने को है, तो चले बिल्ले हज करने।

11.  चलिये अब ग़रीब  सवर्णों के लिए 10 % आरक्षण की बात करें।  यह बिल भाजपा द्वारा मौके पे चौका मारने की क़वायद है। बेशक़ कोई भी दल इस का खुल कर विरोध नहीं करे गा, और 3 प्रदेशों में सिमटी भाजपा पुन्ह सवर्णों को लुभा कर खोया वोट शेयर  हासिल करने में कुछ कामयाब भी हो गी,  लेकिन यह खेल नया नहीं है। पहले तो यह बिल भी तीन तलाक़ की तरहं राज्य सभा में ही शायद अटक जाये ।  कारण एक तो मोदी का जादू और शाह का दबदबा अब उठ चुका है,  बगावत जगह जगह सर उठा रही है। आसाम  के भाजपाई मित्र, शिव सेना, अडवाणी जी, गडकरी, शत्रुघ्न सिन्हा, और न कितने ही लोग बगावत के अलम लहराने को बेताब हैं। बहुत से भाजपाई और साथी भाजपाई  चूहे भी, अब जहाज़ से छलांग लगाने और किसी दूसरे गठबंधन की नौका पे सवार होने पर गहन विचार कर रहेे हैं। तो इस सब के चलते, बावजूद इस आरक्षण के, स्वर्ण वोट सभी दलों में बंट जाएँ गे।

12.  मूलभूत दिक्कत इस परपोज़ल में यह है, की आप सवर्णों के हिस्से में से ही, 10%  आरक्षण सवर्णों को देने की बात कर रहे हैं, जब की आरक्षण का फायदा पा रही दलित और ओबीसी की क्रीमी लेयर का आरक्षण, जस का तस्स बना हुआ है।

13.  यानी बात तो चली थीे आरक्षण को मूलताः समाप्त करने की, या आरक्षण पा रही क्रीमी लेयर से 10% आरक्षण सवर्णों को देने की, लेकिन बात निपट रही है सवर्णों में ही एक नया वर्ग स्थापित करने की, यानी स्वर्ण वर्गीकरण की।  एक नया वर्ग, अब बन जाये गा  आरक्षित स्वर्ण वर्ग । इस सब में राजनीती की दुर्गन्ध साफ़ आती है, यानी पहले ही से आवंटित समाज को और भी बाँट देंने की क़वायद।

14.  बात इतने पे समाप्त नहीं होती, इस नई स्वर्ण आरक्षित श्रेणी में गिने जाने के मानक भी कुछ अजब गजब हैं, जैसे की किसी के पास मुनिसिपिल लिमिट में 200 गज से ज्यादा का प्लाट/घर न हो, अरे भाई हिमाचल के किसी छोटेे शहर में किसी के पास 500 गज़ का भी घर हो, तो उस की कीमत आज के वक्त भी कुछ ज्यादा नहीं बने गी, जब की मुम्बई या दिल्ली में केवल 50 गज़ जगह भी करोड़ो रुपये की हो गी। यानी किसी के आर्थिक सामर्थ्य को आप केवल घर के नाप पे नहीं आंक सकते।

15.  फिर  भी मसला यहीं समाप्त नहीं होता। ऐसा न हो की यह भी पुन्ह 1991 वाली नरसिम्हा सरकार के सवर्णों को 10% आरक्षण देने का रि-पले ही साबित हो। चुनाव के बाद कोई भी व्यक्ती सुप्रीम कोर्ट में मुद्दे को उठा कर, इसे असंवैधानिक फैसला होने की अपील डाल दे।

16.  मुद्दे  तो और भी बहुत हैं, लेकिन चारागरी का दावा करने वालों के पास देश के दर्दे दिल का कोई इलाज नहीं, सिवाय नई नई बीमारियां ढूँढने के, और एक दूसरे राजनीतिज्ञ या राजनितिक दल को कोसने के।

17.  यानि मौजूदा सरकार यह सब नये बिल आदि लाने का एक जाना बूझा प्रयास, जो एन चुनाव के मौके पे कर रही है, कहीं न कहिं यह सब राजनितिक लाभ के लिए किये जा रहे तालिसमि प्रदर्शन मात्र ही ज्यादा लगते हैं, अन्यथा कुछ नहीं।

18. तभी  मैं कहता हूँ की व्यवस्था परिवर्तन आवश्यक है,  तां की संविधान और मानव अधिकारों की रक्षा डंके की चोट पर की जा सके। मेरा सदृढ़ विश्वास है, कि यदी भारत को एक मजबूत देश बन कर उभरना है, तो देश में केवल संवैधानिक कानून ही लागू होने चाहिए।

19. यहां किसी भी वर्ग को,  धर्म को, या समुदाय को, आस्था और परंपरा के नाम पर खुद को, संविधान और संविधान द्वारा निर्मित कानून से ऊपर,  लादने का कोई अधिकार नहीं होना चाहिए।

20.  साथ ही यह भी आवश्यक है कि कानून बनाने और उस में संशोधन की पेचीदा प्रक्रिया को सरल और ज्यादा लोकतान्त्रिक,  तथा  बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जाना चाहिये। जहां लोकतंत्र ही जाली हो, उस देश का माली तो गुलशन का लुटेरा ही हो गा, नाम, दल या पार्टी यह हो या वह। देश सुधारना है तो वयवस्था में संशोधन आवश्यक है, आरक्षण वारक्षण के गोलगप्पे  कुछ चुनावी लाभ तो देते हैं, लेकिन देश को समाज का बंटवारा  कर के भ्र्ष्टाचार और विघठन की और भी गहरी गर्त में गिरा देते हैं,
🚩तत्त सत्त अकाल🚩
✒गुरु बलवन्त गुरुने.⚔

🚩भारत के असली मुद्दों पे कुछ बात हो जाये🚩@✒GBG⚔


1.  क्या आप जानते हैं, आप की भृष्ट व्यवस्था #हररोज़  #EveryDay #18000करोड़  रुपया, यानि 18,000-00,00,000₹ केवल देश के नेताओं, मंत्रियों सांसदों, विधायकों एंवम अन्य नेताओं के वेतन, नखरे चोचले, खाना पीना,  उद्घाटन नौटंकी, सैर सपाटा और अन्य ड्रामेबाज़ी पर खर्च करती है।

2.  कभी सोचा है एक साल में इन जुमलेबाज़ों पे खर्च हुई यह राशी कितनी हो गी ? संयुक्त रूप से #भारत   हमारी अती #भृष्ट राजनीतिक #व्यवस्था के चलते,  18000x 365, यानी #65लाख70हजारकरोड़ ₹ ,  यानि 65,70,000-00,00,000 ₹ सालाना, देश के महाभृष्ट और नौटंकी बाज़ नेताओं पर खर्च करता हैं।

3.  कुछ लोग 3000 करोड़ के पटेल साहिब के सटेच्यु को रो रहे है, अरे भाई वह तो फ़िर भी एक एक पर्यटन स्थल और स्मृति चिन्ह है। अगर सभी नेताओं को केवल 10 दिन के लिए सिस्टम से गायब कर दिया जाये तो केवल 10 दिन में देश की 1,80,000 करोड़ ₹, यानि एक लाख 80 हज़ार करोड़ ₹ की बचत हो गी। सदा के लिए इन्हें गायब किया तो समझो देश के न्यारे वारे हो जाएँ गे। यह है असली मुद्दा।

4.   इलावा इस के मन्दिर, मस्जिद, शहरों का नाम बदली करना, हिन्दू मुसलमान सिक्ख ईसाई का झगड़ा, जातपात का झगड़ा, इन सब में भी जन्ता को उलझाया जाता है, जिस के चलते अन्य सब बड़े बड़े भ्र्ष्टाचार के मुद्दों से ध्यान हटाया जा सके।

5.  शोर ही मचाना है तो नेताओं की बगार बन्द करवाने के लिए मचाओ।   केवल  1 बार सांसद या विधायक बनने के बाद, इन को उम्र भर मिलने वाली पेंशन और बाकी मुफ़्त सहूलतें बन्द करवाओ।

6.  देश की बात करनी है तो असली मुद्दों को पकड़ो, हज़ारों भृष्टाचारी सांसदों, विधायकों और बाकी छुटपुट कॉरपोरेटर, कॉन्सलर इत्यादि, जो व्यवस्था पर जोंकों से लदे हैं, इन  का व्यवस्था में स्थान भंग करवाने के लिए मुहीम चलाओ।  भ्र्ष्टाचार मुक्त भारत तभी बने गा जब भृष्टाचारी नेताओं की भीड़, जो व्यवस्था पर लदी है,  समाप्त हो गीे।
🚩तत्त सत्त अकाल🚩
✒गुरु बलवन्त गुरुने⚔

☣आदरणीय अटल जी के अटल सच्च☣@ ✒गुरु बलवन्त गुरुने⚔




🚩☣पढ़िए अटल के कुछ अटल सच्च, गुरु गुरुने की ज़ुबानी☣🚩@✒GBG⚔

1.  आदरणीय वाजपयी जी अब नहीं रहे.  जन्म, 25 दिसम्बर 1924, स्थान ग्वालियर मध्य प्रदेश, मृत्यु 16 अगस्त 2018, देहली। (उम्र 93 वर्ष). दल :-  विद्यार्थी जीवन काल में कम्युनिस्ट पार्टियों से सम्बन्ध, फिर कॉलेज की राजनीती के उपरांत 1977 तक भारतीय जन सन्घ, 1977 से 1980 तक- जन्ता दल, 1980 से 2018, भारतीय जन्ता पार्टी। कालेज, ग्वालियर, कानपूर, और विश्विद्यालय आगरा। मूल कर्म- कवी, लेखक और राजनीतिज्ञ, पूर्व प्रधान मंत्री भारत।

2.   सब से पहले तो पूर्व प्रधानमन्त्री को मृत्योपरांत श्रधांजलि और नमन, और अब कुछ कड़वे सच।  कवि ह्रदय तो थे ही, आशिक़ ह्रदय भी थे।  कुलदीप नैयर की मानें तो अटल बिहारी वाजपेयी के रोमांटिक एहसास उन ही की सहपाठिनी राजकुमारी कौल के लिए ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज में पढ़ाई के दौरान पनपे।  कहता चलूँ कि राजकुमारी कौल आखिरी वक्त तक अटल जी के साथ रहीं।

3.  कहा जाता है कि अटल जी ने कॉलेज के वक्त चिठ्ठी  के जरिए अपने प्रेम का इजहार भी किया था, लेकिन राजकुमारी कौल के पिता ने उनकी शादी  कॉलेज प्रोफेसर ब्रिज नारायण कौल से कर दी,  जिसके बाद राजकुमारी कौल दिल्ली में शिफ्ट हो गई।

4.   इसके बावजूद अटल और राजुकमारी कौल की दोस्ती पर कोई आंच नहीं आई, यहां तक की राजकुमारी कॉल जी वाजपेयी के साथ शिफ्ट कर गयीं और लिव इन रिलेशन में रहने लगीं।  जगत दिखाई के लिये बाजपेयी जी आजीवन कुँवारे ही रहे, लेकिन हकीकत यह है की प्रोफेसर कौल की बीवी अब उन की बीवी थी, और इस प्रेमी जोड़े की बेटी, नमिता को ओफ्फिशिअली बाजपेयी ने गोद ले लिया।  यानी कानूनन वाजपयी की सभी चल अचल सम्पति की वारिस नमिता है।

5.   कुछ सूत्रों के अनुसार कविवर बचपन के प्रेम को भुला न पाये, और अब  प्रोफेसर  बी.एन. कौल की बीवी  बन चुकी सुश्री राजकुमारी कौल जी, जो अब विवाहिता थीं,  के इश्क़ में पुन्ह ग्रिफ्तार हो गये, राजकुमारी को बिना किसी युद्ध, स्वयम्वर, विवाह या विवाद के ही हर लिया कविवर ने।  इस प्यार के चलते एक लड़की हो गयी, अब  प्रोफेसर साहिब की लुगाई अटल जी के यहां परमानेंटली शिफ्ट हों गयी और  प्रोफेसर साहिब अपने ओरिजिनल बच्चों को ले कर अमेरिका निकल गये या यहीं कहीं टूटे हुए दिल के मारे मृतयु का ग्रास बने, या उन का क्या हुआ कोई नहीं जानता।

6.   अब अटल जी, उन की लिव इन प्रेमिका और उन की लड़की, नमिता और लड़की का जवाई रंजन इत्यादि अटल जी का परिवार हैं। जो भी हो, सत्य तो यह है की राजकुमारी जी आजीवन अटल जी के साथ रही और  84 साल की उम्र में राजकुमारी कौल जी का देहांत हो गया ।

7.  वाजपयी जी रसिक थे, मासांहार के शौक़ीन थे, और राजनीती को केवल 'शोर शराबा' कहते थे। वह अक्सर हंसते थे और कहते थे कि राजनीती के 'शोर शराबे 'के बाद कुछ शराब तो आवध्यक है।

8.    मनाली अटल जी की सबसे प्रिय स्थली थी, जब भी रिलैक्स करना चाहते तो मनाली चले जाते, और आखिर  रिटायरमेंट के बाद सपरिवार मनाली में ही रहने लगे।

9.  आदरणीय बोलते बहुत अच्छा थे, कवि भी थे, गांधी और नेहरू के फैन थे, लेकिन राजनीती बहुत कमीनी चीज़ है साईं,  इस में सीधी ऊँगली से घी निकालना असम्भव है। इस ही के चलते कविवर ने इलाहबाद से गाय का मुद्दा गर्म करते हुए गौरक्षा का नारा बुलन्द  कर अपनी असली उठा पठक वाली राजनीती शुरू की।  अडवाणी जी  तक आदरणीय के सेक्रेटरी  रहे, और इस के एवज में ग्रह मंत्री तक बने, जब आदरणीय अटल  प्रधानमन्त्री बने। 

10.    प्रधान मंत्री बनने के बाद पार्टीबाज़ी से ऊपर उठ कर काम किया, इस की सराहना अत्यंत आवश्यक है, पाकिस्तान के साथ बस की राजनीती शुरू की, जिस की नकल में मोदी जी पाकिस्तान में बिना बुलावे हवाईजहाज से जा टपके,  लेकिन  फ़िर भी बात न बन पाई। बात तो 'वाजपयी की बस' से भी नहीं बनी थी।  फिर भी युद्ध हुआ। मेरे विचार में मोदी जी ने कम से कम यह तो कह दिया पकिस्तान से के यार जब जी करे गा आएं गे, बुलावा भेजो या न, और यदी दिल न किया तो नहीं आएं गे, उपरांत तुम्हारे बुलावे के।

11.  विरोधी तो CIA के साथ  भी अटल जी के तथाकथित सम्बन्धों पर तीर कसते हैं, और आप भी इन इल्ज़ामों से उभर न पाये। सच्च क्या है, केवल राम जानता है।  जहां तक धन धान्य की बात है, तो सुना है के बाबा के पास सूट केस भर के नोटों के हैं, तहखाने भर के जेवरात के। किवदन्ती है साहिब किवदन्ती।

12.   अब सारी कहानी रंजन भटाचार्जी की और प्रियदर्शिनी निमित्ता  की है, जो हूबहू अटल जी की कापी है। वैसे अटल जी की बेटी और जवाई काफ़ी स्विंगर किस्म के हैं, लेकिन उन का राजनितिक भविष्य फ़िलहाल एक दम सिफर है। अटल जी प्रमोद महाजन और अडवाणी के हाथों में भाजपा को देख कर खुश थे, लेकिन प्रमोद जी तो एक एक्सिडेंट में मारे गये, और अडवाणी जी राजनीती के आउटर सर्कल में जा पहुंचे, और इस तरहं अटल जी की अटल विरासत खत्म सी ही हो गयी, यानी वक्त वाजपेयी जी से बलवान निकला।

13.   एक बार फिर मुक़दर के सिकन्दर पूर्व प्रधानमन्त्री  को और एक अती आदरणीय कवि को मेरा प्रणाम।
🚩तत्त सत्त श्री अकाल🚩
✒गुरु बलवन्त गुरुने⚔

🚩अब शुरू होने वाली है लोकतंत्र की सब से बड़ी जंग🔥🚩हल्ला बोल, हल्ला बोल🚩✒GBG⚔

1.  हर शहर में छोटे छोटे राजनितिक प्रोपेगण्डा के गेंदबाज और बल्ले बाज़, यानी छोटे छोटे गेबल्ज़ की 'कोर टीमें' बनाई जा चुकी हैं, जिन का काम है, मौजूदा सरकार और मौजूदा नेता के हक़्क़ में दबा कर झूठ बोलना, और किसी भी प्रकार की विपरीत ध्वनि को दबाना।

2.   विपक्ष भी अब कमर कसने में लगा है। यानि मीडिया और सोशल मीडिया पे आरोपों प्रतिरोपों का संघर्ष सा छिड़ने वाला है।

3.  आप कुछ भी कहिये या शेयर कीजिये, आप को रोका जाये गा,  दबाया जाये गा, धमकाया भी जाये गा।

4.  तो मित्रो याद रहे, यदी आप देश से प्रेम करते हैं, तो पार्टी कोई भी हो, आप का मत्त कोई भी हो, जो सही न लगे, उस के खिलाफ आवाज़ अवश्य उठाइये, लेखनी अवश्य  चलाइये। यही आप के होने की निशानी है।

5.   ताक़तवर को सलाम करने की, चढ़ते सूरज को सलाम करने की अपनी ग़ुलाम मानसिकता को त्याग दी जीये। अब समय आ गया है, पगड़ी सम्भालने का, अतः आप अपनी अभिव्यक्ति की आज़ादी का सम्मान कीजिए।

6.  नेता आते जाते रहें गे, आप को वादों से लुभाते, और जुमलोँ के जंगलों में घुमाते फिराते, और यहां तक की धमकाते भी रहें गे।

7.  नेता किसी भी दल का हो, वादे करे गा, ऐसे वादे जो निभाये नहीं जाएँ गे।  जुमलोँ के तीर भी छोड़े जाएँ गे, कई किस्म के छोटे मोटे लालच और भय इत्यादि भी दिखलाये जाएँ गे। कोई चिंता न करें। अपनी अभिव्यक्ति को मरने मत दी जिए, ज़िंदा रखिये।

8.  अभिव्यक्ति की आज़ादी ही असली आज़ादी है। कानून की बंदिशे तो मुग़लों के समय भी थी, अंग्रेजों के समय भी और आज़ादी के बाद भी हैं, मौजूदा सरकार से पहले भी थी, और इस सरकार के उपरांत भी रहे गी,  लेकिन अभिव्यक्ति की आज़ादी सर्वोपरि है, कुछ कहिये, कुछ लिखिए, और सच्च का साथ दीजिये।

9.   अनिवार्य नहीं की सब का सच्च एक हो।  आप का और मेरा सच्च भिन्न हो सकते हैं। हमारी राजनितिक सोच अलग हो सकती है, लेकिन शोध चिंतन और चर्चा के बाद, जो भी आप को ठीक लगे, उस का साथ दीजिये।

10.  यदी आप किसी लोभ-वश या भय-वश किसी का साथ देते हैं,  तो समझ लीजिये कि मूलतः आप, असत्य के साथ खड़े हैं, और यदी आप केवल अपनी अंतहकरन की आवाज़ के साथ हैं, तो आप सत्य के योद्धा हैं।

11.   युद्ध मज़ेदार होने वाला है, मंगलमय चित के साथ इस युद्ध में उतरिये। सभी को शुभआशीष। सर्व का मंगल हो।
🚩तत्त सत्त अकाल🚩
©✒गुरु बलवन्त गुरुने⚔

🚩क्यों पिट गया ब्रांड मोदी❓🚩@ ✒⚔

1.  मैं दरअसल मोदी जी की बहुत इज़्ज़त करता  था, न जाने क्यों एक विश्वास सा था , कि यह बन्दा व्यवस्था में सार्थक बदलाव लाये गा, क्यों की यह जिस विशवास और जज़्बे से बोलता हैे, अवश्य कुछ कर दिखाए गा, लेकिन हुआ सब उस  का उल्टा।

2.  पहली ख़ुशी तो तब हुई जब पार्लियामेंट में जाते हुए सीढ़ियाँ चूमी, लेकिन अगले ही पल जिस प्रकार बन्दे ने अडवाणी जी को बेआबरू किया, तो मैं समझ गया, राष्ट्र ने बहुत ही गलत  घोड़े पे दाव खेल दिया है,  बहुत टेढी मेढ़ी चाल चलने वाला है।

3.   फिर नोट बन्दी, बैंको में हड़कंप, और न जाने क्या क्या। अरे भाई नोट का रंग बदलने से विकास होता हे क्या।  इक ऐसा खब्ती पहले भी दिल्ली में गद्दी नशीन हुआ था, जिस ने चमड़े के सिक्के चलाये थे, और एक अपने झोले वाले बाबा हैं।  इस सब से आम आदमी का क्या संवरा? कोई बताये, और यदी खुद समझा हो तभी समझाये , वरना कमेंट डिलिट कर दूँ गा।  बेवजह की जुमलेबाज़ी नहीं चाहिए।

4.   फ़िर टेक्स का चक्कर चला, एक टैक्स बोला तो न सिर्फ अनेक टैक्स का दौर आया, लेकिन यह भी हुआ की देश की कर व्यवस्था, खुद ही कितनी देर समझ न पायी की क्या करना है।  अभी फिर बदलाव हुआ है,  यानी और कंफ्यूज़न।

5.  चाहता था एक समय जब मैं मोदी जी को  तो सराहता था, लेकिन अब केवल एक हैरान परेशान व्यक्ति की तरहं देखता हूँ,  जो यह देख कर हैरान है की इतनी सीनियर पोजीशन पे जा के भी कोई व्यक्ति किस असानी के साथ देश के साथ और इतिहास के साथ, बस बातों की राजनीती कर रहा है, केवल जुमलेबाज़ी कर रहा है।

6.  अब तो इस बात पे और भी हैरान हूँ कि उन्हीं ने भारतीय राजनीती को झूठ के बेधड़क तुष्टि-करण का एक न्या कारख़ाना बना दिया है।  विपक्ष की सरकारें तो पहले भी बनी हैं लेकिन नमो जैसी दावेदारी किसी के पास न थी लेकिन फ़िर भी नमों ने  बस जुमलोँ की राजनीती जारी रक्खी,  और देश की किस्मत बदलने का मौका खो दिया।

 7.   नौ किलीमीटर की सड़क का उद्घाटन प्रधान मंत्री करने जाते हैं और केवल 9 दिन में, आधी सड़क लापता, या फिर ध्वस्त। देश की बैंक व्यवस्था ध्वस्त। राफेल डील में जो जहाज़ तकरीबन 500 करोड़ का मिल रहा था, उसे ही 1400 करोड़ में खरीदा, और जहाज  128 से घटा कर 37 कर दिए गये,  और सरकारी कारख़ाने  'HAL' से भारत में रैफल के निर्माण की डील को,  जुमा जुमा बनी अम्बानी की कम्पनी को दे दिया गया।  पुरानी रेल लाईनों और गाड़ियों का हाल खस्ता है, बुलेट ट्रेन चलाने के करार किये गये, भाई मुम्बई में पुल गिर रहे हैं, बरसात में मुम्बई को ठीक रखने की व्यवस्था ही कर दो,  कांग्रेस का निर्मल भारत प्रोग्राम चल रहा था, लेकिन उसी का नाम बदला, स्वच्छ भारत बोल कर,   कर दिया उद्घाटन।

9.   जो करने बाले काम थे एक नही किया।  यूनिफाइड सिविल कोड लाये क्या ?   नहीं।.   पीडीपी के साथ मिल कर 4 साल कश्मीर में सत्ता सुख भोगा, सेंकडो जवान शहीद करवा दिए, सैंकड़ों कश्मीरी मरवा दिए, अंधे कर दिया, और 4 साल मज़े से कुर्सी पकड़े  रहे, आख़िरी साल महबूबा ओ महबूबा तू है बेवफा,  गाते हुए निकल लिए झोला उठा के, सारा गन्दगी का घड़ा महबूबा के सर पे फोड़ दिया।  इसे निति या राजनीती नहीं , आचार्य चाणक्य ऐसे चलन को कुनीति कहते हैं। चाणक्य के अनुसार किसी कार्य को शुरू करने से पहले कुछ सवाल खुद से जरूर पूछें,
१. मैं यह क्यूँ कर रहा हूँ❓
२. इसके क्या परिणाम होंगे ❓
३. क्या यह सफल होगा❓
४. इस से देश या समाज का क्या फायदा हो गा❓
 ५ कहीं मैं केवल निजी स्वार्थ के लिए यह सब तो नही कर रहा❓

10.  खुद को सिद्ध करने के लिए आधी दुनिया घूम आये साहिब, कुल मिला के अंतर्राष्ट्रीय रिजल्ट जीरो। भूटान चीन के साथ आँख मिचोली खेल रहा है। नेपाल चीन की गोदी में बैठा है, पाकिस्तान तो रक्षा सम्बन्धों के चलते चीन का हिस्सा ही बन चूका है,  इरान से सम्बन्ध कब तक और कितने रुक  पाएं गे, चिंतनीय है, मालद्वीप चीन को बाप मान चुका है, और श्रीलंका तो चीन ही का दत्तक पुत्र बना हुआ है और, म्यानमार  हो या बंग्लादेदश, सिवाये शरणार्थी और उन शरणार्थियों में छिपे हुए आतंकियों के, इन के पास है ही क्या भारत को देने के लिए ?   तो भाई जी, किस की ताली बटोर कर लाये हो उन वेदेश यात्राओ से, क्या मिला 1400 करोड़ खर्च कर के,  बाबा जी का ठुल्लू।

11.   किसी ने पूछा कि भाई गद्दी खली पड़ी है, लाला जी कहाँ हैं ?  उत्तर मिला  के  लाला जी को बाजार घूमने का शौक लग गया है।
अच्छी बात, तो कोई मैनेजर बिठा दें दुकान पर ! नहीं जी, वह किसी और पे विशवास नहीं करते, बस खुद ही पे विशवास है।
  इस तरहं तो दुकान नुकसान में चली जाये गी,---कोई बात नहीं जी, लाला जी तो फ़क़ीर हैं, झोला उठा कर किसी और दुकान पे जा बैठें गे।

 12.   केवल जुमलोँ से देश नहीं चलता। कुछ काम जो केवल 2 साल के अंदर किये जाने चाहिए थे, वह अब तक नहीं किये गये।  अगर कुछ पत्ते फेंकने में देरी कर दी जाये, तो आप चाहते हुए भी विजयी नहीं बन सकते।   समय पे काम किया होता तो आज गुणगान करने वाले ज्यादा होते, काम तो कोई किया नहीं, बाते बांटी हैं बस थोक के भाव।

13.   तो क्या इस  बार सब के सब वादेे दोहराये जाएँ गे ?
या यह कहा जाये गा के 5 साल में क्या होता है, 5 साल और दो, या फिर कुछ नये जुमले घड़े जाएँ गे , और पांच साल मांगने के लिए।
 जबाब हैे, नहीं मिलें गे। आज नमो झूठे और मक्कारों की फेहरिस्त में सब से ऊपर खड़े हैं, और हमारा काम है झूठे का साथ कभी नहीं  देना।

14.   हमें कुछ सत्य मानने पड़ते हैं,  मैं चाहता हूँ की नमो व्ह बदलाव लाने के क़ाबिल बनें, जिन की हम सभी को चाहत है, लेकिन फ़िलहाल यह सम्भव नहीं दिखता।  जीत भी गये तो अलोकप्रियता और भी बढ़े गी, क्यों की व्यवस्था परिवर्तन की जगह केवल वाक्य प्रबलता का युद्ध ही लड़ा गया है, और इस बार यह देश के लिये विध्वंसक साबित हो गा।

15.  अभी भी समय है, यूनिफाइड कोड बिल ला कर,  कुछ तो ऐसा करना चाहिए, जो भारत के अभिनन्दन का पात्र भी हो और द्योतक भी हो, वरना सब व्यर्थ अनर्थ का विवाद है।
🚩तत्त सत्त अकाल🚩
✒गुरु बलवन्त गुरुने🚩

🚩आज भारतीयता का सरंक्षण आवश्यक क्यों⁉ @ ✒GBG⚔🚩

1.    भारतीयता क्या है, इसे समझने के लिये, राज्यसभा टी वी का प्रोग्राम, 'मैं भी भारत' अवश्य देखें। एंकर और प्रोड्यूसर, श्री श्याम सुंदर ने भारत के दूरस्थ कबीलों और ट्राईबल्ज़ पे बेहतरीन काम किया है, ।  देश को अगर जवाहर लाल और कोंग्रेस का कोई महानतम योगदान है, तो वह है विविधताओं को जीवित रखना,  इनटेन्जिबल और टेन्जिबल कल्चरल विविधताओं को जीवित रखना।

2.   कुछ लोग भारत को भारत की विभिन्न इकाइयों पे थोम्पा हुआ एक विचार मात्र बताते हैं। कौन कहता है कि विचार का थोम्पना ठीक है ?  लेकिन क्या आप में से किसी को भी लगता है,  की भारतीयता को कोई किसी पे थोम्प रहा है, या थोम्प सकता है ? याद रखिये दोस्तो,  किसी  भी विचार को किसी भी पे न थोम्पना ही दरअसल भारतीयता है।

3.  भाजपा के बीफ पॉलिटिक्स या  गौरक्षक  गुर्गों को, दिल्ली या गुजरात के दंगाइयों को,  पंजाब और कश्मीर के अलगाववादियों को,  या किसी भी राजनितिक दल के बदमाशों को, समस्त भारत की सोच  नहीं कहा जा सकता। यह सब तो केवल राजनितिक सिंधु में उथल पुथल करते राजनितिक मगरमछों की, भोली जन्ता को फांसने और खाने की चालें मात्र हैं।

4.  राजनेता कोई भी हो, विंध्वन्स का स्रोत हुआ करता है। सत्ता प्राप्त करना ही उस का मकसद होता है, जरिया कोई भी बने। राजनेता का कोई धर्म, दीन इमां नहीं होता, और वह किसी राम अल्लाह या वाहेगुरु का भक्त नही, बल्कि सत्ता का पुजारी होता है।  मन्दिर मस्जिद और रथ यात्रा की राजनीती भाजपा को अडवाणी की देन  है,  बीफ और गाय की राजनीती बाजपायी  की देन है,  पंजाब की गन्दी राजनीती, कोंग्रेस और अकालियों की आपसी रस्साकशी की देन है,  'मुसलमान खतरे में है',  की राजनीती, कुछ मुस्लिम नेताओं की देन है, जो आप को हर दल में दिख जाएँ गे। यह सब नहीँ झुठलाया जा सकता।  यह बहुत गहरे मसले हैं।

5.  लेकिन यह भी सच्च है, कि जितना गलत राहुल का मज़ाक उड़ा कर मोदी को हीरो बनाना है, उतना ही गलत मोदी को गलत कह के  राहुल को या  किसी और को चमकाना भी है। हम किसी भी व्यक्ति विशेष को भारतीयता के साथ नहीं जोड़ सकते। भारतीयता किसी भी व्यक्ति या राजनितिक दल द्वारा प्रमाणित किये जाने की मोहताज नहीं। भारतीयता हमारे इतिहास, शहीदों और संविधान द्वारा प्रमाणित है।

6.  आज  देश के भले के लिए आवश्यक है, की देश की बात हो, भारतीयता की बात ही, लेकिन देशभक्ति सिद्ध करने के लिए नहीं,  न ही किसी मौकापरस्त राजनितिक साधना के लिए, बल्कि देश को अनेकता में एक बनाये रखने के लिए।

7.    मैं मानता हूँ, भारत में बहुत विभिन्तायें हैं, लेकिन विभिन्तायें तो सारे विश्व भर में हैं। प्रमाणिक तौर पे सिक्ख, जैन या बौद्ध हिन्दू नहीं हैं,  हिन्दू मुसलमान नहीं, मुसलमान  हिन्दू नहीं हैं लेकिन हिन्दोस्तानी अवश्य है,  बीफ़ खाने वाले बहुत से हिन्दू भी हैं, न खाने वाले बहुते मुसलमान भी हैं,  बहादुर सिर्फ राजपूत या मरहठे, सिक्ख या जाट ही नहीं, महार और दलित भी हैं,   चालाक और मक्कार लोग  भी हर जगह हैं, लेकिन एक कॉन्सेप्ट है,  इंडिया, भारत, या कुछ भी कह लो, वह है तो इस सारे इलाके के  स्वाभिमान की गुंजाईश ज्यादा  है।

8.  मैं तमिल आंदोलन, खालिस्तान और आज़ाद कश्मीर आंदोलन, सब पे अध्य्यन कर चुका हूँ, फर्स्ट हैण्ड तज़ुर्बे भी है, लेकिन मेरा दृढ़ विश्वास है, इन में से कोई भी इकाई  अकेले दुकेले चीन या बाकी अंतर्राष्ट्रीय ताक़तों द्वारा ग्रस ली जाये गी।

9.   अतः,  बाकी सब ज़रूरी हो या न हो, आप किसी भी राजनीतिक सोच या दल से प्रेरित हों,  आज हमारी सभी की सब से बड़ी प्रेरणा आवश्यकता है, भारतीयता के प्रति निष्ठां, स्नेह और समर्पण। याद रहे मित्रो  की सम्पूर्ण जगत बहुत विकट परिस्थितयों से गुजरने वाला है, और हम भारतीयों की भलाई,  विभिनिताओं के बावजूद  भारत की रीढ़ की ताकत,   यानी भारतीयता को जीवित रखने में है।
🔱तत्त सत्त अकाल🚩
.©✒प्रेरक गुरु बलवन्त गुरुने⚔

🚩पुराण ग्रन्थों के अनुसार कलयुग के लक्षण🚩© @ ✒गुरु बलवन्त गुरुने. ⚔


1. कल युग के लक्षण पुराण ग्रन्थों में पहले ही कह दिये गए हैं। क्यों की वेद, उपनिषद और पुराण भारत के प्रमाण ग्रन्थ हैं, इस लिये इन्हें केवल पूजा पाठ या किसी एक धर्म से जोड़ कर देखना मिथ्याभास है। इन ग्रन्थों की बाणी में अनेकों सत्य, या सत्य की दिशा के निर्देश देने वाले इशारे छुपे हैं।

2.   मैं इन ग्रन्थों की बाणी के अनुसार कलयुग के कुछ लक्षण पेश कर रहा हूँ। इस लघु लेख के अंत में, इन्हीं तथ्यों से सम्बंधित श्लोक भी प्रमाण स्वरूप दर्ज कर रहा हूँ। आप मित्र गण लाभवंतीत हों गे,  ऐसी मेरी चेष्टा है।

3. कलयुग के लक्षणों के अनुसार शादी ब्याह केवल एक मज़ाक बन कर रह जाये गा। कुछ लोग केवल लोभ या फायदे के लिये प्रणय बन्धन में बंधें गे अवश्य, लेकिन  यह बन्धन कच्चे हों गे। ज्यादातर लोग शादी ब्याह के बगैर इक्कठे रहें गे और सहूलत के चलते, साथी बदल लिया करें गे।

4.  ज्यादा लोग मध्यलिंग तत्व प्रिविर्ति प्रमुख,  शुद्ध पुरुष या स्त्री गुण विहीन, ममता और योधागुण विहीन हों गे। स्त्रियों में ममता, और पुरुषों में  पौरुष गुण नहीं मिलें गे।

5.   धर्म कर्म केवल दिखावे मात्र के लिए हो गा, या यों कहिये की केवल ठग्गी का साधन हो गा। लोग केवल एक धागा (जनेऊ) पहनकर ब्राह्मण होने का दावा करेंगे, टोपी पहन कर मुसलमान, या फ़िर केवल पगड़ी इत्यादि पहन कर गुरसिक्ख होने का दावा करें गे।  यानी धर्म कर्म केवल वस्त्र आदी तक ही सीमीत हो गा। ह्रदय और कर्म  से पुरुष धर्मविहीन हो गा।

6.   लोग केवल समाज में अच्छा दिखने के  लिए  धार्मिक कामों में रूचि रखने का नाटक करें गे।  मन्दिर मस्जिद गुरुद्वारा, कीर्तन, सत्संग इत्यादि,  समाज सेवा नहीं, बल्कि अपने निजी मुनाफे के लिए, या फिर निजी कुटुम्भ मात्र के भरण पोषण का जरिया बन जायें गे। 

7.  भ्रष्ट लोगों से भरी हुई दुनियां में  लोग सत्ता और धन हासिल करने के लिए एक दूसरे का वध करें गे। लोभ के चलते भाई बहन आपस में एक दूसरे की मर्यादाहरण या मृत्यु का कारण बनें गे।

8.  भूख-प्यास और कई तरह की चिंताओं के चलते, लोग कई बीमारियां में डूबे रहें गे, और  अल्पआयु हों गे।

9.  केवल धन दौलत ही गुणवत्ता का आधार माना जाये गा। यानी धनवान चोर उच्चके, रांड भांड, ख़ुद को किसी कमांडर या प्रोफेसर से कम न समझें गे। तुच्छ लोग धन का दिखावा कर के ख़ुद को दूसरों से बेहतर और उच्च होने का अनावश्यक प्रदर्शन करें गे।

10.   न्याय केवल बाहूबली या घूसखोर ही पा सकें गे। यानी ग़रीब लोग न्याय से वंचित और लाचार हों गे। इस के चलते समाज में गुस्सा बढ़े गा। लोग या तो आत्महत्या करें गे, और या फ़िर हत्यारे बन जायें गे।

11.   चालाक, वाचाल, नौटंकी और बोलबाणी के धनी लोगों को विद्वान माना जाएगा । मूर्ख या काईं व्यक्ती  यदी चुप रहे गा तो उसे मुनि माना जाये गा। तुकबाज़ी कविता हो गी, और बकवास-बाज़ी कथा।

12.  आंधी, बेमौसम बारिश, बाढ़, सूखा, कड़ाके की सर्दी और गर्मी पड़े गी, जिस के चलते लोग प्राकृतिक संसाधनों के बखिये उधेड़ दें गे, परेशान हों गे और अन्ततः मृत्यु का ग्रास बनें गे।

13.  पर्यावरण नष्ट हो गा, जिस  के कारण अकाल पड़े गा। बाड़ ही खेत को खाये गी।  सरकारें बेतहाशा टेक्स लगाएं गी और एक बार फ़िर जन्ता को शहर गाँव इत्यादि त्याग कर जंगलों बियाबानों की शरण लेनी हो गी।

14.  लोग कन्दमूल और मांसभक्षी बन कर मजबूरन पहाड़ो, जंगलों और मरुस्थलों की शरण में चले जाएँ गे। 

15.  याद रहे की ऐसा समय जल्द ही आये गा जब मृत लोगों का अंतिम संस्कार, जीवित लोगों की ज़िंदा लाशों की भूख की अग्नि को शांत करने के, ईंधन स्वरूप हो गा।

16.  आप यदि इस सब से बचना चाहते हैं, तो पर्यवरण और इन्सानी मूल्यों की रक्षा में जुट जाएँ, वरना मत कहिये गा की समय रहते किसी ने सरल भाषा में यह सब नहीँ समझाया और संस्कृत हम ने सीखी नहीं।
🚩तत्त सत्त श्री अकाल🚩
©✒गुरु बलवन्त गुरुने ⚔

Refrences from Puranas:-
🙏दाम्पत्येभिरुचिहेतमायैव व्यावहारके। स्त्रीत्वे पुंस्तवे च हि रितर्विप्रत्वे सूत्रमेव हि।। दाक्ष्यम कुटुम्बभरणं यशाड्थे धर्मसेवनम्। प्रजाभिर्दुभिराकीर्णो क्षितिमंडले।। क्षित्तृड्भ्या व्याधिभिश्चैव संतप्स्यन्ते च चिन्चया। त्रिंशद्विंशतिवर्षाणि परमायु: कलौ नृणाम।। वित्तमेव कलौ नृणां जन्माचारगुणोदय:। धर्मन्यायव्यवस्थायां कारणं बलमेव हि।। अवृत्ताया न्यायदौर्बल्यं पाडिण्त्ये चापलं वच:।। अनावृष्टया व्याधिभिश्चैव संतप्स्यन्ते च चिन्या। शीतवीतीवपप्रावृड्हिमैरन्योन्यत: प्रजा:।। आत्छित्रदारद्रविणा याय्स्त्र्ति गिरिकाननम। छााकमूलामिषाक्षौद्रफलपुष्पाष्टिभोजना:।।🙏🌺🌼🌻