🚩आज भारतीयता का सरंक्षण आवश्यक क्यों⁉ @ ✒GBG⚔🚩

1.    भारतीयता क्या है, इसे समझने के लिये, राज्यसभा टी वी का प्रोग्राम, 'मैं भी भारत' अवश्य देखें। एंकर और प्रोड्यूसर, श्री श्याम सुंदर ने भारत के दूरस्थ कबीलों और ट्राईबल्ज़ पे बेहतरीन काम किया है, ।  देश को अगर जवाहर लाल और कोंग्रेस का कोई महानतम योगदान है, तो वह है विविधताओं को जीवित रखना,  इनटेन्जिबल और टेन्जिबल कल्चरल विविधताओं को जीवित रखना।

2.   कुछ लोग भारत को भारत की विभिन्न इकाइयों पे थोम्पा हुआ एक विचार मात्र बताते हैं। कौन कहता है कि विचार का थोम्पना ठीक है ?  लेकिन क्या आप में से किसी को भी लगता है,  की भारतीयता को कोई किसी पे थोम्प रहा है, या थोम्प सकता है ? याद रखिये दोस्तो,  किसी  भी विचार को किसी भी पे न थोम्पना ही दरअसल भारतीयता है।

3.  भाजपा के बीफ पॉलिटिक्स या  गौरक्षक  गुर्गों को, दिल्ली या गुजरात के दंगाइयों को,  पंजाब और कश्मीर के अलगाववादियों को,  या किसी भी राजनितिक दल के बदमाशों को, समस्त भारत की सोच  नहीं कहा जा सकता। यह सब तो केवल राजनितिक सिंधु में उथल पुथल करते राजनितिक मगरमछों की, भोली जन्ता को फांसने और खाने की चालें मात्र हैं।

4.  राजनेता कोई भी हो, विंध्वन्स का स्रोत हुआ करता है। सत्ता प्राप्त करना ही उस का मकसद होता है, जरिया कोई भी बने। राजनेता का कोई धर्म, दीन इमां नहीं होता, और वह किसी राम अल्लाह या वाहेगुरु का भक्त नही, बल्कि सत्ता का पुजारी होता है।  मन्दिर मस्जिद और रथ यात्रा की राजनीती भाजपा को अडवाणी की देन  है,  बीफ और गाय की राजनीती बाजपायी  की देन है,  पंजाब की गन्दी राजनीती, कोंग्रेस और अकालियों की आपसी रस्साकशी की देन है,  'मुसलमान खतरे में है',  की राजनीती, कुछ मुस्लिम नेताओं की देन है, जो आप को हर दल में दिख जाएँ गे। यह सब नहीँ झुठलाया जा सकता।  यह बहुत गहरे मसले हैं।

5.  लेकिन यह भी सच्च है, कि जितना गलत राहुल का मज़ाक उड़ा कर मोदी को हीरो बनाना है, उतना ही गलत मोदी को गलत कह के  राहुल को या  किसी और को चमकाना भी है। हम किसी भी व्यक्ति विशेष को भारतीयता के साथ नहीं जोड़ सकते। भारतीयता किसी भी व्यक्ति या राजनितिक दल द्वारा प्रमाणित किये जाने की मोहताज नहीं। भारतीयता हमारे इतिहास, शहीदों और संविधान द्वारा प्रमाणित है।

6.  आज  देश के भले के लिए आवश्यक है, की देश की बात हो, भारतीयता की बात ही, लेकिन देशभक्ति सिद्ध करने के लिए नहीं,  न ही किसी मौकापरस्त राजनितिक साधना के लिए, बल्कि देश को अनेकता में एक बनाये रखने के लिए।

7.    मैं मानता हूँ, भारत में बहुत विभिन्तायें हैं, लेकिन विभिन्तायें तो सारे विश्व भर में हैं। प्रमाणिक तौर पे सिक्ख, जैन या बौद्ध हिन्दू नहीं हैं,  हिन्दू मुसलमान नहीं, मुसलमान  हिन्दू नहीं हैं लेकिन हिन्दोस्तानी अवश्य है,  बीफ़ खाने वाले बहुत से हिन्दू भी हैं, न खाने वाले बहुते मुसलमान भी हैं,  बहादुर सिर्फ राजपूत या मरहठे, सिक्ख या जाट ही नहीं, महार और दलित भी हैं,   चालाक और मक्कार लोग  भी हर जगह हैं, लेकिन एक कॉन्सेप्ट है,  इंडिया, भारत, या कुछ भी कह लो, वह है तो इस सारे इलाके के  स्वाभिमान की गुंजाईश ज्यादा  है।

8.  मैं तमिल आंदोलन, खालिस्तान और आज़ाद कश्मीर आंदोलन, सब पे अध्य्यन कर चुका हूँ, फर्स्ट हैण्ड तज़ुर्बे भी है, लेकिन मेरा दृढ़ विश्वास है, इन में से कोई भी इकाई  अकेले दुकेले चीन या बाकी अंतर्राष्ट्रीय ताक़तों द्वारा ग्रस ली जाये गी।

9.   अतः,  बाकी सब ज़रूरी हो या न हो, आप किसी भी राजनीतिक सोच या दल से प्रेरित हों,  आज हमारी सभी की सब से बड़ी प्रेरणा आवश्यकता है, भारतीयता के प्रति निष्ठां, स्नेह और समर्पण। याद रहे मित्रो  की सम्पूर्ण जगत बहुत विकट परिस्थितयों से गुजरने वाला है, और हम भारतीयों की भलाई,  विभिनिताओं के बावजूद  भारत की रीढ़ की ताकत,   यानी भारतीयता को जीवित रखने में है।
🔱तत्त सत्त अकाल🚩
.©✒प्रेरक गुरु बलवन्त गुरुने⚔

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