🚩भारत में रह कर भारत विरोधी काम करने वालों की निंदा अनिवार्य है. 🚩 ©✒GBG⚔




1.  मैं न तो मोदी भक्त हूँ, और न ही राहुल भक्त, लेकिन इस में कोई शक़ नहीं की मोदी आज हमारे देश के प्रधान मंत्री हैं, और यदि कोई भारत के प्रधान मंत्री को धमकाये, या उन्हें मारने की धमकी दे, तो यह मुझे हर गिज बर्दाश्त नहीं। ऐसे किसी भी व्यक्ति और व्यक्तव्य की मैं घोर निंदा करता हूँ।

2.  कुछ समय पहले  इंडियन मुजहदीन के सरगना ज़ाकिर मूसा ने भारत के प्रधानमंत्री , नरेंद्र भाई मोदी को मारने की धमकी दी, मुद्दा केवल इतना की मोदी उस राजनितिक सोच से बावस्ता हैं, जो भारत को सिर्फ एक रिफ्यूजी कैम्प बनाने के बरख़िलाफ़ हैं, और उन्हों ने रोहिंगिया रिफ्यूजियों को  भारत में अनंत शरण देने की ख़िलाफ़त की है।

3.  भारत इन्सानी मूल्यों की कदर करता है। इस का सीधा सबूत है देश द्वारा दी गयी तिब्बती भाइयों और बहनों को शरण। बेशक़ हमारे तिब्बती भाई बरसों से भारत में रिफ्यूजी बन कर रह रहें हैं, लेकिन उन्हों ने कभी भी भारत की एकता और अखण्डता के लिए कोई खतरा खड़ा नहीं किया। यह अलग बात है, की भारत को तिब्बत की सपोर्ट करने के एवज़ में चीन से पक्की दुश्मनी मोल लेनी पड़ी, लेकिन न सिर्फ तिब्बती भाई बहनों ने भारत की अर्थव्यवस्था में एक सार्थक योगदान डाला, बल्कि भारत का एहसान भी माना।

4.  इस के विपरीत बांग्लादेश और म्यनमार से आये शरणार्थियों ने, न सिर्फ भारत की राजनितिक हलचल में सीधा दखल दिया, बल्कि आतँकवाद का भी साथ दिया।  यह दुख़द है।

5.  मैं ह्यूमन राईटस का समर्थक हूँ, और शरणागत को शरण देने के हक़ में हूँ, लेकिन इस का यह मतलब हरगिज़ नहीं की, के मैं ऊँठ के लिए अपना तम्बू छोड़ देने को कोई बहुत बड़ी धार्मिक या दान-पुन्य वाली  गतिविधि मानता हूँ। इस मुद्दे पर चिंतन की आव्श्यक्ता है।

6.  एक इन्सान होने के नाते मैं इंसानियत और इंसान की किसी भी मज़हब या जात बिरादरी से ज्यादा इज़्ज़त करता हूँ, लेकिन मैं ऐसी ही भावनायें अपने बिरादर इंसानों में भी देखना पसन्द करूँ गा।

7.  जब  म्यनमार में रोहंगिया मुसलमान प्रताड़ना और नफ़रत का शिकार बने, तो इंडोनेशिया और भारत ही ऐसे दो देश हैं जिन्होंने सब से ज्यादा रोहिंगियों को शरण दी। देखने की बात यह है की ऐसे मेँ, हाफ़िज़ सय्यद ने इंडोनेशिया में तो कम्बल, भोजन और दवाइयाँ बांटी, लेकिन भारत में नफ़रत और अलगाववाद का पाठ ही पढ़ाया, जिस के चलते आज कश्मीरी इस्लामिक आतंकियों में रोहिंगियों के पुख्ता निशान मिलने लगे हैं।

8.  यही कारण है की एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसे इदारे, जो भारतियों को सहनशीलता का पाठ पढ़ा रहे हैं, उन्हें  चाहीये की वह कुछ इंसानियत का पाठ उन शरणार्थियों  को भी पढ़ायें, जो भारत में रह कर भारत की जड़ों में ही मट्ठा डालने का काम कर  रहे हैं। उम्मीद है, वह इस पक्ष से भी कोई बात तो अवश्य करें गे!
🚩तत्त सत्त श्री अकाल🚩
©✒ गुरु बलवन्त गुरुने ⚔

No comments:

Post a Comment