🚩पर्यावरण की रक्षा अनिवार्य है, लेकिन क्या धुंए से धुंआ घटे गा ????🚩@ ✒GBG⚔


1.  वाराणसी से पहुंचे 350 विप्र पुरोहितों ने इस नवरात्री के पावन दिनों में, मेरठ के बैसाली मैदान में एक अनूठा यज्ञ किया, जिस में पर्यावरण की रक्षा के नाम पर पर्यावरण ही की धज्जियाँ उड़ा दी गयी।

2.  इस 9 दिनों तक चले यज्ञ में, 50,000 किलो आम के पेड़ की लकड़ी तथा, साथ ही हज़ारों किलो घी शक्कर, तिल, तथा अन्य सामग्री भी यज्ञ के नाम पर स्वाहा कर दी गयी।  इतनी सामग्री पे खर्च की गयी राशी से हज़ारों ही गरीबों को कई दिन तक भोजन करवाया जा सकता था।

3.  आस्था और धर्म के नाम पर,  9 दिन तक लगातार किये गए इस महायज्ञ में, न केवल 500 क्विन्टल फलदार पेड़ों की लकड़ी स्वाहा की गयी, बल्कि 20,150 किलो कार्बन डाईऑक्साइड तथा 1875 किलो कार्बन मोनोऑक्साइड भी हवा में घोल दी गयी। मेरठ की हवा में 100 किलो के लगभग  महीन कण,  तथा हज़ारों किलो राख भी, मेरठ वासियों के लिए तोहफ़े में छोड़ दी गई। 

4. कहना बनता है कि पहले ही मेरठ के एटमोस्फेरिक प्रदूषण  की हालत दिल्ली से भी 3 गुना नाज़ुक बताई जा चुकी है। ऐसे में जहां आम आदमी प्रदूषण की मार से पहले ही त्राहिमान है, ऐसी स्थिति मैं,  न सिर्फ मेरठ वासियों की आबो-हवा को, और भी धुआंधार किया गया, बल्कि पार्लियामेंट द्वारा 1981मेँ  पारित पर्यावरण एक्ट की भी धज्जियां उड़ा दी गयी, और आश्चर्य की बात यह, कि यह यज्ञ पर्यावरण की रक्षा के नाम पे किया गया।

5.  हालां की यज्ञ का आयोजन तथा संचालन करने वाले मित्र दावा करते हैं की यह यज्ञ पर्यावरण, और  ओज़ोन लेयर की रक्षा करे गा, लेकिन पर्यावरण से सम्बंधित अधिकारी गण, वैज्ञानिक, तथा अधिकतर जानकार व जागरूक नागरिक इस मान्यता के विपरीत विचार रखते हैं।

6.  इस में कोई शक नहीं की भारत में संविधान के अनुछेद 25 के अनुसार, सभी भारतीयों को अपने अपने निजी धर्म और आस्था का पालन करने का अधिकार है, लेकिन केवल तभी तक, जब तक किसी की आस्था,  जन साधारण की शांति, व्यवस्था या  सेहत इत्यादि के आड़े न आये। Article 25 says, 'Subject to public order, morality and health and to the other provisions of this Part, all persons are equally entitled to freedom of conscience and the right freely to profess, practice and propagate religion'.

6. मेरी सभी धार्मिक मित्रों से अपील है, की गौ ग़रीब की रक्षा, और उन्हें भोजन करवाने से बड़ा कोई यज्ञ नहीं।  सभी बाहरी पड़पञ्च त्याग कर उपनिषद व अन्य गुरुओं और ग्रन्थों  द्वारा प्रमाणित आत्मिक मूल्यों के अनुसार आचरण करना ही सब से बड़ा धर्म है।
🚩 तत्तसत्त श्रीअकाल🚩
© ✒ गुरु बलवन्त गुरुने.⚔

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