1. आज की सब से बड़ी खबर यह है कि पंजाब के माननीय मुख्यमंत्री, कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एक टेली प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिस में उन्हों ने दो दिल दहला देने वाले तथ्य लोगों के सन्मुख रखे। याद रहे की मुख्य मंत्री या प्रधानमन्त्री, जब कोई बात कहते हैं, उस बात के पीछे सैकड़ों वैज्ञानिकों, हैल्थ एक्सपर्ट्स और विशेषज्ञों का ज्ञान हुआ करता है, सलाह हुआ करती है, यदी इस औहधे के लोग, सलाह लें तो। अब यदि किम जोंग जैसे लोगों की बात करें, तो वह तो सनकी और खब्ती इंसान है। भारत के नेताओं से किम जोंग जैसे ग्धेपन की उम्मीद नहीं की जा सकती।
2. पंजाब के मुख्य मंत्री ने क्या कहा ? एक तो यह कि करोना अभी लंबा चले गा। कयास लगाया जा रहा था, कि करोना 15 अप्रैल तक पीक करे गा, और मई तक थमना शुरू हो जाए गा, मेरा भी यही अंदाज़ा था, लेकिन अब जो स्थिति बनती नजर आ रही है, वह यह है कि, करोना जुलाई अगस्त में पीक करे गा, और अक्टूबर तक ही शायद काबू में अा सके, वह भी तब, अगर " हर्ड इम्यूनिटी " का सिद्धांत काम कर गया तो। दूसरा जो मुख्य मंत्री ने कहा, वह यह की पंजाब की 87% आबादी के इस वायरस द्वारा प्रभावित होने का खतरा है। खबरों की मानें तो माननीय प्रधानमंत्री ने भी देश की 58 % आबादी के संक्रमित हो जाने की चिंता जताई है।
3. इस खबर को यदि एनालाइज किया जाए तो कुछ चौंकाने वाले परिणाम सह्मने आते हैं। याद रहे की पिछली जनगणना के हिसाब से पंजाब की जनसंख्या 2 करोड़ 80 लाख के करीब है, जिसे आज मोटे तौर पे गणित लगाने के लिए 3 करोड़ माना जा सकता है। भारत की जनसंख्या 130 करोड़ है।
4. अब करोना ने विदेश में कैसे नुकसान किया, इस के विश्लेषण के लिए, इटली और चीन का रुख करें, तो इटली में करोना संक्रमित लोगों की मृत्यु दर 7% और चीन में यह 3% रही है। अमरीका में जब 3 लाख लोग संक्रमित गिने गए, तो उन में से तकरीबन 10,000 मृत हुए, यानी हर 20 में से एक व्यक्ति, हर 100 में से 5 व्यक्ति, यानी 5% मृत्यु दर।
5. मैंने अपने पिछले लेख में भी लिखा था, कि हमारे देश, यानी भारत की जनसंख्या डेंसिटी अमरीका से 11 गुणा ज्यादा है। अमरीका भारत से 3 गुणा ज्यादा इलाका रखता है, जब की इस के विपरीत, भारत के पास अमरीका से 4 गुणा ज्यादा आबादी है। लेकिन हम संक्रमण और मृत्यु दर को 11 गुना नहीं, केवल 2 गुणा ही अमरीका से ज्यादा लेे कर चलेंगे। तो मान कर चलें कि भारत में, विपरीत परिस्थितियों के चलते यह दर 10% तक भी हो सकती है।
6. लेकिन आशावादी होते हुए हम इस दर को 5% पे फ्रीज़ करते हैं। यानी 100 संक्रमित लोगों में से 5 रोगियों की मौत। तो इस हिसाब से 3 करोड़ की आबादी वाले पंजाब में, जहां कप्तान अमरिंदर सिंह जी ने 87% लोगों के जुलाई अगस्त तक संक्रमित होने का अनुमान दिया है, वहां 3 करोड़ में से 87%, यानी 2 करोड़ 61 लाख लोगों के संक्रमित होने का अंदेशा है। और 5% की मृत्यु दर लगाते हुए, केवल करोना से तकरीबन 13 लाख लोगों की मृत्यु संभव है। बताता चलूं कि मृत्यु के बाकी कारण अपनी जगह, जस के तस बने रहेंगे।
7. भारत में नेशनल लेवल पे 58% संक्रमण का ख़दसा प्रधान मंत्री जी ने जताया है, मेरा अंदाजा है, यह 60% होगा। 130 करोड़ का 60% बनता है 78 करोड़ लोगों के संक्रमित होने की संभावना। अब 5 % की मृत्यु दर के चलते मरने वालों की संख्या, 3.9 करोड़, या मोटे तौर पे 4 करोड़ तक जा सकती है ।
8. यह अनुमान मैंने, देश के बड़े नेताओं के बयानों पे आधारित आशावाद के सहारे लगाए हैं। यदि प्रैक्टिकल हो कर संक्रमण से ग्रसित लोगों में से 10% की मृत्यु की संभावना लगाएं, तो पंजाब में 26 लाख और भारत में 8 करोड़ लोगों को अक्टूबर तक, करोना अपना ग्रास बना सकता है।
9. अब करते हैं बात पते की, यानी इस लेख के उद्देश्य की । मित्रो, याद रहे, करोना अमीर गरीब, हिन्दू , मुसलमान, सिक्ख ईसाई, यानी धर्म के नाम पर, या जात पात के नाम पर, या इलाके के नाम पर कोई भेद भाव नहीं करता। करोना की इस निष्पक्षता के चलते, सभी एहतियात और सावधानियां, सभी के लिए एक सी हैं।
10. इस के इलावा कुछ अनिवार्य सत्य भी देश और कौम के समक्ष खड़े हैं। कनक कि लाखों एकड़ में खड़ी पकी हुई फसल, कटने के लिए तैयार खड़ी है। कारखानों की मशीनें, कारीगरों के दर्शनों को तरस रही हैं, प्रोजेक्ट मजदूरों के पवित्र हाथों द्वारा की जा सकने वाली मेहनत को तरस रहे हैं, यानी देश के असली रोजगार देने वाले मजदूरों के मन्दिर मस्जिद, पुनः अपने भक्तों, और पुजारियों यानी मजदूरों के पांव की आहट को तरस रहे हैं। दुकानें ग्राहकों को तरस रही हैं, व्यपार व्यपारियों को तरस रहा है, और सूनी सूनी सड़कें, और रेलवे लाइन, लरियों और रेलों के आवागमन को तरस रही हैं। हमें सभी को मिलजुल कर अपने देश की अर्थ व्यवस्था को वापिस पटरी पर भी लेजाना है। इस के चलते एक सैनिक की तरह सीना तान के इस युद्ध में उतरना होगा। जिए तो जिए, मरे तो मरे। किसी डाक्टर या नर्स का करोना से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त होना, किसी सैनिक की शहादत से कम नहीं। सभी को दिल से सलाम।
11. यह भी सच है, कि देश विदेश के राष्ट्रध्यक्ष, प्रधानमन्त्री, प्रदेशों के मुख्य मंत्री, सेना अध्यक्ष, प्रदेशों के डीजीपी, जिलों के डीसी और पुलिस चीफ, डाक्टर, वैज्ञानिक, बुद्धिजीवी, सभी इस प्लेग से बचने का एक ही मंत्र बता रहे हैं, और वह है समाजिक दूरी बनाए रखना। कृपया इसे अवश्य मानिए, जब तक की कहीं भी आना जाना अनिवार्य ना हो। साबुन से बार बार हाथ धोते रहना, मास्क और दस्ताने डाल कर विचरण करना, तथा बाकी सब एहतियात की बातों से तो आप आलरेडी वाक़िफ हैं। तो कुल मिला कर निष्कर्ष यह निकला, कि बचाव ही में बचाव है। सावधानी में ही समझदारी है। बाकी मौत से कया डरना। जब भी सरकार इजाज़त देती है, तब सर पे बांधो कफ़न और काम पे निकलो। मेरे देश के मजदूरों, सैनिकों, पुलिस कर्मियों और किसानों को गुरु गुरुने का शत्त शत्त प्रणाम।
🚩सत्य ही अमृत है🚩
🔱सत्य सुनें, सत्य सुनाएं, सत्य ही का प्रसारण करें।🔱
@✒गुरु बलवंत गुरूने⚔
2. पंजाब के मुख्य मंत्री ने क्या कहा ? एक तो यह कि करोना अभी लंबा चले गा। कयास लगाया जा रहा था, कि करोना 15 अप्रैल तक पीक करे गा, और मई तक थमना शुरू हो जाए गा, मेरा भी यही अंदाज़ा था, लेकिन अब जो स्थिति बनती नजर आ रही है, वह यह है कि, करोना जुलाई अगस्त में पीक करे गा, और अक्टूबर तक ही शायद काबू में अा सके, वह भी तब, अगर " हर्ड इम्यूनिटी " का सिद्धांत काम कर गया तो। दूसरा जो मुख्य मंत्री ने कहा, वह यह की पंजाब की 87% आबादी के इस वायरस द्वारा प्रभावित होने का खतरा है। खबरों की मानें तो माननीय प्रधानमंत्री ने भी देश की 58 % आबादी के संक्रमित हो जाने की चिंता जताई है।
3. इस खबर को यदि एनालाइज किया जाए तो कुछ चौंकाने वाले परिणाम सह्मने आते हैं। याद रहे की पिछली जनगणना के हिसाब से पंजाब की जनसंख्या 2 करोड़ 80 लाख के करीब है, जिसे आज मोटे तौर पे गणित लगाने के लिए 3 करोड़ माना जा सकता है। भारत की जनसंख्या 130 करोड़ है।
4. अब करोना ने विदेश में कैसे नुकसान किया, इस के विश्लेषण के लिए, इटली और चीन का रुख करें, तो इटली में करोना संक्रमित लोगों की मृत्यु दर 7% और चीन में यह 3% रही है। अमरीका में जब 3 लाख लोग संक्रमित गिने गए, तो उन में से तकरीबन 10,000 मृत हुए, यानी हर 20 में से एक व्यक्ति, हर 100 में से 5 व्यक्ति, यानी 5% मृत्यु दर।
5. मैंने अपने पिछले लेख में भी लिखा था, कि हमारे देश, यानी भारत की जनसंख्या डेंसिटी अमरीका से 11 गुणा ज्यादा है। अमरीका भारत से 3 गुणा ज्यादा इलाका रखता है, जब की इस के विपरीत, भारत के पास अमरीका से 4 गुणा ज्यादा आबादी है। लेकिन हम संक्रमण और मृत्यु दर को 11 गुना नहीं, केवल 2 गुणा ही अमरीका से ज्यादा लेे कर चलेंगे। तो मान कर चलें कि भारत में, विपरीत परिस्थितियों के चलते यह दर 10% तक भी हो सकती है।
6. लेकिन आशावादी होते हुए हम इस दर को 5% पे फ्रीज़ करते हैं। यानी 100 संक्रमित लोगों में से 5 रोगियों की मौत। तो इस हिसाब से 3 करोड़ की आबादी वाले पंजाब में, जहां कप्तान अमरिंदर सिंह जी ने 87% लोगों के जुलाई अगस्त तक संक्रमित होने का अनुमान दिया है, वहां 3 करोड़ में से 87%, यानी 2 करोड़ 61 लाख लोगों के संक्रमित होने का अंदेशा है। और 5% की मृत्यु दर लगाते हुए, केवल करोना से तकरीबन 13 लाख लोगों की मृत्यु संभव है। बताता चलूं कि मृत्यु के बाकी कारण अपनी जगह, जस के तस बने रहेंगे।
7. भारत में नेशनल लेवल पे 58% संक्रमण का ख़दसा प्रधान मंत्री जी ने जताया है, मेरा अंदाजा है, यह 60% होगा। 130 करोड़ का 60% बनता है 78 करोड़ लोगों के संक्रमित होने की संभावना। अब 5 % की मृत्यु दर के चलते मरने वालों की संख्या, 3.9 करोड़, या मोटे तौर पे 4 करोड़ तक जा सकती है ।
8. यह अनुमान मैंने, देश के बड़े नेताओं के बयानों पे आधारित आशावाद के सहारे लगाए हैं। यदि प्रैक्टिकल हो कर संक्रमण से ग्रसित लोगों में से 10% की मृत्यु की संभावना लगाएं, तो पंजाब में 26 लाख और भारत में 8 करोड़ लोगों को अक्टूबर तक, करोना अपना ग्रास बना सकता है।
9. अब करते हैं बात पते की, यानी इस लेख के उद्देश्य की । मित्रो, याद रहे, करोना अमीर गरीब, हिन्दू , मुसलमान, सिक्ख ईसाई, यानी धर्म के नाम पर, या जात पात के नाम पर, या इलाके के नाम पर कोई भेद भाव नहीं करता। करोना की इस निष्पक्षता के चलते, सभी एहतियात और सावधानियां, सभी के लिए एक सी हैं।
10. इस के इलावा कुछ अनिवार्य सत्य भी देश और कौम के समक्ष खड़े हैं। कनक कि लाखों एकड़ में खड़ी पकी हुई फसल, कटने के लिए तैयार खड़ी है। कारखानों की मशीनें, कारीगरों के दर्शनों को तरस रही हैं, प्रोजेक्ट मजदूरों के पवित्र हाथों द्वारा की जा सकने वाली मेहनत को तरस रहे हैं, यानी देश के असली रोजगार देने वाले मजदूरों के मन्दिर मस्जिद, पुनः अपने भक्तों, और पुजारियों यानी मजदूरों के पांव की आहट को तरस रहे हैं। दुकानें ग्राहकों को तरस रही हैं, व्यपार व्यपारियों को तरस रहा है, और सूनी सूनी सड़कें, और रेलवे लाइन, लरियों और रेलों के आवागमन को तरस रही हैं। हमें सभी को मिलजुल कर अपने देश की अर्थ व्यवस्था को वापिस पटरी पर भी लेजाना है। इस के चलते एक सैनिक की तरह सीना तान के इस युद्ध में उतरना होगा। जिए तो जिए, मरे तो मरे। किसी डाक्टर या नर्स का करोना से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त होना, किसी सैनिक की शहादत से कम नहीं। सभी को दिल से सलाम।
11. यह भी सच है, कि देश विदेश के राष्ट्रध्यक्ष, प्रधानमन्त्री, प्रदेशों के मुख्य मंत्री, सेना अध्यक्ष, प्रदेशों के डीजीपी, जिलों के डीसी और पुलिस चीफ, डाक्टर, वैज्ञानिक, बुद्धिजीवी, सभी इस प्लेग से बचने का एक ही मंत्र बता रहे हैं, और वह है समाजिक दूरी बनाए रखना। कृपया इसे अवश्य मानिए, जब तक की कहीं भी आना जाना अनिवार्य ना हो। साबुन से बार बार हाथ धोते रहना, मास्क और दस्ताने डाल कर विचरण करना, तथा बाकी सब एहतियात की बातों से तो आप आलरेडी वाक़िफ हैं। तो कुल मिला कर निष्कर्ष यह निकला, कि बचाव ही में बचाव है। सावधानी में ही समझदारी है। बाकी मौत से कया डरना। जब भी सरकार इजाज़त देती है, तब सर पे बांधो कफ़न और काम पे निकलो। मेरे देश के मजदूरों, सैनिकों, पुलिस कर्मियों और किसानों को गुरु गुरुने का शत्त शत्त प्रणाम।
🚩सत्य ही अमृत है🚩
🔱सत्य सुनें, सत्य सुनाएं, सत्य ही का प्रसारण करें।🔱
@✒गुरु बलवंत गुरूने⚔