🚩Accidental Prime Minister, my Candid Review.🚩@GBG

1.  Manmohan Singh was not an accidental Prime minister. He was a 'Most Deserving Prime Minister'. Trained in economics from Oxford, D.Litt from Cambridge, ex Finance minster of India, ex governor of RBI, can not be an accidental Prime minister. A film on him should have been named 'DESERVING PRIME MINISTER'.

2.  Undoubtedly as the movie itself is based on a book by the same name, there is technically nothing wrong with the name as such, but ethically it could have been dropped.

3.  Anupam Kher ji, is a seasoned actor and a master of comedy aswellas serious portrayals, but inspite of that he has focused on projecting Mr. Singh,  much more weaker a personality than he actually is. Elements of parody are glaringly clear.

4.  The movie is a biopic, made on linear sequential documentary format, aimed to make every thing look real. The film is of 1 hour 52 minutes duration,  and has no songs. Akshay Khanna, who has played the role of Sanjay Baru, the political journalist, infact the writer of book, has been given so much of time, that he looks like the protagonist. All congress leaders including Sonia Gandhi ji, played by Suzanne, have been portrayed in negative light.

5.  That be it, films  and other media have always been used by parties or persons themselves to magnify their own people in positive light, or by their adversaries the media has been used to either caricature or villianize the targeted person or party. This film is no different, thus the film has a strong propaganda motive.

6.   Films  with political motives have been, and will continue to be produced all over the world. Their content and  intent too, will continue  to be debated by panelists and critics. All this is a part of the game, and in my opinion the game must continue.

7.  Review in Points.
Script is based on Sanjaya Baru's book by the same name.  He was PM. Manmohan Singh's media advisor from May 2004 to August 2008.
Duration of film- 1 hour 52 minutes.
Genre of Film:- Political Propaganda.
Director:- Vijay Ratnakar Gutte.
Produced by Sunil Bohra Dhaval Gada.
Production Company:- Rudra Productions (UK), Bohra Bros & Pen India Limited
Story:- Sanjay Baru
Script:- Vijay Ratnkar Gutte, Mayank Tewari, Karl Dunne, Aditya Sinha.
Music :- Sudip Roy
Sadhu Tiwari.
Cinematography:- Sachin Krishn.
Editing:- Praveen K. L.
Format :- Linear sequential biopic.
Major Cast:-
Akshay Khana plays Sanjay Baru.
Anupam Kher plays Dr. Manmohan Singh.
Suzanne Bernard plays Mrs. Sonia Gandhi.
Arjun Mathur plays Rahul Gandhi.
Aahana Kumar plays Priyanka Gandhi.

8.  Other than these major roles,  the cast of rest of the charaters in the film are.....
Abdul Quadir Amin as Ajay Singh.
Vimal Verma as Lalu Prasad Yadav.
Avtar Sahni as Lal Krishna Advani.
Anil Rastogi as Shivraj Patil.
Ajit Satbhai as P. V. Narasimha Rao.
Chitragupta Sinha as P. V. Ranga Rao.
Vipin Sharma as Ahmed Patel.
Divya Seth Shah as Gursharan Kaur.
Shiv Kumar Subramaniam as P. Chidambaram.
Munish Bhardwaj as Kapil Sibal.
Ram Avtar as Atal Bihari Vajpayee.
Sunil Kothari as APJ Abdul Kalam.
Atul Kumar as JN Dixit.
Anish Kuruvilla as T. K. A. Nair.
Prakash Belawadi as MK Narayanan.
Madan Joshi as Brajesh Mishra.
Pradeep Chakravarti as Pranab Mukherjee.
Yogesh Tripathy as Natwar Singh.
Bobby Parvez as Pulok Chatterji.
Anil Zankar as Sitaram Yechury.
Hansal Mehta as Naveen Patnaik.
Vimal Verma as Lalu Prasad Yadav.
Deepak Gheewala as N. Ram.
Naval Shukla as Yashwant Sinha.
Deepak Dadwal as Jaswant Singh.
Ashok Sagar Bhagat as Arjun Singh.
Ramesh Bhatkar as Prithviraj Chavan.
Subhash Tyagi as Mulayam Singh Yadav.
Manoj Tiger as Amar Singh.
Adarsh Gautam as Pak PM Yousaf Raza Gilani.
Chembur Hari as AK Antony.
Kishor Jaykar as George Fernandes.
Aazam Khan as Ghulam Nabi Azad.
Vijay Singh as Bhairon Singh Shekhawat.
Askari Naqvi as Vir SanghviPradeep Kuckreja as Prakash Karat.
Gull Jolly as Daman Singh.
Archana Sharma as Chiki Sarkar

9.  Last word, the film might sell a little, or more footfall can be ensured by stunt marketing, but over all, it is a shoddy parody aimed  at caricaturing Dr. Singh,  Gandhi's and congress, or any one not alligned to BJ P..period.ll
🚩🎬 This is It.📽🚩
🚩As a principal, Creativity and Freedom of Expression must Continue.So be it. 🚩
@Guru Balwant Gurunay.

Took part in a panel discussion on this film, moderated by Mr. K.P. Singh,  on JAS TV, an international television channel.

🚩देर आये, सुस्त आये, कैसे कह दें दरुस्त आये?🚩@ ✒GBG⚔

1.  सरकार के तीन नये कानून लाने के फैसले हैं तो बहुतु अच्छे लेकिन एक तो यह बहुत देरी से आये हैं, और दूसरा  इन का लागू होना भी एक बुझारत बूझने की क़वायद जैसा है।  एक तो है, तीन तलाक को ख़ारिज करने का फैसला,  दूसरा है GST को यकरंग करना, और तीसरा है ग़रीब सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण।

2.  हर अच्छी चीज़ का स्वागत करना, अभिन्नन्दन करना  अनिवार्य है,  अतः सरकार के  फैसलों का स्वागतम, लेकिन सच्च की कसौटी पे इन की सार्थकता का परखा जाना भी अनिवार्य है।

3.  याद रहे कि यह मुद्दे बिलकुल नये नहीं हैं। GST का मुद्दा  UPA के समय भी भुनाया गया, और तब भजपा ने इस का जम के विरोध किया था। तीन तलाक के मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय 2002 में शमीम आरा बनाम स्टेट ऑफ़ यूपी केस में तीन तलाक को पहले ही गैर संवैधानिक ठहरा चुकी है। सवर्णों के लिए आरक्षण का मुद्दा भी 27 साल से बार बार उछाला जाता रहा है। 1991 में नरसिम्हा सरकार ने सवर्णों को 10% कोटा देने का फैसला किया था, जिसे 1992 में सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक ठहराया। वो कहते हैं न की यदी बात कहने भर से बात बन सकती, तो न जाने कब का गधे ने खुद को घोडा कह कर घोडा बना लिया होता।  सरकार के इन फैसलों का असरदार होना  मुश्किल लग रहा है, आइये देखें कैसे।

4.  पहले बात करते हैं तीन तलाक बिल की। इस में कोई शक़ नहीं की 'तीन तलाक़' के प्रावधान के ख़िलाफ़ लाया जा रहा बिल मुस्लिम महिलाओं के मानव अधिकारों की रक्षा के लिए उठाया गया एक  बहुत अच्छा कदम है, और इस का भारतीय संविधान और भारतीयता की रक्षा में एक बड़ा योगदान रहे गा, लेकिन तभी, जब यह बिल पास हो कर कानून बन सका, अन्यथा यह सब केवल राजनितिक धांधली ही साबित हो गा।

5.   याद रखिये कि लोक सभा में तो 27-12-2018, को यह बिल पारित हो गया, जिस के लिए मोदी सरकार सराहना की पात्र है,  लेकिन राज्यसभा में भाजपा के साथी ही इस के ख़िलाफ़ खड़े नज़र आते हैं।

6.   जन्ता दल यूनाइटीड के वशिष्ठ नारायण सिंह ने इस बिल के बारे कहा कि, “We feel the way this bill is being rushed, it was avoidable and we feel more consultation should have taken place".   AIADMK के लीडर एम थम्बीदुराई ने कहा की वह भी मिनियोरिटीज़ की हिफाज़त के लिए, इस बिल की ख़िलाफ़त करें गे।

7.  अब यही लोग अपने राजनितिक फायदे के लिए कांग्रेस के भी ख़िलाफ़ खड़े हैं, और मुस्लिम महिलाओं के हक़्क़ हकूक के भी ख़िलाफ़ खड़े नज़र आते हैं। भाजपा और उस के नेता इन सभी तथ्यों से जानकार हैं। उन्हें मालूम है की यह सब नाटकबाज़ी चल रही है, ऐसे में वह बिल की ख़िलाफ़त करने वाले साथी दलों का हाथ क्यों नहीं झटक देते ?

8.  उत्तर है राजनितिक नुकसान का डर। तो कुल मिला कर  मुस्लिम औरतों का राजनितिक दिल लुभाने के लिए यह बिल एक अच्छा हथकंडा है, दर असल बिल लागू हो न हो, इस बात की किसी को परवाह नहीं।  यानी बिल का कानून बनना मुश्किल नज़र आता है, हाँ इस के ख़िलाफ़ या पक्ष में  हल्ला अवश्य मचाया जा सकता है, और कुछ वोट भी सहेजे  जा सकते है।

9.  अब GST की बात करें, तो जो काम किया ही 'एक राष्ट्र, एक कर' के असूल पर, तो उस  एक रुपी कर में दर्जनों स्लैब बनाने की क्या आवश्यकता थी, और फ़िर उस GST कानून में 300 से भी ज्यादा संशोधन किये जा चुके हैं।

10.  आम करदाता की तो बात ही छोड़िये, वकील और CA भी इस GST के  इंद्र-जाल ने अपना माथा पटकने पर मजबूर कर दिए हैं।  यानी,  साहिब और साहिब की टीम को कम से कम कोई कानून लाना है, तो पूरी तरहं जांच परख के लाओ।  यदी मेरे स्कूल की कक्षा में कोई एक ही विषय में बार बार ग़लती करे, तो उसे क्लास से बाहर कर दिया जाता था, लेकिन यहां कौन कहे, सुधर जाओ साहिब वरना 2019 में आप को जन्ता सत्ता से बाहिर कर दे गी।  अब चुनाव सर पे है,  और आचार संहिता भी लागु होने को है, तो चले बिल्ले हज करने।

11.  चलिये अब ग़रीब  सवर्णों के लिए 10 % आरक्षण की बात करें।  यह बिल भाजपा द्वारा मौके पे चौका मारने की क़वायद है। बेशक़ कोई भी दल इस का खुल कर विरोध नहीं करे गा, और 3 प्रदेशों में सिमटी भाजपा पुन्ह सवर्णों को लुभा कर खोया वोट शेयर  हासिल करने में कुछ कामयाब भी हो गी,  लेकिन यह खेल नया नहीं है। पहले तो यह बिल भी तीन तलाक़ की तरहं राज्य सभा में ही शायद अटक जाये ।  कारण एक तो मोदी का जादू और शाह का दबदबा अब उठ चुका है,  बगावत जगह जगह सर उठा रही है। आसाम  के भाजपाई मित्र, शिव सेना, अडवाणी जी, गडकरी, शत्रुघ्न सिन्हा, और न कितने ही लोग बगावत के अलम लहराने को बेताब हैं। बहुत से भाजपाई और साथी भाजपाई  चूहे भी, अब जहाज़ से छलांग लगाने और किसी दूसरे गठबंधन की नौका पे सवार होने पर गहन विचार कर रहेे हैं। तो इस सब के चलते, बावजूद इस आरक्षण के, स्वर्ण वोट सभी दलों में बंट जाएँ गे।

12.  मूलभूत दिक्कत इस परपोज़ल में यह है, की आप सवर्णों के हिस्से में से ही, 10%  आरक्षण सवर्णों को देने की बात कर रहे हैं, जब की आरक्षण का फायदा पा रही दलित और ओबीसी की क्रीमी लेयर का आरक्षण, जस का तस्स बना हुआ है।

13.  यानी बात तो चली थीे आरक्षण को मूलताः समाप्त करने की, या आरक्षण पा रही क्रीमी लेयर से 10% आरक्षण सवर्णों को देने की, लेकिन बात निपट रही है सवर्णों में ही एक नया वर्ग स्थापित करने की, यानी स्वर्ण वर्गीकरण की।  एक नया वर्ग, अब बन जाये गा  आरक्षित स्वर्ण वर्ग । इस सब में राजनीती की दुर्गन्ध साफ़ आती है, यानी पहले ही से आवंटित समाज को और भी बाँट देंने की क़वायद।

14.  बात इतने पे समाप्त नहीं होती, इस नई स्वर्ण आरक्षित श्रेणी में गिने जाने के मानक भी कुछ अजब गजब हैं, जैसे की किसी के पास मुनिसिपिल लिमिट में 200 गज से ज्यादा का प्लाट/घर न हो, अरे भाई हिमाचल के किसी छोटेे शहर में किसी के पास 500 गज़ का भी घर हो, तो उस की कीमत आज के वक्त भी कुछ ज्यादा नहीं बने गी, जब की मुम्बई या दिल्ली में केवल 50 गज़ जगह भी करोड़ो रुपये की हो गी। यानी किसी के आर्थिक सामर्थ्य को आप केवल घर के नाप पे नहीं आंक सकते।

15.  फिर  भी मसला यहीं समाप्त नहीं होता। ऐसा न हो की यह भी पुन्ह 1991 वाली नरसिम्हा सरकार के सवर्णों को 10% आरक्षण देने का रि-पले ही साबित हो। चुनाव के बाद कोई भी व्यक्ती सुप्रीम कोर्ट में मुद्दे को उठा कर, इसे असंवैधानिक फैसला होने की अपील डाल दे।

16.  मुद्दे  तो और भी बहुत हैं, लेकिन चारागरी का दावा करने वालों के पास देश के दर्दे दिल का कोई इलाज नहीं, सिवाय नई नई बीमारियां ढूँढने के, और एक दूसरे राजनीतिज्ञ या राजनितिक दल को कोसने के।

17.  यानि मौजूदा सरकार यह सब नये बिल आदि लाने का एक जाना बूझा प्रयास, जो एन चुनाव के मौके पे कर रही है, कहीं न कहिं यह सब राजनितिक लाभ के लिए किये जा रहे तालिसमि प्रदर्शन मात्र ही ज्यादा लगते हैं, अन्यथा कुछ नहीं।

18. तभी  मैं कहता हूँ की व्यवस्था परिवर्तन आवश्यक है,  तां की संविधान और मानव अधिकारों की रक्षा डंके की चोट पर की जा सके। मेरा सदृढ़ विश्वास है, कि यदी भारत को एक मजबूत देश बन कर उभरना है, तो देश में केवल संवैधानिक कानून ही लागू होने चाहिए।

19. यहां किसी भी वर्ग को,  धर्म को, या समुदाय को, आस्था और परंपरा के नाम पर खुद को, संविधान और संविधान द्वारा निर्मित कानून से ऊपर,  लादने का कोई अधिकार नहीं होना चाहिए।

20.  साथ ही यह भी आवश्यक है कि कानून बनाने और उस में संशोधन की पेचीदा प्रक्रिया को सरल और ज्यादा लोकतान्त्रिक,  तथा  बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जाना चाहिये। जहां लोकतंत्र ही जाली हो, उस देश का माली तो गुलशन का लुटेरा ही हो गा, नाम, दल या पार्टी यह हो या वह। देश सुधारना है तो वयवस्था में संशोधन आवश्यक है, आरक्षण वारक्षण के गोलगप्पे  कुछ चुनावी लाभ तो देते हैं, लेकिन देश को समाज का बंटवारा  कर के भ्र्ष्टाचार और विघठन की और भी गहरी गर्त में गिरा देते हैं,
🚩तत्त सत्त अकाल🚩
✒गुरु बलवन्त गुरुने.⚔

🚩Is Fake Democracy a curse for india ? 🚩 @✒GBG⚔

1. Democracy is generally of two types. Direct democracy or Representative Democracy.  In a direct democracy, the people of a community, region, or nation are granted absolute freedom to dictate the course of it's policy. In a functional Direct democracy, every major decision  made by the government is put up to the people for approval via voting, because the people are the government. Switzerland is the only truly functional direct democracy in the world.

2. In Representative Democracy, people first elect or select their representatives. The representatives then make policies for running the community/nation.  The quality of this democracy directly depends upon the quality of citizenry vis a vis their awareness and education, where as the quality of leaders depends upon their personal character, aswellas on the level to which they are made accountable by the system. America and India are examples, but the American system is a little more complex, and thus it has more checks and balances in place.

3.  In America  the President is chosen for 4 years.  Although, almost all eligible voters out of 34 crore citizens of America vote to chose their President, but the real choice is made by 538 electors of USA.   Its a  little complex system of Representation, although inspite of it all, it works well, and has resulted in America, under this system, emerging  and staying as a super power. This system although good,  could end in  some one as noble as Abraham Lincoln, as glamorous as Kennedy, or as Shrewd and Porky, as Trump, ending up as  the official leader of USA.

4. In India every citizen, how so ever aware or unaware, sellable or not sellable,  is eligible to vote, and chose many types of their representatives, ranging right from a panch (Village representatives), municipal councillor to  an MLA or an  MP. These MLAs  form the state government and MPs form the central government. It all seems simple and nice, but is politically complex, HIGHLY corruptible and manipulatable. People are neither aware of their rights nor duties.  Votes getting divided amongst manipulative leaders on caste or religious basis, for regional or shallow concerns is very common.  Luring voters with  petty bribes or false promises  is a common practice.

5.  All Indian politicians have got used to fooling public, and in every election  they touch a new low.  The  country is overall facing a hopeless situation, with truly no good option available to people.

6.  People are not aware of their rights or duties both. Although democracy is the most desirable form of government, Indian democracy is a curse being suffered by Indian people, in view that the people are sellable to lies and petty bribes, and have even elected criminals as people's representatives.

7.  Imagine the desperate situation, where election langars of liquor and potato fritters have become the norm of humoring a voter. On the character and किरदार of Indian  politicians,  one remembers the words of  Poet Hafiz Jallandhari, where he says metaphorically that these leaders are like wild animals, snakes, crocodiles and wolves,  feeding upon the gullibilty of an innumerable number of gullible sheep.
देश की आज़ादी की बातें सारी झूठी बातें हैं
मज़दूरों को मजबूरों को खा जाने की घातें हैं 

8.  Here is the full poem by Hafiz Jallandhari....
शेरों को आज़ादी है आज़ादी के पाबंद रहें
जिसको चाहें चीरें फाड़ें खायें पियें आनंद रहें
शाहीं को आज़ादी है आज़ादी से परवाज़ करे
नन्‍ही मुन्‍नी चिडियों पर जब चाहे मश्‍क़े-नाज़ करे
सांपों को आज़ादी है हर बस्‍ते घर में बसने की
इनके सर में ज़हर भी है और आदत भी है डसने की 
पानी में आज़ादी है घड़ियालों और नहंगों को
जैसे चाहें पालें पोसें अपनी तुंद उमंगों को.
इंसां ने भी शोखी सीखी वहशत के इन रंगों से
शेरों, संपों, शाहीनों, घड़ियालों और नहंगों से
इंसान भी कुछ शेर हैं बाक़ी भेड़ों की आबादी है
भेड़ें सब पाबंद हैं लेकिन शेरों को आज़ादी है 
भेड़ें लातादाद हैं लेकिन सबको जान के लाले हैं
इनको यह तालीम मिली है भेड़िये ताक़त वाले हैं 
मास भी खायें खाल भी नोचें हरदम लागू जानों के
भेड़ें काटें दौरे-ग़ुलामी बल पर गल्‍लाबानों के.
इंसानों में सांप बहुत हैं क़ातिल भी ज़हरीले भी
इनसे बचना मुश्किल है, आज़ाद भी हैं फुर्तीले भी 
सांप तो बनना मुश्किल है इस ख़स्‍लत से माज़ूर हैं हम
मंतर जानने वालों की मुहताजी पर मजबूर हैं हम.
शाहीं भी हैं चिड़ियाँ भी हैं इंसानों की बस्‍ती में
वह नाज़ा अपनी रिफ़अत पर यह नालां अपनी पस्‍ती में
शाहीं को तादीब करो या चिड़ियों को शाहीन करो
यूं इस बाग़े-आलम में आज़ादी की तलक़ीन करो 
बहरे-जहां में ज़ाहिर-ओ-पिनहां इंसानी घड़ियाल भी हैं
तालिबे-जानओजिस्‍म भी हैं शैदाए-जान-ओ-माल भी हैं.
सरमाये का जि़क्र करो, मज़दूर की इनको फ़िक्र नहीं
मुख्‍तारी पर मरते हैं मजबूरों की  फ़िक्र नहीं
खा जाने का कौन सा गुर है जो इन सबको याद नहीं
जब तक इनको आज़ादी है कोई भी आज़ाद नहीं 
सारी आज़ादी की बातें सारी झूठी बातें हैं
मज़दूरों को मजबूरों को खा जाने की घातें हैं 
जब तक चोरों-राहज़नों का डर दुनिया पर ग़ालिब है 
पहले मुझसे बात करे जो आज़ादी का तालिब है.

9.  For true democracy to find root, India needs huge systemic changes, but the system is so corruption friendly, that whenever, even an honest  leader captures power,  he is bound to get corrupted, and get busy maintaining the system as it is,  rather than changing it.
🚩सत्य मेव जयते🚩
@✒Guru Balwant Gurunay.⚔

🚩क्यों चाहिये भारत को मौजूदा सरकार से मुक्ति?🚩@✒GBG⚔

१.  जो लोग मौजूदा सरकार का विकल्प ही नहीं देख  पा रहे, आप अपनी अंतरात्मा से पूछिये, भारत और भरतीयता के लिए, क्या बदलाव जरूरी नहीं है ???

२.  जो लोग अभी भी मौजूदा सरकार की ख़ैर ख्वाहि में मसरूफ़ है, शायद नहीं समझ रहे कि इन की आर्थिक नीतियां और 'काम कम दिखावा ज्यादा' करने की नीतियां अगर यूँही चलती रही, तो देश को ब्राजील जैसे हालातों में आते देर न लगे गी.

३   यह हालात ऐसे होंगे,  जब ग़रीब के पास तो फूटी कौड़ी भी न हो गी और  माध्यमिक और उच्च माध्यमिक वर्ग रोज़मर्रा की जरूरतों में ही बुरी तरहं पिस कर रह जाये गा।

४.  केवल अती धनाढ्य वर्ग ही अपनी जरूरत पूरी कर पाये गा, या ढंग से जी पाये गा, क्यों की थैला भर के नोटों के बदले एक किलो अनाज लेने की औकात केवल विशिष्ठ  धनवानों के पास ही रह जाये गी।

५.  ऐसा समय भयंकर नतीजे पैदा कर सकता है।  यानी भूखे प्यासे लोग सड़कों पे आ जायें गे और अराजकता फैल जाये गी।

६.   आज देश को एक बेहतरीन आर्थिक दिशा दे सकने वाली सरकार की आवश्यकता है, यानि ऐसी सरकार की आवश्यकता है, जो किसी मनमोहन सिंह, अमर्त्य सेन, रघुराम राजन या और अर्थशास्त्रियों के चिंतन को क्रियावन्त कर सके, और देश को सच्चे मायनो में आर्थिक रूप से स्थिर कर सके।

७.   मौजूदा सरकार तो RBI के रिज़र्वज़ तक को निकलवाने की बात कर रही है। यह दुख़द है।

८.  केवल पहले से निर्माणाधीन पुलों या सड़कों का उद्घाटन करने से, या बड़े बड़े बुत्त बनाने से, या करन्सी का रंग बदलने से या शहरों और टापुओं के नाम बदलने से देश नहीं चलते। भारत एक ग़रीब और भृष्ट देश है, जिसे चलाने के लिए गम्भीर और समझदार प्रिविर्ति की आवश्यकता है।  पोस्टरबाजी से काम नहीं चले गा।

८.   देश वासियों को धर्म जात से ऊपर उठ कर वोट करना हो गा। किसी भी तरहं की बंटवारे की राजनीती से बचना हो गा।

९.  कुछ मित्र बदलाव का नाम सुन कर ही बेवजह नाराज़ हो जाते हैं।  मोदी जी को देश ने एक बहुत बड़ा मौका दिया, लेकिन मोदी जी ने शानो शौकत, रोबढोब, और सैर सपाटे तथा, एक प्रधानमन्त्री होने के बावजूद,  देश की बजाय, सरकारी औहदे, मशीनरी और  और व्यवस्था का इस्तेमाल सत्ता में बने रहने की कवायदों के चलते असंख्य चुनाव अभियानों के सञ्चालन और सम्बोधन में  ही किया।

१०.  अब आदरणीय मोदी जी को भी विपक्ष की जगह बैठना चाहिए, और पुन्ह  विचार करना चाहिए की अगले मौके,  वह वो सब कैसे करें गे, जो देश के हित में हो, केवल पार्टी के या निजी हित में नहीं।

११. इतना बड़ा मौका मिलने के बाद भी, और  एक विफ़ल सरकार का सञ्चालन करने के बाद, और प्रधान मंत्री होते हुए भी एक पार्टी प्रचारक के रूप में ज्यादा दिखने वाले मोदी जी को दूसरा मौका देने का फ़िलहाल कोई कारण नज़र नहीं आता है।
बदलाव आवश्यक है।
🚩सत्य मेव जयते🚩
@✒गुरु बलवंत गुरुने⚔

🚩 Next P.M. of India.🚩@ ✒GBG⚔

1. Who will be the next Prime minister of India, or what government,  would India like to see beyond 2019.  Well, certainly some one from amongst those running the race will make the cut, but for India as a people,  'Wisdom lies in Choosing Change over continuity.' 

2.  Undoubtedly,  the Rafael aircraft, Demonitization, multi slab SGT, being now corrected at the last moment, rising prices, killing of a police SHO in Bulland Shahar, and beating and killing of dalits and muslims  by cow conspirators, crime against women, are all going to be the turn-keys of coming elections. Messing up with working and functionality of Institutions like RBI, and trying to draw out of RBI Reserves are all major issues. Intimidating Judiciary viz Justice Lodha's murder, and many other issues are bound to hound the incumbent government.

3. Some folks are drumming up a beat  against the opposition for raising Rafael as an issue in Parliament, as they think that after SC's note on the issue, it has  now become all fair and square. To  mention Rafael as a fair deal, by any one now,  sounds like, a soldier beating on a torn drum, after the battle is already lost.

4. Lying is another big issue. Lying from political platforms is unfair, but it is doubely unfaIr,  to continue to lie, and manipulate mass opinion, from seats of high national positions. When it comes to the quality of Indian  politicians, Let's face it, they are all first class crooks, all of them,  they lie blatantly, and are self promoting rascals. So this is a situation we have to deal with. Amongst these lying and cheating crooks, to manage some order, the common man has just one tool, and that is  CHANGE. Change is the only rationally maintainable constant.

5.  To compare the two front runners in the race, I acknowledge that Rahul  is no Mahatma Gandhi,  but, Modi is not Subhash Bose either.  When we talk of any one as PM, we are making a choice amongst the given viable choices, but out of Didi, Behan Ji, Nitish, and many other possible viables, at present Rahul is a good choice.

 6.  Advani ji and Sushma ji could have been good choices, but they have lost sheen, and have been  destroyed by their own Billus and Pillus. Chelon ney hi guruon ko thok diya. Yahi satya hai.  As a statesman politician,  Advani ji would have made a more prudent PM, being a much more balanced, experienced and matured guy, but alas that could not be.

7.  Mr. M had risen hope in me,  Inspite of his histrioncs, but many like me now feel disillusioned, and strongly feel that rather than in politics, Modi ji can now try and find success in Bollywood. He will do very well.  Kadar Khan ka slot khaali hai.

8.    Now out of all the available choices, actually the  best Man for the Job is Arvind Kejriwal, but inspite of fulfilling all personal QRs,  he has not got his party organised. It is full of opportunists and Inspite of showing many good results in Delhi truly worthy of praise, irrespective of restraints,  he has failed to create a team, that is devouted to party. Most of his people, barring a few are  over ambitious and greedy for power opportunists, and also Kejri hardly has a cadre, pan India.

9.  So  the best possible bet for now is congress, and if so, Rahul is the natural leader of the party  today. If Morarji, Devagauda ji, Chandarshekhar ji, Charan Singh ji, Rajive ji and  Modi ji can be the PMs of India, why not Rahul ji. This propaganda that Rahul should not be PM, so  Modi should be the PM, is highly misplaced and malicious. Dusron ko neecha dikha kar khud ko Mahan Sabit karney ka yeh Fanda, uss Kath ki handi sa hai jo baar baar nahin chadhti.

10.  Dynasty or no dynasty, politics is a full time business, and people can only chose from amongst those who can run the race. Rahul  is a team player, and would certainly give youth a new impetus. He has learnt to listen to good advise, and seeks it. As PM, he will not be draconian, or arrogant. He will depend on others for expert and political advise, which shall ensure that there are more than one power centers.  After 5 years, he too could be changed.

11.  If what comes in is just but a coalition, even than India will be better off, than continuing with arrogance, hypocricies, and economic high handedness of present regime.  For those who support change as a vehicle of democracy,  we must shuffle the cards now., and  please remember that we, the Janta, the Avaam, you and me and all of us must work on the principle of change the regime, every 5 years. Yahi hai Avaam key liye behtar vikalap.

12.  When one goes out in the Bazar, and talks to people, one opinion that repeatedly echoes around, is that people are not happy with policies and decisions of present regime. They feel that the economic policies and long term benifits of UPA led by Congress PM, were better. On the performance of present regime, even when staunch BJP supporters, the upper class Hindu voters are  talked to,  they all say Advani would have done better, and if at all BJP is to be given another chance, it should have a new face. Some folks are mentioning Gadakari. Shiv sena and many others have already parted ways with the present leadership.

13.  Any smartarse trick of fooling, luring, or misleading Avaam now only fail. Now even if the 'King' was to transfer some money to every account, it will badly boomerang, as people have seen thru the trick. EVMS rigging would only spill people's  anger on the streets.

14  in light of above, Abhi Dilli sabhi ke liye door haI, Lekin Modi ji is baar vahaan shayad nahin pahunch rahey,  kyon ki unhon ne janta ko sapney to dikhaye, lekin poorey nahin kiye, aur abb Vikas ke naam pe jitni marzi gapp haanki jaye, Vikas lapata hai.  1997 mein  DevGauda dvaara shuru kiye pul ka, aur Manmohan Singh dvara rashtriya project ghoshit kiye gaye Bogibeel bridge ka 100 bar udhghaatn karney sey bhi kuch nahin ho ga.  Yeh jo public hai yah sab Janati hai.
🚩सत्य मेव जयते🚩
✒Guru Balwant Gurunay.⚔

What is Deep State and How the Deep state operates???? @ ✒GBG⚔

1. What is Deep State, and How it Operates.❓

2.  Deep State is a conglomerate of  influential members of intelligence agencies, Cops, corporates, military, or political pimps,  involved in the secret manipulation of government policy, and thus its existence.

3.   Some times they fool politicians by feeding them unnecessary fear and anxiety about internal and external threats. Sometimes they make the politicians believe that without them they may not be able to stay in power.

4.  What ever the reason, modus operandi, subterfuge or strategy the deep state may use, their moves are always machiavellian, their aim  always is to gain power by influencing power centers, and they invariably end up partnering with huge money makers, criminals and politicians.

5. Why it so happens is, because  the deep state players need state's power to operate. For this, as the conglomerate's political members,   they may lie to the public, make tall promises, and fool the people  into believing that they alone deserve to be the leaders of a nation, and thus capture political power by winning elections. They may even come in to power by rigging elections, or just about taking over power as dictators.

6.  Deep state runs on very dark and complex policies. These could be allowing crime, allowing mob lynchings, or orchestrating or allowing riots, mass violence to create chaos and confusion in people. It may even be allowing extremist ideologies to flourish, to mislead public in to believing that nation is in danger, and only they can save it, or carry our such nautanki for getting funds from other nations, or  orchestrate wars betwen other nations, for benefitting self.

7.  AMERICA and Russian orchestrated war in Iraq, Syria, Llibiya etc, murder of Sadam Hussain and Gadaafi, are all works of American and Russian deep states, to sell their obsolete war machines to these nations, aswellas to ensure that the middle east petro-fuels stay under their control. Sadam and Gadaafi, were both working for ousting American influence in their region, and were consequently murdered.

8.  Similarly  Pakistan's adventures with American aid and Taliban and other extremist groups are all works of it's flirtious deep state, which  loved the American dollars flowing in, as well as the Idea of using their trained terror hounds both in India and Afghanistan, but all this changed when the dogs started biting their own masters.

9.  In a democracy, Deep State becomes powerful and overtly operational, when democratic forces become weak, and draconian and power hungry politicians, or dictators take over, and then to stay in power they start depending  more and more upon deep state operatives.

10.  Come what may, the Deep State is here to stay, in what ever system of government may be functional in a nation. Its only remedy is leaders like Vladimir Putin, who himself being from DS, knows how to control it, or systems like China, where the DS has no other choice but it has to 'Bloody Well' work for the State, and not the other way around.

🚩तत्त सत्त अकाल🚩
✒Guru Balwant Gurunay.⚔

PS:- Here are some Parvez Musharraf videos to further deepen one's understanding on this subject. Enjoy. Deep state operates???? @ ✒GBG⚔

1. What is Deep State, and How it Operates.❓

2.  Deep State is a conglomerate of  influential members of intelligence agencies, Cops, corporates, military, or political pimps,  involved in the secret manipulation of government policy, and thus its existence.

3.   Some times they fool politicians by feeding them unnecessary fear and anxiety about internal and external threats. Sometimes they make the politicians believe that without them they may not be able to stay in power.

4.  What ever the reason, modus operandi, subterfuge or strategy the deep state may use, their moves are always machiavellian, their aim  always is to gain power by influencing power centers, and they invariably end up partnering with huge money makers, criminals and politicians.

5. Why it so happens is, because  the deep state players need state's power to operate. For this, as the conglomerate's political members,   they may lie to the public, make tall promises, and fool the people  into believing that they alone deserve to be the leaders of a nation, and thus capture political power by winning elections. They may even come in to power by rigging elections, or just about taking over power as dictators.

6.  Deep state runs on very dark and complex policies. These could be allowing crime, allowing mob lynchings, or orchestrating or allowing riots, mass violence to create chaos and confusion in people. It may even be allowing extremist ideologies to flourish, to mislead public in to believing that nation is in danger, and only they can save it, or carry our such nautanki for getting funds from other nations, or  orchestrate wars betwen other nations, for benefitting self.

7.  AMERICA and Russian orchestrated war in Iraq, Syria, Llibiya etc, murder of Sadam Hussain and Gadaafi, are all works of American and Russian deep states, to sell their obsolete war machines to these nations, aswellas to ensure that the middle east petro-fuels stay under their control. Sadam and Gadaafi, were both working for ousting American influence in their region, and were consequently murdered.

8.  Similarly  Pakistan's adventures with American aid and Taliban and other extremist groups are all works of it's flirtious deep state, which  loved the American dollars flowing in, as well as the Idea of using their trained terror hounds both in India and Afghanistan, but all this changed when the dogs started biting their own masters.

9.  In a democracy, Deep State becomes powerful and overtly operational, when democratic forces become weak, and draconian and power hungry politicians, or dictators take over, and then to stay in power they start depending  more and more upon deep state operatives.

10.  Come what may, the Deep State is here to stay, in what ever system of government may be functional in a nation. Its only remedy is leaders like Vladimir Putin, who himself being from DS, knows how to control it, or systems like China, where the DS has no other choice but it has to 'Bloody Well' work for the State, and not the other way around.

🚩तत्त सत्त अकाल🚩
✒Guru Balwant Gurunay.⚔

PS:- Here are some Parvez Musharraf videos to further deepen one's understanding on this subject. Enjoy.





🚩Can Governments infact be Mafias❓ @✒GBG⚔

1. All democracies, if left in same hands for any longer than the minimum permissible duration are bound to become Organised Mafiaso.  If any one thinks that   governments are there for good governance etc etc alone, he/she is only fooling him/herself.

2.  General public  keeps arguing like fools, fighting with each other over voting for this or that leader, where as the facts are different.

3. Most of the governments are organised lying syndicates, which operate as a collation.

4.  These are  deadly collations of lying politicians,  financial criminals, dealers and manufacturers of huge arms like warplanes, missiles, cannons and tanks, capitalist market milkers of products and services based on artificially created needs,  some senior cops  and generals, solely interested in enjoying the fruits of power and wealth.

5.  So ladies and gentlemen,  all those who think that being loyal to any politician is being loyal to one's nation, are only fooling themselves.

6.  Politicians are only  interested in gaining power to share the fruits of it, with crony capitalists, mega arms manufactures, and other international Wheeler Dealers, including mega construction companies.

7. I remember some couplets from Hafiz Jalandhari, which are worth quoting here....
' शेरों को आज़ादी है, आज़ादी के पाबंद रहें,
जिसको चाहें चीरेंफाड़ें, खायेंपियें आनंद रहें.
इंसाभी कुछ शेरहैं बाक़ी भेड़ों कीआबादी है,
भेड़ें सब पाबंद हैं लेकिन शेरों को आज़ादी है.
भेड़ें लातादाद हैं लेकिन सबको जानके लाले हैं,
इनको है तालीम मिली कि भेड़िये ताक़त वाले हैं.
भेडि़यों से क़ायम है गोया, अमन इस आबादी का,
भेड़ें जब तक शेर न बनलें, नाम न लें आज़ादी का l'

7.  The faster we understand it, faster  and better we will be able to manage our democracies.
🚩तत्त सत्त अकाल🚩
✒Guru Balwant Gurunay.⚔