🚩अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पे महिला सशक्तिकरण पर लम्बे भाषण लेकिन दरअसल महिलाओं के प्रति दोगलेपन का रवईया। 🚩 ⚔GBG⚔

🚩अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पे महिला सशक्तिकरण पर लम्बे भाषण लेकिन दरअसल महिलाओं के प्रति दोगलेपन का रवईया। 🚩©@ ⚔GBG⚔

1.मैं एक कंपनी के मालिक के साथ, उस की कम्पनी की मैनेजमेंट और मैनेजमेंट-कन्सलटेंट के  बीच हुई मीटिंग का रिवियू  कर रहा था ।  बातचीत में निकल कर सामने आया की कुछ कर्मचारियों को बैंकॉक का टूर एक इंसेंटिव की तरहं ऑफर करने की सलाह कन्सलटेंट ने दी थी। यही मुद्दा रिवियू का एजेंडा भी था।  यह भी की जहाँ इंसेंटिव कम देना हो, तो कम्पनी गोआ को भी बैंकॉक जैसा ही डेस्टिनेश समझ सकती है।

2.  बात और आगे बढ़ी तो जो सत्य सामने आया, वह यह था की इन इंसेंटिव्ज़ के पीछे और कुछ नहीं, बस कम्पनी के कर्मचारियों को चाहे अनचाहे औरत के जिस्म से बहलाने फुसलाने का सजेशन कम्पनी के कन्सलटेंट ने दिया था। 

3.   यकीन मानिए,  मुझे पहली बार यह एहसास हुआ कि एक तरफ तो भारतीय संस्कृति पे लोग कसीदे लिखते हैं, लेकिन आज उस ही संस्कृति में औरत को मात्र एक वस्तु बना दिया गया है, यहां तक की अब कुछ कम्पनियों ने बैंकॉक या गोआ के फुल्ली पेड टूअरज़ के पर्दे में इंसेंटिव के रूप में एस्कॉर्ट्स को भी पेश करना शुरू कर दिया  है। 

4.  यह दुख़द है। इस के सीधे जिम्मेवार औरतों और मर्दों में सम्मिलित दोगले लोग हैं, जो भाषण बाज़ी तो करते हैं महिलाओं के सशक्तिकरन की, जनसभाओं में, या कम्पनियों की इम्प्लाई ट्रेनिंग में ऊँचे आचरण के पालन करने पर भाषण पेलते हैं, और साथ ही कर्मचारियों को बहलाने के भृषटतम तरीके मैनेजमेंट को सुझाते हैं।  यानी इक्कसवीं सदी में भी औरत को एक इंसेंटिव में दी जाने वाली वस्तु ही समझते हैं।

5.   वैसे तो महिला देह व्यपार एक पुराना और बदनाम पेशा है। दुख़द है कि इस बाज़ार को चलाने के लिए नेपाल और दूर दराज़ देहातों से बच्चीयों को किडनैप कर के लाया जाता है, और उन की ख़रीदो फरोख्त जानवरों की तरहं की जाती है।  इन लड़कियों के दलाल और किडनैपर्स को संरक्षण देने वाले राजनेता, इस इन्सानी जिस्म की मण्डी की मोटी कमाई खाते हैं। कानून भी जब चाहे तब, इन्ही लाचार औरतों को निशाना बनाता है, और समाज भी इन्हें ही बुरा कहता है, , भारत के कोने कोने में  ऐसे बाजार हैं, जहाँ कानून तमाशबीन बना रहता है,  और मजबूर औरतों की खरीदो फरोख्त का कारोबार शरेआम चलता है।

9.  हमें इसे रोकना हो गा। मान कर चलें कि इस कारोबार को रोकना तभी सम्भव है, जब इस कारोबार को चलाने वाले  भ्र्ष्टाचारी नेता, अभिनेता, पुलिस और गुंडे, पहले  काबू किये जायें।  यानी या तो इस धन्दे को बिकुल बन्द किया जाये, और या इसे भृष्ट राजनेताओं,  भृष्ट पुलिस और दलालों से  आज़ादी दिलवाई जाय। कंपनीज़ को भी चाहिए की वह इंसेंटिव के नाम पर  इस भृष्ट और जुर्म द्वारा संचालित व्यपार के खरीदार बन कर इसे प्रोत्साहन नां दें।
 वन्दे मातरम्।
🚩तत्त सत्त श्री अकाल🚩
©✒ गुरु बलवन्त गुरुने ⚔

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