💐पंजाब यूनिवर्सिटी में सजी काव्य की महफ़िल💐 ✒गुरु बलवन्त गुरुने⚔



1. पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़  में रीडर्स एंड राइटर्स सोसायटी ऑफ़ इण्डिया तथा 'सेंटर फॉर स्वामी विवेकानन्द स्टडीज़, पंजाब यूनिवर्सिटी'  के सौजन्य से काव्य की एक  महफ़िल सजाई गयी।

2. नागौर राजस्थान से आये शायर, इरफ़ान भाई की आमद ने महफ़िल में चार चाँद लगा दिये। सच्च कहूँ तो उन्हें सुन कर ये शेर याद आ गया,
वो ग़ज़ल पढ़ने में लगता भी ग़ज़ल जैसा था,
सिर्फ़ ग़ज़लें ही नहीं लहजा भी ग़ज़ल जैसा था.'

 3. कवि और नायाब शिल्पकार मुसाफ़िर जी ने अपने मरहूम बेटे की याद में नज़्म पढ़ी। यह नज़्म, अपने मरहूम बेटे के लिऐ, एक बाप के दिल से निकली सदा थी, जिस की अंतिम यात्रा पिता के कन्धे पे निकली हो। नज़्म ने सभी की भावुक किया।

4.  और भी बेहतरीन शायरों को सुनने का मौका मिला। हिंदी, पंजाबी और उर्दू के तीनोँ रंग ऐसे बंधे, कि बहुरंगी हिंदुस्तान, यूनिवर्सिटी के हाल में ही जीवित हो उठा।

 5. महफ़िल की कारगुज़ारी का ज़िम्मा डॉक्टर आई डी सिंह जी ने, और स्टेज सञ्चालन का ज़िम्मा मोहतरीमा शैली तनेजा जी ने बेहतरीन संभाला।

6. मैंने भी अपनी ग़ज़लें और नज़्में पढ़ी। खूब रंग जमा।  ग़ज़ल जो मैंने महफ़िल में कही, आप सभी के लिए भी प्रस्तुत है। शुक्रिया।

7. अंत में यही कहूँ गा,
ग़ज़ल में बंदिश-ओ-अलफ़ाज़ ही नही काफ़ी,
जिगर का खून भी कुछ चाहिए असर के लिए💐💐💐💐💐

📿तत्त सत्त श्री अकाल🚩
✒गुरु बलवन्त गुरुने⚔

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