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🚩 डीप स्टेट क्या है ❓@ ✒GBG⚔

1.  मेरे एक स्टूडेंट मित्र ने मुझ से पूछा, सर 'डीप-स्टेट' क्या होती  है ?   दरअसल उस ने मशहूर जर्नलिस्ट  रवीश कुमार की एक रिपोर्ट में यह शब्द  'डीप-स्टेट' सुना, तो  जिज्ञासा वश  उस ने मुझ से यह प्रश्न किया।   मैं इस का संक्षिप्त लेकिन पर्याप्त उत्तर दे रहा हूं, जो विद्यार्थी वर्ग के लिए ही नहीं, सभी जिज्ञासू मित्रों के लिए पर्याप्त है।

2.  डीप-स्टेट का अर्थ समझने के लिए जरूरी है की हम इस का संधी विच्छेद करते हुए इस का अर्थ समझ लें ।   Deep का सीधा सा अर्थ है,  extending far below a general point of reference, far below  the surface,  यानी सतह से बहुत नीचे,  और स्टेट का अर्थ है राज्य ।  डीप-स्टेट किसी भी देश के  दृष्टिगोचर तंत्र के नीचे छिपे विराट खुफिया तंत्र को कहते हैं जो देश की गुप्त पॉलिसीज को, स्ट्रेटेजीज़ को, ख़ुफ़िया इरादों को क्रियावान करता है। हालां कि,  ऑपरेशनल लेवल पर इस में बहुत से आपस में विपरीत दिखने वाले  ऑपरेटिवज़ काम करते हैं, लेकिन  इस के शीर्ष स्थानों और पदों पे सत्ता की गहरी और गुप्त  डोरियों का संचालन करने वाले लोग ही हुआ करते हैं,  जिन में कुछ विशेष राजनेता, बहुत ही सीनियर बियूरोकरेट, विशिष्ठ फौजी जनरल, कुच्छ अति समृद्ध पूंजीपती और कुछ विशेष बुद्धिजीवी होते हैं।  यह लोग किसी के भी सगे नहीं होते, एक दूसरे के भी नहीं। इन का फोकस केवल और केवल अपने देश, अपने स्टेट के स्ट्रेटेजिक इंटरस्ट की रक्षा करना और स्टेट के दुश्मनों को समाप्त करना होता है। इस हिसाब से डीप स्टेट के अलग अलग  विंग,  देश की शीर्ष सुरक्षा अजेंसियों का रुतबा भी रखते हैं।

3.  यानी सत्ता के गलियारों में बड़े बदलाव लाने वाले लोग डीप-स्टेट के बॉस होते हैं।  कम शब्दों में ज्यादा कहना हो तो उदाहरण स्वरूप,  ISIS,  अमरीकन   डीप-स्टेट  CIA का,  एक ऑपरेशनल विंग मात्र है, बस एक विंग। अन्य देशों में भी दुनिया की  सब से शातिर डीप-स्टेट ऑपरेटिव एजेंसी,  यानी CIA के अनेकों  छोटे बड़े विंग और सैल हैं।   बहुत से  'Lone Wolves', यानी 'आज़ाद अय्यार' भी  किसी न किसी डीप-स्टेट  के लिए काम करते देखे गए  हैं।

4.  हमारे देश में IB, RAW और NIA जैसे संगठन हमारे देश की डीप-स्टेट  के  प्रत्यक्ष, सक्षम और बेहतरीन संगठन हैं । इजरायल का मोसाद, पाकिस्तान की ISI, चीन की MSS,  और PLASSF  सभी, अपने अपने देश की डीप-स्टेट की ऑपरेशनल इकाइयां हैं। यह लोग अपने या/और दूसरे देशों में तख्ता-पलट से  ले कर, आतंकी हमले और राजनीतिक एसासिनेशन इत्यादि तक, सभी कुछ करने में सक्षम होते हैं। 

5.  उदाहरण स्वरूप,  ईरानी जनरल सुलेमानी का क़त्ल अमेरिका और खुद ईरान की डीप-स्टेट ने मिलजुल के किया है। ईरान से वहां के राजा  शाह मोहम्मद पहलवी को  हटाना, और आयतुल्ला खोमेनी को ईरान का प्रमुख बनाना, अमरीकन,  बरतानिया, तुर्की और सऊदी अरब की डीप-स्टेट का मिला जुला काम था।

6.  यदि भारतीय उपनिवेश से उदाहरण लेनी हो तो बांग्लादेश और पंजाब की अलगाववादी लहर का  अध्ययन आवश्यक है।  बंगलादेश में खुली जंग का आगाज़ और जंग का अंत तो 1971 में हुआ लेकिन उस से कहीं पहले भारत और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों में जंग जारी रही, जिस में भारत पाकिस्तान को विभाजित करने में कामयाब रहा , और इस तरह भारतीय  डीप-स्टेट जीत गई।   पंजाब में हर किस्म के अलगाववाद को उभारना, फ़िर उसे एक आंदोलन की शक्ल देना, फ़िर सारे आंदोलन को एक व्यक्ति के इर्द गिर्द केंद्रित कर देना, और उपरांत अलगाववादी सिक्खों द्वारा अकाल तख्त की किले बन्दी करना,  और फ़िर भारतीय फौज द्वारा उस पे अटैक कर के अलगाववाद के सेंट्रल सिंबल को  मिटा देना,  डीप-स्टेट  को जानने के जिज्ञासुओं और विद्यार्थियों के लिए, एक ऐसा अध्याय है जिसे पढना और समझना डीप-स्टेट के कामकाज को समझने के लिए अतिआवश्यक है।

7.  याद रहे की यह वह शतरंज है, जहां शातिर सदा गुप्त रहता है, और हर मोहरे को इस्तेमाल के बाद मार दिया जाता है, या गुमनाम कर दिया जाता है। गुमनाम रिटायरमेंट इस फील्ड में बहुत कम लोगों को नसीब होती है, और वह बहुत किस्मत वाले होते हैं। बाकी सब  या तो किसी  किसी ख़ुफ़िया कार्यवाही के दौरान मारे जाते हैं, या फ़िर वक़्त बे वक़्त मार दिए जाते हैं।

8.  डीप-स्टेट का ख़ुफ़िया और ऑपरेशनल तंत्र  शीर्ष तहों में काफ़ी संगठित होता है, लेकिन ऑपरेशनल सतह पे यह बेहद बिखरा हुआ और अव्यवस्थित होता है, यानी इस में कोई कॉर्डिनेशन नहीं होती, यानी इसे जानबूझ कर लूज़एंडेड रखा जाता है। लेकिन अव्यवस्था ही इस खेल की व्यवस्था है। इसे सेंट्रली कॉर्डिनेट किया ही नहीं जा सकता क्यों की यह इंनफॉर्मेशन को गुप्त रखने, इंनफॉर्मेशन की मिसरिप्रेसेंटेशन और   गलत सन्देश फैलाने का खेल भी है।

9.  यह एक बहुत ही अजीब दुनिया है, जिस में विक्षिप्त से  विक्षिप्त मानसिकता वाले लोग,  साधू, बाबे, किन्नर, पुलिस वाले, चोर, फौजी, आतंकी, एजेंट, डब्ल एजेंट और छोटे  बड़े  सिने कलाकारों तक अनेकों किस्म के लोग होते हैं। इस फील्ड में जॉब प्रोफ़ाइल इतने विविध हैं, कि कोई एक  प्रोफ़ाइल इन में समा ही नहीं सकता।

10.  यह  अय्यार  तंत्र है, जिस में यार  अग्ग्यार, और अग्ग्यार  यार बन कर मिलते हैं। इस तंत्र में चोर और सिपाही, जर्नलिस्ट और खबरी, देशभक्त और गद्दार, स्मगलर और कातिल,  फौजी और आतंकी  इक्कठे काम करते हैं, और किसी आम आदमी तो क्या, खास आदमी के लिए भी इन में फर्क करना असम्भव हो जाता है।

11.   इस खेल में उतरना मगरमच्छों से भरे तालाब में गोता लगाने जैसा होता है।  यहां बहादुरी से भरे जांबाज़ और  धोखा देने के माहिर बहरूपिए, साथ साथ काम करते हैं।  यह बहुत रोमांचक, रोचक लेकिन खतरनाक और जानलेवा दुनिया है, जिस में न लाईफ का कोई बीमा होता है, ना गारंटी, बस होती है एक मुसलसल कश्मकश।

12.  मैं इसे कोई अच्छी कररियर चॉइस नहीं मानता, क्यों कि यह दुनिया मानसिक व अन्य विपत्ताओं से भरी हुई  है।  फिल्मों में जेम्स बॉन्ड के जीवन का सा यहां कुछ भी नहीं। यह अंधी गलियों की अंधेरी दुनिया है, जिस में मौत और धोखा, कदम कदम पर  साथ रहता है।

13.   स्थितियों परिस्थितियों और व्यक्तियों को बहुत ही जल्दी समझने वाला व्यक्ति, जो साहसी नहीं बल्कि दुस्साहसी हो,  वही  इस फील्ड में सफल हो सकता है। उस के बावजूद भी  इस कार्य क्षेत्र में स्थाई सफ़लता की कोई गारंटी नहीं। इस फील्ड में कब लेने  के देने पड़ जाएं, कहना मुश्किल है। इस की एक उदाहरण अभी ताज़ा हाल में जम्मू कश्मीर पुलिस का उप-कप्तान देवेन्द्र सिंह है, जिस ने कभी अफजल गुरु जैसे  आतंकी को गरिफ्तार किया था, लेकिन आज खुद अतंकवादी होने का इल्ज़ाम उठाए बैठा है।

14.   'डीप-स्टेट' दोमुंहे सरपों की और बहुरूपियों की वह मृग मरीचिका है, जो दूर से बड़ी इंटरस्टिंग लगती है, लेकिन यह वह दलदल है, जिस में कदम रखने वालों के लिए, वापसी के सभी दरवाज़े बन्द हो जाते हैं। 
🚩 सत्य मेव जयते🚩
✒गुरु बलवंत गुरूने।⚔