🚩गुस्ताख ज़ुबान नेताओं, और 'लड़कों से गलती हो जाती है'🚩@ ✒GBG⚔©


1.   तीन बातें भारत के प्रति सदा याद रखिये,
१.भारतियों की यादाश्त बहुत छोटी है।
२. भारतियों में नैतिक मूल्यों की कमी है।
३. भारतीय तमाशबीन तो हैं, चिंतनशील  नहीं।

2.  इस ही वास्ते, हम लोग बहुत जल्दी भूल जाते हैं कब किस ने क्या कहा, क्या जुर्म किआ, या क्या गुस्ताख़ी की। हम नहीँ समझते कि कैसे किसी शीर्ष स्थान पे बैठे, किसी भी तुच्छ इंसान का बयान, व्सयक्तव्य, या कोई एक्शन, समाज तक एक अत्यंत ख़तरनाक सन्देश पहुँचा सकता है।  हम भूल जाते हैं की नैतिक मूल्यों से महरूम लोगों को, यानि जुमलेबाजों को यदी आप अपने नुमाईंदे चुनें गे, तो वह कभी भी, देश के, आप के और समाज के फायदे में नहीं हो सकते, क्यों कि उन की सारी प्रेरणा, निजी स्वार्थ से उपजती है।

3.  आज ये जो महिलाओं पे, और बच्चीयों पे  ज़ुल्मो जबर के काण्ड हो रहे हैं, इन के पीछे जितना हाथ आज के नेताओं का है, उतना ही बीते कल के नेताओं का भी है।

4.   एक तरफ इस जुल्मों जब्र के पीछे है योगी जैसा  नेता, जिस ने अपने MLA को पकड़ने में इतनी देर कर दी, कि वो रेप विक्टिम के पिता को जेल में पीट पीट कर मार डालने की कगार पे ले जा कर, उसे हस्पताल में बिना इलाज के मरने को छोड़ आया। सो सेंगर के साथ साथ, यानि बलात्कार करने वाले MLA के साथ, महिला के पिता की म्रत्यु का ज़िम्मेवार योगी भी है।

5. पहले भी योगी ने अपनी दबंगई जमाने के लिये,  रोमियो स्क्वाड नाम के गुंडों से दर्जनों लड़कियों को शरेआम पिटवा कर, अपने गुंडों का हौंसला बढाया। भाई जब तेरी पोलिस ही गुंडों की है, जो खुद गुंडों को श्रीमान जी कहते फिरते हैं, और उन की भृष्ट ज़ुबान दबनगियों की चाटते चाटते नहीं थकती, तो तुझे रोमियो स्क्वाड की क्या जरूरत है। अब तो यह सिद्ध हो गया, की योगी कोई सन्यासी वन्यासी नहीं, बल्कि एक गुंडा बॉस है, जिस की मानसिकता दमन की राजनीती की है। भगवा डालने से अगर कोई सन्यासी होता तो मैं सन्सार के सभी कौओं को श्वेत रंग में रंग कर हंस बना देता।

 6.  नरेंदर भाई मोदी ने भी उन्नाव और कथुआ पर बहुत ही अटक कर कोई बयान दिया, लेकिन मैं यह मानता हूं, की यह देरी जायज़ थी, क्यों की प्रधानंत्री, अपने गुप्तचरों से किसी भी सिचुएशन की पुख्ता जानकारी लिए बिना, कोई बयान नहीं दे सकते, इस लिए यह लाज़मी था की वह सारे मामले को सच्च झूठ की कसौटी पर परख कर ही कुछ कहें। मैं नमो को क्लीन चिट नहीं दे रहा। इस में कोई दो राय नहीं की  नमो खुद भी जुमलों की एक मशीन हैं, लेकिन बतौर प्रधानमन्त्री, उन्हों ने कठुआ और उनाव पे, वक्त रहते ज़ोरदार बयान भी दिया और उस का असर भी देखने को मिला, और आने वाले समय तक नमो के ब्यान की क़दर की जाये गी।

6.   अब सवाल उठता है, कि क्या यह सब नया है।  यह सब यूपी के लिए, या देश के लिए कोई नई बात तो नहीं। दरअसल यूपी में गुंडा कल्चर के पितामह हैं, मुलायम सिंह यादव, जो प्रदेश के मुख्यमंत्री और राष्ट्र के रक्षा मंत्री तक रहे हैं। जिन्हें इन के नकली समाजवादी चेले, नेता जी कह कर तकरीबन उन्हें सुभाष बोस का सा कद देने की कोशिश करते हैं, यह सोचे बिना, की 'कहाँ राजा भोज, और कहाँ गंगू तेली'?

7.  डंके की चोट पर कहता हूँ, और आप सभी याद रखिये कि, ये लाल टोपी लगाने वाले मुलायम, न तो खुद समाजवादी हैं, और न इन के चेले। दरअसल लाल रंग के निचे छुपे ये दायें बाज़ू संगठनों के वह पुराने गुंडे हैं, जो लाल रंग, यानि मजदूर और ग़रीब किसान का सहारा ले कर नेता बन बैठे।

8.  कभी मत भूलिये की यूपी के गुंडागर्दी कल्चर के भीष्मपितामह मुलायम भैय्या ही हैं। कभी मत भूलिये की यही वह आदमी है जिस ने, जब इस के विधायक के लड़को ने स्कूली लड़कियों से बदतमीज़ी की थी तो कहा था,
'तो क्या हुआ, लड़कों से ऐसी गलती हो ही जाती है।'

9.  मुलायम सिँह यादव को उस की इस स्टेटमेंट के लिए, कभी भी माफ़ नहीं किया जा सकता, क्यों की जब इस स्तर का नेता कुछ कहता है, उस के बुरे असर देर तक समाज में रहते हैं।
     🚩तत्त सत्त अकाल🚩
©✒गुरु बलवन्त गुरुने⚔

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