🚩CBSE paper leak scandal🚩 आदरणीय नमो के नाम एक खुला सन्देश।@✒ Guru Balwant Gurunay⚔



🚩CBSE paper leak scandal🚩
आदरणीय नमो के नाम एक खुला सन्देश।
©@✒ Guru Balwant Gurunay⚔

India TV, पंजाब पर  सीबीएसई पेपर लीक घोटाले  पर डिस्कसशन का मौका मिला।  कुछ अत्यंत खास पहलू, आप से शेयर कर रहा हूँ।

1. CBSE (सीबीएसई) के दसवीं और बाहरवीं के अर्थशास्त्र और गणित  पेपर के लीक हो जाने की घटना समाजिक और राजनितिक तौर पे भयावह है।

2.  खबर यह है कि,  28 लाख (2800,000) परीक्षार्थी दोबारा इन परीक्षाओं में बैठें गे।  यह सब 28 लाख परीक्षार्थीयों एंवम  उन के 28 लाख परिवारों के लिये  अत्यंत व्यथित करने वाली सूचना है।

3. यदी यह सत्य है कि, सीबीएसई तक पेपर लीक होने के लक्षण, पेपर लीक होने से 24 घण्टे पहले सीबीएसई के स्रोतों तक पहुंच चुके थे, तो या तो सीबीएसई के चीफ़ को शीघ्रतम निलंबित किया जाये, और या फ़िर उस अधिकारी को, जिस तक यह ख़बर तो पहुंची, लेकिन, समय रहते उस ने, यह सूचना श्रीमती अनीता करवाल तक नहीँ पहुंचाई ।

4.  फ़िर भी मैं यह अवश्य कहूँ गा, कि यदि अनीता जी ने  अपने डिपार्टमेंट को इतना कस्स के नहीं रखा, की उन के डिपार्टमेंट में कार्यरत कोई भी करिंदा, उन तक यह ख़बर समय रहते न पहुंचाए, और नतीजतन इस का खमयाज़ा प्रधानमंत्री को ख़ुद सफाई देने पे बन आये, तो अवश्य  कहीं न कहीं, ज़िम्मेवारी श्रीमती अनीता करवाल जी की भी बन पड़ती है, और देश के शिक्षा मंत्री की भी । यदि 24 घण्टे पहले पर्चा लीक होने का अंदेशा मात्र भी था, तो सम्बंधित परीक्षा रद्द कर के, इंटरनेट और टेलिविज़न के जरिये परीक्षा रद्द किये जाने और स्थगित किये जाने की सूचना विद्यार्थियों को दी जा सकती थी। ऐसा करने से इस सारे कुचक्र से बचा जा सकता था।

5.  यानी की बात मैनेजमेंट और डिसीज़न मेकिंग के फेलियर की है, और या फ़िर उच्च अधिकारीयों के अपने करिन्दों से कोम्युनिकेशन फेलियर की है। लेकिन अब पछताय होत क्या, जब चिड़िया चुग गयी खेत। अब  बात, जन्ता के दिव्य दरबार में,  छोटे मोटे भेंड़ों, बकरों की बली से निबटने वाली नहीं, या तो भारतीय स्कूली  शिक्षा व्यवस्था के मुखिया, यानी शिक्षामंत्री को हाराकीरी करनी हो गी, और या फ़िर उन्हें, एक नहीं, बल्कि उन सभी दोषियों को दण्ड देनें की व्यवस्था, करनी हो गी, जिन के कारण, 28 लाख विद्यार्थी, और उन के परिवार व्यथित हुए।

6.  कुल मिला कर, अब भारत माता  कालिका स्वरूप बनने जा रही है, क्यों की भ्र्ष्टाचार के रक्तबीज राक्षस खत्म होने की जगह बढ़ते ही जा रहे हैं, और माँ भारती के पुजारी माँ के चरणों में, अपराधियों के लिये कड़े से कड़ा दण्ड मांगने के मूड में हैं।

7.  इस लिए मेरा आदरणीय प्रधानमन्त्री जी से अनुरोध है की,  जिस व्यवस्था परिवर्तन की बात मैं अक्सर करता हूँ, और जिस व्यवस्था परिवर्तन के नारे पे आप आज देश की शीर्ष गद्दी पे विराजमान हैं, उस परिवर्तन की शुरुआत, क्यों न शिक्षा व्यवस्था परिवर्तन से ही  की जाये !

8.  देश में नकल और नकली डिग्री का चलन जड़ से खत्म करने के लिए आवश्यक है, की परीक्षा के फॉर्मेट को ही बदल डाला जाये।

9.   केवल 3 घण्टे के पेपर के बेसिज़ पे यह निर्धारित नहीं किया जा सकता, की कौन विद्यार्थी अपने कार्यक्षेत्र में कितना कामयाब हो गा। यह सिस्टम, सिवाय विद्यार्थियों को तनाव देने  के, और कुछ नहीं देता। साथ ही पास होने, या  ज्यादा नम्बर पाने के  प्रेशर से शिक्षा व्यवस्था में, महंगी ट्युशन, अध्यापकों की चापलूसी, परीक्षा में नकल करने का और/या नकली डिग्री प्राप्त कर के  नौकरी हासिल करने का प्रेशर भी विद्यार्थियों और युवाओं पर बढ़ जाता है।  यानी मौजूदा एग्जामिनेशन सिस्टम ही  शिक्षा प्रणाली में भ्र्ष्टाचार की जड़  है।

10.  समय की जरूरत है की एक नई शिक्षा प्रणाली और पद्द्यति शुरू हो, जिस में एग्जामिनेशन 3 घण्टे के पेपर तक सिमित न हो। यह किसी भी व्यक्ति के गुणवान होने का सच्चा टेस्ट नहीं है। कोई भी व्यक्ति, जिस में रट्टा मार कर, या नकल मार कर प्रश्नों के सही उत्तर देने की योग्यता  है, उसे बाकीयों से ज्यादा प्रतिभावान मान लेना, एक बड़ी भूल है। ऐसे बहुत व्यक्ति हैं जो इस सिस्टम के चलते एग्ज़ाम में तो फ़ेल तक हो जाते हैं, लेकिन फ़िर भी यदी उन्हें अपने चुनिंदा  कार्यक्षेत्र में उतरने का मौका दिया जाय, तो वह अवश्य अपने क्षेत्र में सफ़लता पा लेते हैं, और बहुत बार औरों से बेहतर भी सिद्ध होते हैं।

11.  सो आवश्यक है की मौजूदा परीक्षा प्रणालीें, जो बड़े भ्र्ष्टाचार की जड़ है, तथा शिक्षा के बाज़ारीकरन का मूल कारण भी है, इस से विद्यार्थियों को निजात दिलाई जाय।  अब सवाल उठता है, की इस सिस्टम का बदल क्या है।

12.  बदल है, प्रोजेक्ट और असाइनमेंट बेसड पढ़ाई की व्यवस्था। विद्यार्थियों को आज के युग में कक्षा में ही पढाया जाये, यह आवश्यक नहीं। कक्षा में भी शिक्षक को तोतों को पढ़ाने वाले मदारी की तरहं नहीं, बल्कि विद्यार्थीयों के सहायक के रूप में पेश आना चाहिये।

13.  यानि शिक्षक को अब फैसिलिटेटर के रूप में आगे आना चाहिए।  विद्यार्थी को नए से नए प्रोजेक्ट्स और अस्सायिनमेंट्स दी जाएं, और फ़िर उन अस्सायिनमेंट्स को परिपूर्ण करने के लिये  रिसोर्सेज़ मुहैया करवाना, या उन तक पहुंचने का प्रोत्साहन व दिशा नर्देश देना काफ़ी है। कोई विद्यार्थी जितनी अच्छी रिसर्च या फील्ड वर्क कर के, जितने अच्छे से अपने प्रोजेक्ट्स को मुक़्क़मल करे, व्ही उस की योग्यता का मापदण्ड होना चाहिए।

14.  विद्यार्थी को केवल क्लासरूम में बैठ कर शिक्षक की टर्र टर्र सुनने से बेहतर हो गा, की विद्यार्थी,  लाइब्रेरियों में बैठ कर किताबें खंगाले, ग्रुप डिस्कशन्स में हिस्सा ले, इंटरनेट पे अवेलेबल सभी स्रोतों को खंगाले, सम्बंधित फील्ड मेँ जा कर लोगों से मिले, ज़मीनी ज्ञान हासिल करे, और फ़िर यदी कोई भी शंका हो, तो उस का निदान अपने शिक्षक या शिक्षकों से मिल कर करे। इस से विद्यार्थी की प्रतिभा और ज्ञान, दोनों ही ज्यादा बेहतर डेवेलप हों गे।

15.   प्रधानमंत्री की स्किल डेवेलपमेंट के इनिशिएटिव को मध्यनजर रखते हुए, शिक्षकों का ध्यान, विद्यार्थी में रिसर्च, ज्ञानार्जन, स्वाध्याय, और प्रैक्टिकल वर्क, तथा फील्ड वर्क कर सकने की स्किल्स डवेल्प करने में सहयोग तथा गाइडेंस देने पर ज्यादा होना चाहिए, यही अनिवार्य है।  यह 'नई शिक्षा व्यवस्था' 'न्यू इण्डिया' के निर्माण की तरफ एक सार्थक कदम हो गा।

16.  जहां तक मौजूदा नकल घोटाले की बात है, तो मेरी प्रधानमन्त्री जी से यही अर्ज़ है, कि अब माँ भारती को हिन्दू मुस्लिम  नामक बकरों की नहीं, बल्कि, भृष्टाचार और कुव्यवस्था के खिलाफ किसी बड़ी नरबली की जरूरत है। Some top heads must roll to set the house in order, or some revolutionary changes must be brought in the assessment system of a student. This is a minimum must. वरना यह कुव्यवस्था आप   की ही साख और अस्तित्व को कहीं,  बली वेदी पे  न चढ़ा दे !
🚩तत्त सत्त श्री अकाल🚩
✒गुरु बलवन्त गुरुने⚔

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