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🚩Ringing Bells and Clapping was a Rude Display of Lack of Empathy for Victims of Epidemic.🚩

1.   Supporting the 'Janta Curfew' was alright. A country wide lock down was a medical emergency and thus a necessity.   I heartily supported it, and will willingly support it again, as and when our government shall require us to do so,    'but' clapping of hands and ringing of bells  was nothing more than a cheap publicity stunt. It all looked like a vulgar display of  insensitivity and  looked  hollow and cheap.

2.  Many people came out and did it, partly because it is such an easy thing to do. Just  stand there and applaud and then walk back into our houses feeling self content, as if we have actually achieved something,  and partly many folks  did it just  because everyone else is doing it @ 'Fear Of Missing Out'. If the true intent to appreciate the health and sanitation workers existed,  the government would have focused on providing them with health care kits, rather than just ringing bells. The health workers  don't have enough personal protective equipment (Full body plastic suits we've seen frontline workers wearing in China and Italy).  They don't have enough testing kits. There have been cases where doctors and nurses working with COVID-19 haven't been tested yet,  as there aren't enough kits. The pitiable number of ventilators and  ICUs are nothing to applaud about.

3.   What's wrong with such symbolism is, that for Chamchas, it's just a chance to display their cheap support to a politician's call, bent upon believing that he is irreplaceable for India.  The common man imagines that, healthcare and other frontline workers are taken care of, by  just ringing a bell or clapping hands for them.  I'm afraid it doesn't work like that. The doctors and frontline workers are too busy to ask questions, they want us to see what's not going proper for them. They want us,  the people of India to  ask questions from our government on their behalf. We must ask the  government everyday, what it is actually doing for these frontline health workers on ground.

4.  Ironically, by ringing  bells and clapping our hands, we were simply hurting the sentiments of those suffering the consequences of epidemic.  Are we celebrating the suffering and death of thousands of lives taken by Covid-19,  or are  some of us even superstitiously HOPING, that like this the virus will disappear ?  Some fools were even dancing and making loud noises while clapping there hands.  How foolish and heartless it all seemed.  If it's all about showing support for health workers, well then,  rather than ringing bells, why don't  the clappers offer themselves as volunteer health assistants.

5.   I am sorry, but the truth must be upheld.  Personally, I appreciate the 'Janta Curfew',  as well as the lockdown, but this bell and clap drill sounded rather sick, when in Italy coffins are awaiting burials  for lack of space, and in India, people are not only dying, but  don't even know what is about to hit them.  Instead of ringing a bell or beating my daphali, I rather said a silent prayer for the departed souls, and those continuing to suffer unsaid pain @ Covid-19.

6.  केवल शोरशराबे के माध्यम से और इस तरह की ड्रामेबाजी  से काम नहीं चले गा आदरणीय, प्रधान प्रचारक साहिब । अभी तो बीमारी और जोर पकड़ेगी ।  कुछ निर्णायक कीजिये।  हर स्वास्थ्य सेवा करने वाले को full body masks मुहैया करवाना सरकार का फ़र्ज़ है। टेस्टिंग किट्ट भी भारी मात्रा में कम हैं।   केवल ताली या घंटियां बजाने से  COVID-19 पर विजय नहीं पाई जा सकती।
🔱🚩 सत्य ही शिव है🚩🔱
✒GBG⚔

🚩 फ़िर इक बार, मोदी सरकार। ठोको ताली।🚩@ ✒GBG ⚔

1.  मैं जब भी सरकार की आर्थिक नीतियों की आलोचना करता,  तो मेरे बहुत से भक्त मित्र कहते, गुरूजी आप भी, आप तो सैनिक भी  हैं, आध्यात्मिक अध्यापन में भी संलग्न हैं,  देशभक्त भी हैं, तो आप मोदी सरकार के खिलाफ क्यों कुछ बोलते हैं,  जैसे कि मोदी सरकार के खिलाफ कुछ कहना भारत वर्ष  के खिलाफ कुछ कहना हो।  मैं अक्सर यही कहता कि मित्रो, सरकार के काम की  प्रशंसा मात्र ही देशप्रेम नहीं होता, और आलोचना देश द्रोह नहीं होता। ऐसे लोगों को मेरा एक हल्का फुल्का  जवाब यही  होता, कि भानजे सच तो बोलना पड़े गा, और सच वह नहीं होता जो आप या  मैं देखना चाहें,  बल्कि सच  केवल वह होता है, जो प्रत्यक्ष दिखता है। 

2.   इलेक्शन एनाउंस हुए, गठबंधन गठबंधन का शोर मचा, लेकिन गठबन्धन तो खुद भी किसी सुनुयोजित गठबन्धन में नहीं बन्ध पाया। कन्हैया जैसा युवा नेता भी अगर गठबन्धन  कोंस्सेंस का संयुक्त केंडिडेट नहीं  बन पाया, तो लानत भेजिए ऐसे गठबन्धन पे।

 3.  खैर छोड़िए यह सब, आज तक से आगे आज कल की बात करते हैं।  आजकल आर्थिक मामलों की विफलताओं  का घड़ा फोड़ने के लिए अरुण जेटली काका के सर का  इस्तेमाल किए जाने की प्रक्रिया जारी है,  दुनिया भर की और मुसीबतों से निजात पाने के लिए पाकिस्तान नामक जादू की पुड़िया तो  है ही, भ्रष्टाचारियों को, धार्मिक अत्ती वादियों को,  नौटंकी फिल्म अभिनेता व अभिनेत्रियों को, चुनाव से ठीक पहले राजनैतिक दलों में शामिल कर चुनाव में उतारने की प्रक्रिया जस की तस चालू है,  यानी वही सब तमाशा अभी भी चालू है, और  गूंगे बहरे तमाशबीन, बस तमाशा देख रहे हैं।

4. गठबन्धन हो या सरकारी पार्टी,  सब वही पुरानी शराब, नई पुरानी बोतलों में डाल कर परोसने में व्यस्त हैं। सभी का अंतर-ध्येय , केवल और केवल जनता का फूतिया बना कर  सत्ता हासिल करने का है।  वही पुराने घिसेपिटे भ्रष्ट और जुमलेबाज़ लोग ही तो चुनाव लड़ रहे हैं।

5.   अब ऐसी विकल्प हीन  स्थिति में यदि मैं  कहता हूं कि मोदी को ही दोबारा ले आओ, तो सब की बोलती बन्द हो जाती है, और सभी कड़ाही में भुंन रहे पॉपकॉर्न की जैसी आवाज़ निकालने लगते हैं। आज वही भक्त कहते हैं, गुरु जी आप सठिया गए हैं क्या ? अगर असल में ही मोदी दोबारा आ गया तो !?!? यानी कुल मिला कर सब की बोलती बन्द है, और साधू है की इस विचित्र तमाशे को देख कर मन ही  मन मुस्कुरा उठता है।

6.  मित्रो, मत भूलिए कि, 'People get the government they deserve'.  अभी आप का नोट बन्दी, GST, तथा जुमले वाला मामू फिर आने वाला है।  त्य्यार हो जाओ, और ठीक से अपने अपने तकिए यथा संभव स्थानों पर बांध लो, क्यों कि इस बार भाई खास अंदाज से डंडा फेरने के मूड में है।  मैं तो कहता हूं, भाई जी, आप का सुस्वागतम। इस बार कुछ ऐसा करो, और कुछ इस अंदाज़ में चाबी घुमाओ,  कि सोई हुई जनता की  अक्ल ठिकाने आ जाए।
🚩 सत्यम शिवम सुंदरम🚩
©🎙✒ गुरु बलवंत गुरने।📚⚔

🚩With due regards, मेरे मित्रों के नाम, जो वल्लभ भाई की प्रतिमा पर हुए खर्चे से, या बाकी सब चुनावी दंगल की प्रक्रियाओं से चिंतित हैं🚩@ ✒ GbG⚔


1.  आदरणीय वल्लभ भाई की प्रतिमा तो आवश्यक थी।

2.  कुछ लोग कहते हैं इतनी बड़ी प्रतिमा तो केवल महात्मता गांधी की होनी चाहिये थी।

3.   महात्मा का अपना रोल था,  और उस हिसाब से प्रतिमा तो लाला लाजपत रॉय साहिब की, शहीद भगत सिंह और शहीद चंद्रशेखर आज़ाद, शहीद बिस्मिल,  और  बाकी सभी वीर आत्माओं की भी  बननी चाहिए, लेकिन इतने नाटक और खर्चे की आवश्यकता नहीं है।

4.  प्रतिमाओं के कद से इतिहास पुरुषों का, या प्रतिमाओं को बनवाने वालों का कद नहीँ नापा जा सकता, लेकिन सरदार वल्लभ भाई साहिब जैसी कुछ प्रतिभाएं ऐसी होती हैं, की उन की प्रतिमा कितनी ही बड़ी बना लो, उन की प्रतिभा के नाप से कम ही रहती है।

5.   इस लिए राष्ट्रनिर्माण के एक महानायक की प्रतिमा का बनना बनाना तो सरदार पटेल समान युग पुरुष के स्मरण में एक छोटी सी सलामी है।

6.   इस काम को करने के लिए मैं अवश्य ही, श्री नरेंद्र दामोदर भाई मोदी को बधाई का पात्र मानता हूँ।  हज़ारों कमियां हैं हम सब में, सो मोदी में भी हैं,  हाँ थोड़ा फेंकते हैं  नमो,  तो इस में नया क्या है !? सभी नेता फेंका फेंकी का खेल दशकों से खेल रहे हैं।

7.  उधर  जन्ता का माइक्रोस्कोप भी सब देख रहा है।   आज नहीं तो कल जन्ता हिसाब मांगे गी, लेकिन फ़िलहाल जन्ता को कोई अच्छा हिसाब लेने वाला नहीं दिख रहा।

8.   जन्ता की अदालत ढून्ढ रही है, कि ज्ज्ज किसे बनाएँ, तो पाते हैं कि सभी चोर हैं।

9.  चोरों की बारात को चोरो की बारात से बदल भी दिया तो क्या मिले गा ?

10.  आखीरकार कोई अच्छा विकल्प निकले, यह आवश्यक है,  जो मैदान में हैं,  सब बकवासी लोग हैं।

11.  जिन्हें आगे बढ़ कर देश को दिशा देनी चाहिए, सब चाय बिस्कुट का जुगाड़ करने में जुटते नज़र आते हैं। 

12.  स्थिति दयनीय है, जन्ता दिशाहीन है, मील के पत्थर अपने आप को बचाने में लगे हैं, चमचे मतलबपरस्ती के रसगुल्लों को चापलूसी की चाशनी में डुबाने में व्यस्त हैं।

13.   तो फिर रस्ता कहाँ है, मन्ज़िल कहाँ, कोई नहीं जानता, और इस ही सब का फायदा उठाने में लगे हैं, चोर  उचक्के लोग, नेता बन कर।

14.  अभी तो भक्त मण्डली, और वक्त मण्डली, यानी समय के मतलब-परस्त बटेरों का ही युद्ध जारी है।

15.  एक बार जब प्रेशर सिलेंडर फटने तक पहुंचे गा, तभी कोई युग पुरुष धमाके से पैदा हो गा।

16.  फ़िलहाल तो सब क़वायद युग पुरुषों को कद्दूकस कर के अपने मतलब की मिठाई बनाने  तक सीमित है।

17.  आप  सभी, तजुर्बेकार हैं आदरणीय हैं, सब गोलमाल समझते हैं, लेकिन समझ समझ के भी जो न समझे, मेरी समझ में वो नासमझ है।

19.   यानी, यदी आप देश और समाज को बदलना चाहते हैं, तो गली बाज़ार में निकलीये।  सड़कों का, बाज़ार का, समाज का, राजनीती का कूड़ा कर्कट साफ़ करने में योगदान दीजिये, अपने समय, ऊर्जा और प्रयत्न की आहूती राष्ट्रनिर्माण के यज्ञ में अर्पित कीजिये, केवल बातों से कुछ नहीं होने वाला।  इक़बाल का शेर याद आता है,
'इक़बाल' बड़े उपदेशक हैं,
मन बातों से मोह लेते हैं,
गुफ़्तार के गाज़ी बन तो गये,
किरदार के गाज़ी बन न सके।
🚩तत्त सत्त अकाल🚩
🙏✒गुरु बलवन्त गुरुने⚔

🚩क्यों पिट गया ब्रांड मोदी❓🚩@ ✒⚔

1.  मैं दरअसल मोदी जी की बहुत इज़्ज़त करता  था, न जाने क्यों एक विश्वास सा था , कि यह बन्दा व्यवस्था में सार्थक बदलाव लाये गा, क्यों की यह जिस विशवास और जज़्बे से बोलता हैे, अवश्य कुछ कर दिखाए गा, लेकिन हुआ सब उस  का उल्टा।

2.  पहली ख़ुशी तो तब हुई जब पार्लियामेंट में जाते हुए सीढ़ियाँ चूमी, लेकिन अगले ही पल जिस प्रकार बन्दे ने अडवाणी जी को बेआबरू किया, तो मैं समझ गया, राष्ट्र ने बहुत ही गलत  घोड़े पे दाव खेल दिया है,  बहुत टेढी मेढ़ी चाल चलने वाला है।

3.   फिर नोट बन्दी, बैंको में हड़कंप, और न जाने क्या क्या। अरे भाई नोट का रंग बदलने से विकास होता हे क्या।  इक ऐसा खब्ती पहले भी दिल्ली में गद्दी नशीन हुआ था, जिस ने चमड़े के सिक्के चलाये थे, और एक अपने झोले वाले बाबा हैं।  इस सब से आम आदमी का क्या संवरा? कोई बताये, और यदी खुद समझा हो तभी समझाये , वरना कमेंट डिलिट कर दूँ गा।  बेवजह की जुमलेबाज़ी नहीं चाहिए।

4.   फ़िर टेक्स का चक्कर चला, एक टैक्स बोला तो न सिर्फ अनेक टैक्स का दौर आया, लेकिन यह भी हुआ की देश की कर व्यवस्था, खुद ही कितनी देर समझ न पायी की क्या करना है।  अभी फिर बदलाव हुआ है,  यानी और कंफ्यूज़न।

5.  चाहता था एक समय जब मैं मोदी जी को  तो सराहता था, लेकिन अब केवल एक हैरान परेशान व्यक्ति की तरहं देखता हूँ,  जो यह देख कर हैरान है की इतनी सीनियर पोजीशन पे जा के भी कोई व्यक्ति किस असानी के साथ देश के साथ और इतिहास के साथ, बस बातों की राजनीती कर रहा है, केवल जुमलेबाज़ी कर रहा है।

6.  अब तो इस बात पे और भी हैरान हूँ कि उन्हीं ने भारतीय राजनीती को झूठ के बेधड़क तुष्टि-करण का एक न्या कारख़ाना बना दिया है।  विपक्ष की सरकारें तो पहले भी बनी हैं लेकिन नमो जैसी दावेदारी किसी के पास न थी लेकिन फ़िर भी नमों ने  बस जुमलोँ की राजनीती जारी रक्खी,  और देश की किस्मत बदलने का मौका खो दिया।

 7.   नौ किलीमीटर की सड़क का उद्घाटन प्रधान मंत्री करने जाते हैं और केवल 9 दिन में, आधी सड़क लापता, या फिर ध्वस्त। देश की बैंक व्यवस्था ध्वस्त। राफेल डील में जो जहाज़ तकरीबन 500 करोड़ का मिल रहा था, उसे ही 1400 करोड़ में खरीदा, और जहाज  128 से घटा कर 37 कर दिए गये,  और सरकारी कारख़ाने  'HAL' से भारत में रैफल के निर्माण की डील को,  जुमा जुमा बनी अम्बानी की कम्पनी को दे दिया गया।  पुरानी रेल लाईनों और गाड़ियों का हाल खस्ता है, बुलेट ट्रेन चलाने के करार किये गये, भाई मुम्बई में पुल गिर रहे हैं, बरसात में मुम्बई को ठीक रखने की व्यवस्था ही कर दो,  कांग्रेस का निर्मल भारत प्रोग्राम चल रहा था, लेकिन उसी का नाम बदला, स्वच्छ भारत बोल कर,   कर दिया उद्घाटन।

9.   जो करने बाले काम थे एक नही किया।  यूनिफाइड सिविल कोड लाये क्या ?   नहीं।.   पीडीपी के साथ मिल कर 4 साल कश्मीर में सत्ता सुख भोगा, सेंकडो जवान शहीद करवा दिए, सैंकड़ों कश्मीरी मरवा दिए, अंधे कर दिया, और 4 साल मज़े से कुर्सी पकड़े  रहे, आख़िरी साल महबूबा ओ महबूबा तू है बेवफा,  गाते हुए निकल लिए झोला उठा के, सारा गन्दगी का घड़ा महबूबा के सर पे फोड़ दिया।  इसे निति या राजनीती नहीं , आचार्य चाणक्य ऐसे चलन को कुनीति कहते हैं। चाणक्य के अनुसार किसी कार्य को शुरू करने से पहले कुछ सवाल खुद से जरूर पूछें,
१. मैं यह क्यूँ कर रहा हूँ❓
२. इसके क्या परिणाम होंगे ❓
३. क्या यह सफल होगा❓
४. इस से देश या समाज का क्या फायदा हो गा❓
 ५ कहीं मैं केवल निजी स्वार्थ के लिए यह सब तो नही कर रहा❓

10.  खुद को सिद्ध करने के लिए आधी दुनिया घूम आये साहिब, कुल मिला के अंतर्राष्ट्रीय रिजल्ट जीरो। भूटान चीन के साथ आँख मिचोली खेल रहा है। नेपाल चीन की गोदी में बैठा है, पाकिस्तान तो रक्षा सम्बन्धों के चलते चीन का हिस्सा ही बन चूका है,  इरान से सम्बन्ध कब तक और कितने रुक  पाएं गे, चिंतनीय है, मालद्वीप चीन को बाप मान चुका है, और श्रीलंका तो चीन ही का दत्तक पुत्र बना हुआ है और, म्यानमार  हो या बंग्लादेदश, सिवाये शरणार्थी और उन शरणार्थियों में छिपे हुए आतंकियों के, इन के पास है ही क्या भारत को देने के लिए ?   तो भाई जी, किस की ताली बटोर कर लाये हो उन वेदेश यात्राओ से, क्या मिला 1400 करोड़ खर्च कर के,  बाबा जी का ठुल्लू।

11.   किसी ने पूछा कि भाई गद्दी खली पड़ी है, लाला जी कहाँ हैं ?  उत्तर मिला  के  लाला जी को बाजार घूमने का शौक लग गया है।
अच्छी बात, तो कोई मैनेजर बिठा दें दुकान पर ! नहीं जी, वह किसी और पे विशवास नहीं करते, बस खुद ही पे विशवास है।
  इस तरहं तो दुकान नुकसान में चली जाये गी,---कोई बात नहीं जी, लाला जी तो फ़क़ीर हैं, झोला उठा कर किसी और दुकान पे जा बैठें गे।

 12.   केवल जुमलोँ से देश नहीं चलता। कुछ काम जो केवल 2 साल के अंदर किये जाने चाहिए थे, वह अब तक नहीं किये गये।  अगर कुछ पत्ते फेंकने में देरी कर दी जाये, तो आप चाहते हुए भी विजयी नहीं बन सकते।   समय पे काम किया होता तो आज गुणगान करने वाले ज्यादा होते, काम तो कोई किया नहीं, बाते बांटी हैं बस थोक के भाव।

13.   तो क्या इस  बार सब के सब वादेे दोहराये जाएँ गे ?
या यह कहा जाये गा के 5 साल में क्या होता है, 5 साल और दो, या फिर कुछ नये जुमले घड़े जाएँ गे , और पांच साल मांगने के लिए।
 जबाब हैे, नहीं मिलें गे। आज नमो झूठे और मक्कारों की फेहरिस्त में सब से ऊपर खड़े हैं, और हमारा काम है झूठे का साथ कभी नहीं  देना।

14.   हमें कुछ सत्य मानने पड़ते हैं,  मैं चाहता हूँ की नमो व्ह बदलाव लाने के क़ाबिल बनें, जिन की हम सभी को चाहत है, लेकिन फ़िलहाल यह सम्भव नहीं दिखता।  जीत भी गये तो अलोकप्रियता और भी बढ़े गी, क्यों की व्यवस्था परिवर्तन की जगह केवल वाक्य प्रबलता का युद्ध ही लड़ा गया है, और इस बार यह देश के लिये विध्वंसक साबित हो गा।

15.  अभी भी समय है, यूनिफाइड कोड बिल ला कर,  कुछ तो ऐसा करना चाहिए, जो भारत के अभिनन्दन का पात्र भी हो और द्योतक भी हो, वरना सब व्यर्थ अनर्थ का विवाद है।
🚩तत्त सत्त अकाल🚩
✒गुरु बलवन्त गुरुने🚩

🚩A positive news from PM's office🚩@©✒GBG⚔



1.  🚩A positive news from PM's office🚩@©✒GBG⚔

1.  Prime minister of India has reportedly issued a statement that ,"We are Ashamed as a Country", in view of Kathua gang rape, Unnao gang rape and other crimes against women and the poor in society.

2.  He has also given a call  for 'Justice for Daughters' of India.

3.  In my opinion these are very positive steps in the right direction, as Namo's statements are going to set the direction and pace of the investigative aswellas administrative units across the nation.

4.  Not only will his statements discourage the criminals from daring to commit heinous crimes, but his statements shall also act as morale boosters for upright and good police officers, who want to do their duty righteously.

5.  I highly appreciate these statements by Namo, but I still do wish and advise him, and his office to  issue more such positive statements, as they have the power of being directive statements, a little earlier and in good time.

6.  If the Prime minister of India gets active on these issues, which are the bane of poor and powerless, he shall be remembered as a good administrator. People are more interested in justice and good administration, rather than bullet trains or foreign relations, ofcourse every thing being important in its own place.

7.  I have the confidence that if Namo or any PM, sets his priorities right, the nation can be brought back on its right tracks sooner than later. A word from the Prime minister means a lot for India, as it is a top driven adminstrative system and a patriarchal society.

8.  Although the PM's statements, have come seemingly after a huge protest lead by Priyanka Gandhi, Rahul and other congress men, aswellas some Supreme Court action and the PDP asking for the heads of MLAs supporting the Kathua rapists, but still, I highly appreciate  and value Namo's statements, and expect positive results.

9.  Let me make it clear that as PM, it is Namo's duty to ensure that the executive of the nation, right from his ministers, bureaucrats and the subordinate executive, must react to administrative and police matters in good time.

10.  As far as the common man is concerned, the Prime minister and not the home minister is the boss around here, So Namo must become more proactive at  home front, and look beyond winning elections alone.

Thank you Mr. Prime minister,  for doing what should have been done a little earlier, but indeed a Thanks from the heart  once again.
देर लगी आने में लेकिन,
शुक्र है फ़िर भी आये तो🙏
🚩तत्त सत्त अकाल🚩
✒गुरु बलवन्त गुरुने⚔