🚩 हाजिर है ननकाना साहिब कांड का काला सच।🚩
@ ✒⚔GBG⚔
1. सब से पहले तो यह जान लीजिए कि यह ISI, यानी पाकिस्तानी सरकार के तहखानों में काम कर रहे जासूसों और स्ट्रैटेजिस्ट लोगों का खेल है। गलियों में नारे लगाते कूकर, मात्र भौंकने के लिए भौंक रहे हैं। सब हड्डी बिस्किट खा के अपनी ड्यूटी वियुटी पूरी कर रहे हैं।
2, मत भूलिए, 2020 रेफरेंडम का साल है। पाकिस्तान का रिटायर्ड जरनैल, वहां का पुराना COAS पहले ही कह चुका है कि इस बार सिक्खों को भारत के विरूद्ध भड़काओ, फुस्लाओ, इस कौम को बहकाओ, और पुनः अपनी प्रॉक्सी वार का ईंधन बनाओ। इस ही जरनैल की पालिसी पे ISI द्वारा सब कारवाई की जा रही है।
3. इसी सिलसिले के चलते पहले करतारपुर कोरिडोर खोला जाता है, फिर पंजा सहिब में आग लगाई जाती है, फिर ननकाना के गुरुघर के सेवादार की लड़की को मुसलमान अगवा करते है, जबरन उस से निकाह करते है। उस के बाद सिक्खों को ननकाना से भगाने की बात करते हैं, गुरुद्वारा पे पथराव करते हैं , और पाकिस्तान की इस अत्यंत कम-गिनती कौम को खौफ़ज़दा कर के भारत की ओर पलायन के लिए प्रेरित करते हैं।
4 कहानी साफ़ है। पाकिस्तान की कोशिश है कि सिचुएशन को पेचीदा किया जाए, और सिक्खों को पाकिस्तान से भारत में खदेड़ा जाए। साथ में कुछ आतंकवादी भी भेजे जाएं। इस तरह माहौल खराब किया जाए और खालिस्तान का मामला एक बार पुनः गरमाया जाए।
5. इस सब सिय्यार नीति से जब हिंदुस्तान में हिन्दू सिक्ख का मसला फ़िर गरमा जाए तो कोई बड़ी फौजी कारवाई की जाए, और भारत वर्ष पे कोई बड़ा वार किया जाए। अंदर की बात केवल इतनी सी है, बाकी सब बवंडर की बात है।
6. मैं इस तमाम मसले पर अपनी बाज़ दृष्टि को टिकाए हुए हूं। पाकिस्तान को समझ लेना चाहिए कि उसके लिये कोई भि मिस-एडवेंचर बहुत महंगा पड़ने वाला है।
7. भारतीय उपमहाद्वीप के खित्ते में अमेरिका के हुक्म के बिना पाकिस्तान के लिए एक पत्ता भी नहीं हिल सकता, जब कि इस के विपरीत भारत, जब जो चाहे कर लेने की स्थिति में है, क्यों कि अमरीका अब कि भारत के साथ है, याद है ना मोदी और ट्रंप की जफी।
8. हां, चिंता की बात यदी कोई है तो वह यह है कि मधयप्रदेश की कोंग्रेस सरकार किस वजह से आबाद-गार सिक्ख समुदाय को उखाड़ रही है। यह दुखद है। क्या कमलनाथ इन सिक्खों को, जिन्होंने ने अपनी जी-तोड़ मेहनत से जंगलों को खेतों में बदल दिया, उन्हे पुनः विस्थापित कर शरणार्थी बनाना चाहता है ? क्या कमलनाथ और कांग्रेस का सिक्खों पे किए गए 1984 के ज़ुल्म से जी नहीं भरा?
9 दूसरी ओर पुरी में मन्दिर के इर्दगिर्द कि इंक्रोचमेंट हटाने के चलते, कुछ सिखों द्वारा इसे नासमझी के चलते, गुरुद्वारा तोड़ने का मामला बना कर दिखाया जा रहा है।
10. कोई शक नहीं की गुरु नानक ओडिसा के पुरी मन्दिर गए थे। उन की याद में इक छोटा सा गुरुद्वारा स्मृति स्मारक के रूप में भी स्थापित था। लेकिन इस का मतलब यह हरगिज़ नहीं होना चाहिए, की नानक साहिब के पुरी दौरे के स्मृति स्मारक को लोहे और सीमेंट की बड़ी सी बिल्डिंग से ढक दिया जाए, जो गुरुद्वारा कम, और कोई गेस्ट हाउस या पुजारी वर्ग के लिए निवास स्थान ज्यादा लगे। यहां सिक्खों को गुरु द्वारे की बात करने की जगह, पुरी मन्दिर की हेरिटेज भव्यता को पुनः स्थापित करने पे ज्यादा केंद्रित होना चाहिए, और श्री नानक के स्मृति स्मारक को स्मृति स्मारक तक ही सीमित रखने पे केंद्रित रहते हुए, सद्भावना पूर्व, स्मृति स्मारक की पुनः स्थापना, और मन्दिर परिसर की पुरातन छवी को स्थापित करने में सहयोग देना चाहिए।
11. बात जब तक सिकलीगर सिक्खों को प्रताड़ित करने की ना की जाए, या शिलांग में सिख विरोधी कार्यवाही जैसे कांड इत्यादि की बात न की जाए, तो बात अधूरी रहेगी।
12. इन सभी दुखद परिस्थितियों के कारण, जो दरअसल भारत विरोधी, शान्ती विरोधी, विकास विरोधी और सिक्ख विरोधी खोखली सोच और नीच राजनीतिक सीय्यार बाजियों से ज्यादा कुछ भी नहीं, सिक्ख अलग-थलग तो अवश्य महसूस करेंगे, लेकिन सहज और ईमानदार कोशिश के चलते यह सब सुगमता से निपटाया जा सकता है।
13. ठीक है, सब ज़ख्म भर ही जाते हैं, लोग फ़िर जी उठते हैं, लेकिन कमल नाथ की कांग्रेस सरकार भी वही सब कर रही लगती है जो पाकिस्तान की सरकार कर रही है।
14. किसी के साथ दुश्मनी और द्वेष रखने से इतना भी याराना ठीक नहीं, क्यों कि यदि स्थिति को हल्के में लिया गया, तो सभी के लिए और भी दुखद परिस्थितियों का निर्माण हो सकता है। केवल अनुमान पे परिणाम निर्मित करने की विधि को छोड़ कर हकीकत का संज्ञान लेना सभी के लिए बेहतर होगा।
🚩 डंके की चोट पर।🚩
✒गुरु बलवंत गुरुने⚔
@ ✒⚔GBG⚔
1. सब से पहले तो यह जान लीजिए कि यह ISI, यानी पाकिस्तानी सरकार के तहखानों में काम कर रहे जासूसों और स्ट्रैटेजिस्ट लोगों का खेल है। गलियों में नारे लगाते कूकर, मात्र भौंकने के लिए भौंक रहे हैं। सब हड्डी बिस्किट खा के अपनी ड्यूटी वियुटी पूरी कर रहे हैं।
2, मत भूलिए, 2020 रेफरेंडम का साल है। पाकिस्तान का रिटायर्ड जरनैल, वहां का पुराना COAS पहले ही कह चुका है कि इस बार सिक्खों को भारत के विरूद्ध भड़काओ, फुस्लाओ, इस कौम को बहकाओ, और पुनः अपनी प्रॉक्सी वार का ईंधन बनाओ। इस ही जरनैल की पालिसी पे ISI द्वारा सब कारवाई की जा रही है।
3. इसी सिलसिले के चलते पहले करतारपुर कोरिडोर खोला जाता है, फिर पंजा सहिब में आग लगाई जाती है, फिर ननकाना के गुरुघर के सेवादार की लड़की को मुसलमान अगवा करते है, जबरन उस से निकाह करते है। उस के बाद सिक्खों को ननकाना से भगाने की बात करते हैं, गुरुद्वारा पे पथराव करते हैं , और पाकिस्तान की इस अत्यंत कम-गिनती कौम को खौफ़ज़दा कर के भारत की ओर पलायन के लिए प्रेरित करते हैं।
4 कहानी साफ़ है। पाकिस्तान की कोशिश है कि सिचुएशन को पेचीदा किया जाए, और सिक्खों को पाकिस्तान से भारत में खदेड़ा जाए। साथ में कुछ आतंकवादी भी भेजे जाएं। इस तरह माहौल खराब किया जाए और खालिस्तान का मामला एक बार पुनः गरमाया जाए।
5. इस सब सिय्यार नीति से जब हिंदुस्तान में हिन्दू सिक्ख का मसला फ़िर गरमा जाए तो कोई बड़ी फौजी कारवाई की जाए, और भारत वर्ष पे कोई बड़ा वार किया जाए। अंदर की बात केवल इतनी सी है, बाकी सब बवंडर की बात है।
6. मैं इस तमाम मसले पर अपनी बाज़ दृष्टि को टिकाए हुए हूं। पाकिस्तान को समझ लेना चाहिए कि उसके लिये कोई भि मिस-एडवेंचर बहुत महंगा पड़ने वाला है।
7. भारतीय उपमहाद्वीप के खित्ते में अमेरिका के हुक्म के बिना पाकिस्तान के लिए एक पत्ता भी नहीं हिल सकता, जब कि इस के विपरीत भारत, जब जो चाहे कर लेने की स्थिति में है, क्यों कि अमरीका अब कि भारत के साथ है, याद है ना मोदी और ट्रंप की जफी।
8. हां, चिंता की बात यदी कोई है तो वह यह है कि मधयप्रदेश की कोंग्रेस सरकार किस वजह से आबाद-गार सिक्ख समुदाय को उखाड़ रही है। यह दुखद है। क्या कमलनाथ इन सिक्खों को, जिन्होंने ने अपनी जी-तोड़ मेहनत से जंगलों को खेतों में बदल दिया, उन्हे पुनः विस्थापित कर शरणार्थी बनाना चाहता है ? क्या कमलनाथ और कांग्रेस का सिक्खों पे किए गए 1984 के ज़ुल्म से जी नहीं भरा?
9 दूसरी ओर पुरी में मन्दिर के इर्दगिर्द कि इंक्रोचमेंट हटाने के चलते, कुछ सिखों द्वारा इसे नासमझी के चलते, गुरुद्वारा तोड़ने का मामला बना कर दिखाया जा रहा है।
10. कोई शक नहीं की गुरु नानक ओडिसा के पुरी मन्दिर गए थे। उन की याद में इक छोटा सा गुरुद्वारा स्मृति स्मारक के रूप में भी स्थापित था। लेकिन इस का मतलब यह हरगिज़ नहीं होना चाहिए, की नानक साहिब के पुरी दौरे के स्मृति स्मारक को लोहे और सीमेंट की बड़ी सी बिल्डिंग से ढक दिया जाए, जो गुरुद्वारा कम, और कोई गेस्ट हाउस या पुजारी वर्ग के लिए निवास स्थान ज्यादा लगे। यहां सिक्खों को गुरु द्वारे की बात करने की जगह, पुरी मन्दिर की हेरिटेज भव्यता को पुनः स्थापित करने पे ज्यादा केंद्रित होना चाहिए, और श्री नानक के स्मृति स्मारक को स्मृति स्मारक तक ही सीमित रखने पे केंद्रित रहते हुए, सद्भावना पूर्व, स्मृति स्मारक की पुनः स्थापना, और मन्दिर परिसर की पुरातन छवी को स्थापित करने में सहयोग देना चाहिए।
11. बात जब तक सिकलीगर सिक्खों को प्रताड़ित करने की ना की जाए, या शिलांग में सिख विरोधी कार्यवाही जैसे कांड इत्यादि की बात न की जाए, तो बात अधूरी रहेगी।
12. इन सभी दुखद परिस्थितियों के कारण, जो दरअसल भारत विरोधी, शान्ती विरोधी, विकास विरोधी और सिक्ख विरोधी खोखली सोच और नीच राजनीतिक सीय्यार बाजियों से ज्यादा कुछ भी नहीं, सिक्ख अलग-थलग तो अवश्य महसूस करेंगे, लेकिन सहज और ईमानदार कोशिश के चलते यह सब सुगमता से निपटाया जा सकता है।
13. ठीक है, सब ज़ख्म भर ही जाते हैं, लोग फ़िर जी उठते हैं, लेकिन कमल नाथ की कांग्रेस सरकार भी वही सब कर रही लगती है जो पाकिस्तान की सरकार कर रही है।
14. किसी के साथ दुश्मनी और द्वेष रखने से इतना भी याराना ठीक नहीं, क्यों कि यदि स्थिति को हल्के में लिया गया, तो सभी के लिए और भी दुखद परिस्थितियों का निर्माण हो सकता है। केवल अनुमान पे परिणाम निर्मित करने की विधि को छोड़ कर हकीकत का संज्ञान लेना सभी के लिए बेहतर होगा।
🚩 डंके की चोट पर।🚩
✒गुरु बलवंत गुरुने⚔