🗡 100 से भी अधिक कत्ल करने वाले, एक बाग़ी डबल एजेंट की सच्ची कहानी। @ ⚔GBG⚔


1.   आज मैं आप को एक ऐसे डबल एजेंट की सत्यकथा सुनाता हु, जो न सिर्फ विश्व की सब से खौफ़नाक तंज़ीमो के साथ बरसों जुड़ा रहा, बल्कि जिस ने दुनिया के कुछ बेहद ख़ौफ़ज़दा करने वाले, भयानक जंग में सुलगते इलाक़ों में, एक कातिल योद्धा का काम किया ।

2.  उस ने अपनी कर्मभूमी में अपनी कार्रवाइयों को अंजाम देते हुए,  100 से भी जयादा, शातिर सरकारी एजेंटों,   सरकारी ताकत से लैस फ़ौजीयों और ख़तरनाक हथियारों से लैस आतंकियों के 'क्लीन नॉक आउट' कत्लों की सेंचरि बना डाली। आज साधारण से दिखने वाले इस योद्धा को जब कोई तन्ज़ कसता है, तो मुस्कुराते हुए बस वह यही कहता है, जी जी, मैं साधारण सा इन्सान ही हूँ, शायद यही सच्च है।

3.  यह एक ऐसे इन्सान की कहानी है जिस ने यह कत्ल, खुद को बहादुर, या औरों से बेहतर सिद्ध करने के लिये, या किसी औधे की प्राप्ति के लिए, या फिर किसी ज़मीन जयदाद, या धन की लालसा में नहीं किये, बल्कि  अपनी आत्मरक्षा, सरकारी सिरफिरों को सबक सिखाने के लिए, और खतरनाक निर्मम आतंकी हत्यारों को, उन के अंजाम तक पहुंचाने के लिए किये।

3.  यह एक आम आदमी की कहानी है जो  एक ऐसे वार-ज़ोन में रहता था जहां सुबह को भी यह मालूम नहीं होता  कि उस की कोई शाम भी हो गी, या नहीं !  क्रांती के जज़्बे के चलते  यह व्यक्ति सरकारी मशीनरी के धक्के चढ़ गया, और सरकारी धक्केशाही के चलते एक बाग़ी बन गया।

4. वक्त के चलते, जब इस ने क्रांती के आइडियाज को सत्य की कसौटी पर घिसा तो पाया, क्रांती के नाम पर लड़ी जा रही हर लड़ाई, हर जिहाद, हर धर्मयुद्ध, शुद्धतम रूप से दरअसल किसी न किसी गुट, ग्रुप या राजनितिक दल के लिए, केवल सत्ता पाने की लड़ाई  ही है। या फिर यह क्रांती के नाम पर, राष्ट्रवाद के नाम पर, या धर्म के नाम पर धरती के खज़ानों पर कब्ज़ा करने की जंगी कोशिश, अन्यथा कुछ भी नहीं।  बस इस सत्य के जाहिर होते ही, 'ख़ालिद' ने बाग़ी से एक डबल एजेंट बनने की राह अख्तियार कर ली।

5.  जी हाँ, ख़ालिद नाम है हमारी कहानी के प्रोटेगोनिस्ट का। यह कहानी सीरिया से सम्नबन्धित है,  जिस में और जिस के इरद गिर्द सटे युद्ध क्षेत्रों में,  ख़ालिद ने 100 से भी अधिक लोगों को (assassinate), मृत्यु के घाट उतार दिया।  । यह भी विस्मर्णीय है की उसे इन में से किसी भी कत्ल का कोई पछतावा नहीं, बल्कि उसे इन्हें याद कर के एक रूहानी सकून महसूस होता है।

6.  याद रहे की यह कत्ल ख़ालिद ने किसी मज़हबी कारण से, किसी ज़मीन जयदाद, या धन की लालसा में नहीं किये,  बल्कि केवल और केवल ज़ालिमों को उन के अंजाम तक पहुंचाने के लिये किये।

7.  चलिये, अब कहानी की अगली परतें खोलते हैं। आप सभी जानते हैं की पिछले कई बरसों से सीरिया में गृहयुद्ध चल रहा है। अंतराष्ट्रीय ताकतों ने भी इसे, अपनी अपनी ताकत आज़माने का अखाडा बना रखा है। इस घमासान में रूस और चीन का साम्यवाद, और साथ ही इस्लामिक जिहादी आतँकवाद भी शामिल हैं। इज़राइल भी देरसवेर, इस चलती चक्की में अपना जंगी अनाज पीसने आ पहुँचता है।  यानी, कुल मिला कर सीरिया के हालात काफी देर से अत्यंत दुख़द चल रहे हैं।

8.   एक तरफ़ रास्ट्रपति बशर की फ़ौज है, तो दूसरी तरफ बाग़ी, और बीच में ही घस्स्डमपचु हो रहे हैं रूस, अमरीका, फ़्रांस, ब्रितानिया, इज़रएल, तुर्की, ईरान, इस्लामिक स्टेट, और न जाने और कौन कौन। रक्का शहर इस जंग का गढ़ बन चूका है। ख़ालिद की कहानी भी रक्का की है, रक्का के एक युवा प्रदर्शनकारी की, जी प्रदर्शन करता करता एक बाग़ी और क़ातिल बन गया।

9.  ख़ालिद ने लम्बे अरसे से रक्का में चल रही हिंसा अपनी आँखों से देखी थी। वह सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन इत्यादि भी करता था, लेकिन उस ने कभी भी सरकार के विरुद्ध हथियार उठाने के बारे नहीं सोचा था। वह युवा था,  और बनिस्बत अपनी उम्र की उमंगों के, आज़ादी चाहता था, कहने सुनने की आज़ादी, जंग से आज़ादी, गरीबी से आज़ादी, सरकार की ग़लत नीतियों से आज़ादी और उस के देश में महा-शक्तियों की बढ़ती दखलंदाज़ी से आज़ादी।

10.  इसी सब के चलते एक दिन सरकार विरोधी कुछ प्रदर्शनकारियों को सरकारी बलों ने ग्रिफ्तार कर लिया, दबा के उन से पूछ ताछ की और एक बेरहम डण्डा परेड कर डाली। पूछ ताछ में ख़ालिद का नाम भी उछला, और उसे घर से उठा लिया गया।  ख़ालिद दो चार एजेंसियों के होता हुआ सेन्ट्रल जेल पहुंच गया।  जेल में एक अफ़सर ने ख़ालिद पर थर्ड डिग्री लगाया। उसे बेइंतिहा टॉर्चर किआ गया।   जेलर ख़ालिद को वस्त्रहीन कर के उसे छत्त से लटका देता और टॉर्चर का दौर शुरू हो जाता। नतीजतन ख़ालिद, न चल सकता था, न लेट सकता था, यानी कुछ ही दिनों में वह एक स्ट्रेचर पर पड़ा हुआ हस्पताल पहुंच  गया।

11.  फ़िर एक दिन कुछ चुनिंदा युवाओं को एक ख़ुफ़िया जगह पर ट्रेनिंग का निमन्त्रण मिला। ख़ालिद इन में से एक था।  यह एक पुरानी हवाई पट्टी पर बना ख़ुफ़िया अड्डा था।  यहां एक फ्रांसीसी फ़ौजी द्वारा इन युवाओं को स्नाइपर राईफल, साइलेंसर लगी पिस्तौल, और बाकी कमांडो साजो सामान इस्तेमाल करने की सिखलाई दी गई।  यह एक किस्म की ख़ुफ़िया कमांडो ट्रेनिंग थी, एक आम नागरिक को कातिल बनाने की ट्रेनिंग।  ख़ालिद यह देख कर हैरान था की कैसे, जिस ने कभी मुर्गी भी हलाल न की थी, कुछ ही दिनों में इंसानों को मारने वाला कातिल बन गया।  सिखलाई की प्रैक्टिस के तौर पर इन ट्रेनिज़ से, असल में पकड़े जंगी विपक्षियों का कत्ल करवाया जाता। या तो उन्हें दूर बिठा कर स्नाइपर से उड़ाया जाता, और या फ़िर एक ग्रुप में कैदियों को  चला कर, बाकियों को नुकसान पहुंचाए बिना, किसी एक को मौत के घाट उतारने का हुक्म दिया जाता।

12.  इस ट्रेनिंग ने ख़ालिद को एक पक्का गुरिला योद्धा बना दिया। उस ने लोगों का पीछा करना सीखा, यह भी सीखा की कैसे किसी काफिले में से वी-आई-पी की गाड़ी को अलग थलग किया जाता है, और कैसे मोटरसाईकल को किसी भी वी-आई-पी के सुरक्षा घेरे को भेदते हुए  वी-आई-पी के पास ले जा कर अपने जोड़ीदार द्वारा हमले में सहायक बना जाता है। उस ने सीखा के कैसे बिना आवाज़ होने दिए किसी का कत्ल किया जाता है।

13.  इस ट्रेनिंग के बाद ख़ालिद, अहराल-उल्लल-शम नामक संगठन में कमांडर नियुक्त हो गया। अहराल-उल्लल-शम  उत्तरी सीरिया पर कब्ज़ा करना, और अपना बर्चस्व बनाना चाहता था ।  इस सब के चलते ख़ालिद ने कोई तीन दर्जन फौजियों को गवाह किआ और  उन से मोटा मुआवज़ा वसूला, जो बन्दूखे और असलाह खरीदने के काम आया।    ख़ालिद हनीट्रैप लगाने का भी उस्ताद था। वह खूबसूरत औरतों को मोहरा बना कर फ़ौजी अफसरों को फांसता, और न सिर्फ उन से मुआवज़ा वसूलता, बल्कि उन के वीडियो बना कर आइन्दा इस्तेमाल के लिए भी उन्हें सुरक्षित कर लेता,   लेकिन कुछ पक्के असद भक्तों को ख़ालिद ने बेझिजक टपका डाला।

14.   उस ने भेड़ों की खाल पहने कुछ भेडियो को भी जन्नत तक पहुंचाया। एक दफ़ा जब उसे एक मुस्लिम धर्म गुरु को लाईन पे लाने जा टास्क मिला, तो वह सीधा उस के घर जा पहुंचा। मुल्ला की बीवी रोने लगी और अपने शौहर की जान बक्शी की दुआ करने लगी। लेकिन ख़ालिद हैरान रह गया, जब बन्दूक माथे पे लगी देख मुल्ला जी ने  न सिर्फ ख़ालिद को धन माल, बल्कि अपनी बीवी भी देने की पेशकश कर डाली। ख़ालिद का माथा घूम गया और उस ने वहीं मुल्ला को ठोक डाला।

15.  आप भी सोचते हों गे की आखिर उस जेलर का क्या हुआ, जिस ने ख़ालिद को टॉर्चर किया था। ख़ालिद ने उस का अता पता उस ही के महकमे के लोगों से निकलवाया, उसे घर से अगवा किया, और उस ही की जेल के  पास के खेतों में ले जा कर, पहले उस के हाथ काट दिए, फिर ज़ुबान कैंची से काट डाली, उपरान्त अनेकों चीरे दे कर, जब वह मौत की भीख मांगने लगा, तो उसे  मार डाला।

16.  अब तक सीरिया, लीबिया, और बाकी तमाम मध्य पूर्वी मुल्क, एक के बाद एक एक वहशियाना जंग का अखाड़ा बन चुके थे।  जंग उफ़ान पे थी और दहशत उरूज़ पे।  कहीं दोस्ती, तो कहीं धोख़े के चलते,  कहीं ऑपरेशन की प्लानिंग में मतभेद के चलते, कहीं सत्ता या लूट के माल पर अनबन के चलते, रोज़ की ज़िन्दगी और मौत की कशमकश में उलझे सीरिया के बाग़ी, अब हर दूसरे दिन दल बदलने लगे।  इस ही के चलते ख़ालिद भी अहरार-अल-शम को छोड़ कर नुसरा-फ्रंट में शामिल हो गया। इस असोसिएशन के चलते उस के रिश्ते अल्काईदा के आतंकियों से बन निकले।

17.   जहाँ एक ओर ओसामा की मृत्यु के बाद अल्काइददा अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बाहर ज़मीन तलाश रही थी, वहीं इसइस, भी अपना ब्रर्चस्व बनाने में लगी थी। इस कशमकश में इसइस बाज़ी मार गई, और रक्का पर कब्ज़ा जमा लिया। यह लोग सभी ग्रुपों  पे भारी पड़े और रक्का इसइस की राजधानी बन गया।  इसइस असंवेदनशील और निर्मम हत्यारों की फ़ौज है।  अब दहशत का राज था, लोगों के सर काट कर चौराहों पे लगाना, छोटी सी गलती, जैसे की मोबाइल पे बात करना, तस्वीर लेना, सिगरेट पीना इत्यादि पर गोली मार दिए जाना, आम बात हो गई। कत्ल, जयदाद जब्त बलात्कार इसइस के आतंकियों का आम सा काम था।  किसी भी शरीफ औरत पर इलज़ाम लगा कर उसे संगसार कर के कत्ल करना, किसी भी लड़के को होमोसेक्सुअल कह कर उस का कत्ल करना, इसइस की दहशतगर्दी का सिग्नेचर स्टाईल था, और है। इसइस के कमांडर, नशेड़ी, तस्कर, बलात्कारी, बच्चेबाज़, और शक्की किस्म के लोग थे। वह किसी भी अपने ही जूनियर कमांडर का बढ़ता बर्चस्व देख कर उसे मरवा डालते, और इलज़ाम अमरीका, रूस या असद पे लगा देते।

18.  यह सब देख कर ख़ालिद का क्रांती से मोह भंग हो गया। अब उस ने महसूस किया की ज़िंदा रहना ही उस के लिए सब से बड़ी जंग है। उस ने इसइस से हाथ मिला लिया। ख़ालिद बिक गया, बिकना उस की मजबूरी भी था। उसे दफ्तर और  कमांड, दोनों मिले, लेकिन अंदर ही अंदर ख़ालिद इसइस के काम करने के तरीके से नाखुश था।  इन हालात में उस ने अल-नुसरा के नेता अब्बु आल आबास के निमन्त्रण पर डबल एजेंट बनने की बात मान ली।  अब वह कहने को  इसइस का दोस्त था, लेकिन दरअसल था वह इसइस के ख़िलाफ़।  वह इसइस की जानकारी अब्बु अब्बास को देने लगा। इसइस के तौरतरीकों से नफ़रत के चलते उस ने इसइस के 16 आतंकियों को उन्हीं के घर में साइलेंसर लगे हथियारों से उड़ा डाला।

23.  ख़ालिद को अब एहसास हो चला अब उस का भी नम्बर कभी भी आ सकता था। वह एक रोज़ सरिया से गायब हो गया और तुर्की  आन पहुंचा। वहां से अब वो कहाँ पहुंच गया है, कोई नहीं जानता।  ख़ालिद के अनुसार, उस ने जो भी किया, सही किया, और जिन लोगों को उस ने मारा, सही मारा। वह सब ज़ालिम लोग थे और इसही क़ाबिल थे।

24.   अब ख़ालिद एक बेनाम शक्स की ज़िन्दगी जीता है, और यदि ख़ालिद से कोई तन्ज़ में कुछ कहता है तो उसे गुस्सा नहीं आता, वह मुस्कराता है और बस इतना ही कहता है, शायद आप ठीक ही कहते हैं, मैं बस ऐसा ही हूँ।
🚩तत्त सत्त श्री अकाल🚩
©✒गुरु बलवन्त गुरुने⚔

( इस कहानी में असली पात्रों के नाम सेक्युरिटी की वजह से छुपा लिए गए हैं। )

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