🚩Shiromani Gurdwara Parbandhak Committee, a precise and concise Introduction.🚩@✒GBG⚔

1.   शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी मुख्य रूप से  गुरुद्वारों के रख-रखाव के लिये उत्तरदायी है। Sikh Gurdwaras Act, 1925, passed by the provincial legislative assembly on 9 July 1925 and implemented wef 1-11-1925, created 'SGPB',   (Shiromani Gurdwara Parbandhak Board), renamed (Shiromani Gurdwara Parbandhak Committee)  to provide for better administration and settlement of disputes connected to GURUDWARAS, annexed to the act,  located within 'The Then Province of Punjab'.

२.  शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का आज का अधिकार क्षेत्र तीन राज्यों पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, और केंद्र शाषित चंडीगढ़ तक सीमित है, यानी undivided पंजाब के इलाकों तक सीमित है।
WE also need to remember that Delhi and Haryana have their parallel gurudwara prabandhak committees, namely DGPC and HGPC, independent of SGPC.

3.   टेक्निकली और कानूनन, यह कमेटी पंजाब के मुख्यमंत्री के निर्देशन में ही काम करने की हक़्क़दार है।  इस का कामकाजी दायरा, गुरुद्वारों की सुरक्षा, वित्तीय प्रबन्धन, रख-रखाव और  सिक्ख धार्मिक पहलुओं, यानी की गुरु ग्रन्थ साहिब से सम्बंधित  विधि विधानों तक सिमित है।

4.  शुद्ध रूप से यह , किसी भी एंगल से, सिखों की सब से बड़ी संस्था नहीं है, और किसी किस्म के फतवे जारी करने का कानूनी  अधिकार इस कमेटी के पास  नहीं है।

6.  कमेटी अपने आप में सिक्ख आस्था का केंद्र हरगिज़ नहीं है।  भारत के संविधान में अनुसार  कमेटी को किसी भी   प्रकार की अन्य कमेटियां या संगठन गठित करने का कोई हक़्क़ नहीं है।

7.  सिक्ख सिद्धान्त के अनुसार  भी, केवल श्री गुरु ग्रन्थ  साहिब धार्मिक दिशा निर्देशन का सब से बड़ा केंद्र बिंदु हैं, अन्यथा कोई नहीं।

8.  पञ्च प्यारों की पंचायत के गठन की रिवायत दशम सत्तगुरु, साहिब श्री गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा चलाई गई, लेकिन दरअसल पांच पियारे व्ही मान्य हैं, जो समूह साध संगत द्वारा निर्विरोध चुने गए हों।

9.  यानी कुल मिला के स्थिति यह है की किले के रख रखाव के लिए  नियुक्त व्यक्ति, पहले रख-रखाव के साथ पहरेदारी भी सम्भाल ले, और पुन्ह  खुद ही को किले का किलेदार, और नवाब भी घोषित कर दे।

10.  यह तभी सम्भव है, जब किसी बड़े राजा का संरक्षण इस चौकीदार को मिलता हो, और वह राजा ही अब चौकीदार नियुक्त करता हो।

11.  SGPC अकालियों की बपौती कैसे बनी ?  इस का जबाब सरल है। जैसा की मैं पहले ही कह चुका हूँ कि टेक्निकली कमेटी पंजाब के मुख्यमंत्री के निर्देशन में ही काम करने की हक़्क़दार है, और इस हिसाब से इस के गठन में भी पंजाब के मुख्यमंत्री ही कानूनी रूप से हस्तक्षेप कर सकते हैं।  पिछले दस वर्षों से अकाली दल का ही मुख्यमंत्री  था, तो लोगों को लगने लगा की SGPC कोई शुद्ध अकालियों  की संस्था है। कानूनी तौर पे पंजाब के मौजूदा मुख्यमंत्री इस संस्था के संगठन और कामकाज  में सीधा दखल कर सकते हैं।

12.  To refer to SGPC as Parliament of the Sikhs is absolutely misplaced.  It is a concocted truth.

13.  Sikhs living in any state of India, aswellas Sikhs belonging to different nations like, America, Canada, Malaysia or any other  state, take part in the political process of their respective countries, and thus have their respective state governments, and  their respective national parliaments.

14.  Thus for any 'body' basically constituted to maintain religious shrines alone, to claim to be the parliament of the believers of that religion,  is null and void. Just as WAQF Board or Hindu Mahasabha, can not claim to be parliaments of muslims or Hindus respectively, SGPC too can from no angle claim to be the parliament of Sikhs.   कमेटी द्वारा बनाया गया सिक्ख फ़िल्म सेंसर बोर्ड, शुद्ध रूप से गैर कानूनी है।
🚩तत्त सत्तश्रीअकाल🚩
©@✒प्रेरक गुरु बलवन्त गुरुने⚔ 🚩

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