🚩पुराण ग्रन्थों के अनुसार कलयुग के लक्षण🚩© @ ✒गुरु बलवन्त गुरुने. ⚔


1. कल युग के लक्षण पुराण ग्रन्थों में पहले ही कह दिये गए हैं। क्यों की वेद, उपनिषद और पुराण भारत के प्रमाण ग्रन्थ हैं, इस लिये इन्हें केवल पूजा पाठ या किसी एक धर्म से जोड़ कर देखना मिथ्याभास है। इन ग्रन्थों की बाणी में अनेकों सत्य, या सत्य की दिशा के निर्देश देने वाले इशारे छुपे हैं।

2.   मैं इन ग्रन्थों की बाणी के अनुसार कलयुग के कुछ लक्षण पेश कर रहा हूँ। इस लघु लेख के अंत में, इन्हीं तथ्यों से सम्बंधित श्लोक भी प्रमाण स्वरूप दर्ज कर रहा हूँ। आप मित्र गण लाभवंतीत हों गे,  ऐसी मेरी चेष्टा है।

3. कलयुग के लक्षणों के अनुसार शादी ब्याह केवल एक मज़ाक बन कर रह जाये गा। कुछ लोग केवल लोभ या फायदे के लिये प्रणय बन्धन में बंधें गे अवश्य, लेकिन  यह बन्धन कच्चे हों गे। ज्यादातर लोग शादी ब्याह के बगैर इक्कठे रहें गे और सहूलत के चलते, साथी बदल लिया करें गे।

4.  ज्यादा लोग मध्यलिंग तत्व प्रिविर्ति प्रमुख,  शुद्ध पुरुष या स्त्री गुण विहीन, ममता और योधागुण विहीन हों गे। स्त्रियों में ममता, और पुरुषों में  पौरुष गुण नहीं मिलें गे।

5.   धर्म कर्म केवल दिखावे मात्र के लिए हो गा, या यों कहिये की केवल ठग्गी का साधन हो गा। लोग केवल एक धागा (जनेऊ) पहनकर ब्राह्मण होने का दावा करेंगे, टोपी पहन कर मुसलमान, या फ़िर केवल पगड़ी इत्यादि पहन कर गुरसिक्ख होने का दावा करें गे।  यानी धर्म कर्म केवल वस्त्र आदी तक ही सीमीत हो गा। ह्रदय और कर्म  से पुरुष धर्मविहीन हो गा।

6.   लोग केवल समाज में अच्छा दिखने के  लिए  धार्मिक कामों में रूचि रखने का नाटक करें गे।  मन्दिर मस्जिद गुरुद्वारा, कीर्तन, सत्संग इत्यादि,  समाज सेवा नहीं, बल्कि अपने निजी मुनाफे के लिए, या फिर निजी कुटुम्भ मात्र के भरण पोषण का जरिया बन जायें गे। 

7.  भ्रष्ट लोगों से भरी हुई दुनियां में  लोग सत्ता और धन हासिल करने के लिए एक दूसरे का वध करें गे। लोभ के चलते भाई बहन आपस में एक दूसरे की मर्यादाहरण या मृत्यु का कारण बनें गे।

8.  भूख-प्यास और कई तरह की चिंताओं के चलते, लोग कई बीमारियां में डूबे रहें गे, और  अल्पआयु हों गे।

9.  केवल धन दौलत ही गुणवत्ता का आधार माना जाये गा। यानी धनवान चोर उच्चके, रांड भांड, ख़ुद को किसी कमांडर या प्रोफेसर से कम न समझें गे। तुच्छ लोग धन का दिखावा कर के ख़ुद को दूसरों से बेहतर और उच्च होने का अनावश्यक प्रदर्शन करें गे।

10.   न्याय केवल बाहूबली या घूसखोर ही पा सकें गे। यानी ग़रीब लोग न्याय से वंचित और लाचार हों गे। इस के चलते समाज में गुस्सा बढ़े गा। लोग या तो आत्महत्या करें गे, और या फ़िर हत्यारे बन जायें गे।

11.   चालाक, वाचाल, नौटंकी और बोलबाणी के धनी लोगों को विद्वान माना जाएगा । मूर्ख या काईं व्यक्ती  यदी चुप रहे गा तो उसे मुनि माना जाये गा। तुकबाज़ी कविता हो गी, और बकवास-बाज़ी कथा।

12.  आंधी, बेमौसम बारिश, बाढ़, सूखा, कड़ाके की सर्दी और गर्मी पड़े गी, जिस के चलते लोग प्राकृतिक संसाधनों के बखिये उधेड़ दें गे, परेशान हों गे और अन्ततः मृत्यु का ग्रास बनें गे।

13.  पर्यावरण नष्ट हो गा, जिस  के कारण अकाल पड़े गा। बाड़ ही खेत को खाये गी।  सरकारें बेतहाशा टेक्स लगाएं गी और एक बार फ़िर जन्ता को शहर गाँव इत्यादि त्याग कर जंगलों बियाबानों की शरण लेनी हो गी।

14.  लोग कन्दमूल और मांसभक्षी बन कर मजबूरन पहाड़ो, जंगलों और मरुस्थलों की शरण में चले जाएँ गे। 

15.  याद रहे की ऐसा समय जल्द ही आये गा जब मृत लोगों का अंतिम संस्कार, जीवित लोगों की ज़िंदा लाशों की भूख की अग्नि को शांत करने के, ईंधन स्वरूप हो गा।

16.  आप यदि इस सब से बचना चाहते हैं, तो पर्यवरण और इन्सानी मूल्यों की रक्षा में जुट जाएँ, वरना मत कहिये गा की समय रहते किसी ने सरल भाषा में यह सब नहीँ समझाया और संस्कृत हम ने सीखी नहीं।
🚩तत्त सत्त श्री अकाल🚩
©✒गुरु बलवन्त गुरुने ⚔

Refrences from Puranas:-
🙏दाम्पत्येभिरुचिहेतमायैव व्यावहारके। स्त्रीत्वे पुंस्तवे च हि रितर्विप्रत्वे सूत्रमेव हि।। दाक्ष्यम कुटुम्बभरणं यशाड्थे धर्मसेवनम्। प्रजाभिर्दुभिराकीर्णो क्षितिमंडले।। क्षित्तृड्भ्या व्याधिभिश्चैव संतप्स्यन्ते च चिन्चया। त्रिंशद्विंशतिवर्षाणि परमायु: कलौ नृणाम।। वित्तमेव कलौ नृणां जन्माचारगुणोदय:। धर्मन्यायव्यवस्थायां कारणं बलमेव हि।। अवृत्ताया न्यायदौर्बल्यं पाडिण्त्ये चापलं वच:।। अनावृष्टया व्याधिभिश्चैव संतप्स्यन्ते च चिन्या। शीतवीतीवपप्रावृड्हिमैरन्योन्यत: प्रजा:।। आत्छित्रदारद्रविणा याय्स्त्र्ति गिरिकाननम। छााकमूलामिषाक्षौद्रफलपुष्पाष्टिभोजना:।।🙏🌺🌼🌻

No comments:

Post a Comment