1. चीन और पाकिस्तान से भी बड़ीसमस्या यदी कोई भारत के सामने है, तो वह है भारत के भृष्टाचारी, मौका परस्त नेता, जो जुमलों की राजनीती करते हैं, भारतीय धन का और व्यवस्था का पूर्ण दोहन करते हैं, और लोगों को, उन की विविधताओं को ज़रिया बना कर उकसाते हैं, आपस में लड़वाते हैं और सता प्राप्त करते हैं, देश के भले के लिए नहीं, बल्कि अपनी सुखसुविधाओं को जीवन भर के लिए आरक्षित करने के लिए।
2. जो थोडा सा जातीय, धार्मिक या रिजनल डिफ़रेंस होता है, या किसी छोटी सी कश्मकश को एक बड़ी स्थानीय लड़ाई में, यहां तक की दंगो और खून खराबे में बदल दिया जाता है, उस का असली कारण देश की नेचुरल रिलीजियस, कल्चरल, और भाषीय विविधता का कोई नेचुरल कोन्फ्लिक्ट नहीं, बल्कि हमारे कमीने, वोटे-लोलुप नेता हैं, जो हमारी भृष्ट व्यवस्था की हराम की वह औलादे हैं, जो निजी स्वार्थ के लिए, समाजिक विवधिताओं को, समाज में द्वेष पैदा करने का माध्यम बना लेते हैं।
3. यह कमीने नेता वोट बैंक की राजनीती करने के चक्कर में, कभी बीफ, कभी भगवा, कभी हरे तो कभी केसरी के नाम पे राजनीती उकसा कर, कभी हिन्दू, सिख तो कभी मुस्लिम को मन्दिर मस्जिद गुरुद्वारा के नाम पे उकसा कर, देश का दोहन कर रहे हैं। आज कल लेटेस्ट ट्रेंडिंग कमीनागिरी है, उत्तराखण्ड में सिखों के वाहनों से उन के धार्मिक ध्वज को उतारने की क़वायद।
4. इस में तो दो राय नहीं हो सकती कि ऐसा कोई भी काम, राजनितिक निर्देश के बिना नहीं हो सकता। कभी मन्दिर मस्जिद की राजनीती, कभी बीफ की राजनीती, कभी भगवा या सब्ज़ की राजनीती, करने वाले, क्लिपटोक्रेटिक नेताओं को इतिहास कभी माफ नहीँ करे गा, लेकिन इन हरामी राजनेताओं के चक्कर में अब भारत वासियों को भी ज्यादा दिन नहीं आना है, देशवासियों को सब से ज्यादा सचेत इस आंतरिक खतरे की और होने की आवश्यकता है।
5. पहली स्वतंत्रता की लड़ाई जो देश ने लड़ी, वह अँगरेज़ के खिलाफ, अँगरेज़ से आज़ादी पाने के लिए लड़ी थी, लेकिन अब जो बड़ी लड़ाई देश को लड़नी है, वह है देश की भृष्ट व्यवस्था से आज़ादी पाने की लड़ाई, इस व्यवस्था से जन्मे और इस पे काबिज़ भृष्ट राजनेताओं से आज़ादी पाने की लड़ाई।
6. यह सभी भृष्ट नेता, इन का दल कोई भी हो, या निशान कोई भी हो, यह झूठ और फ़रेब के व्यपारी, किसी आतंकवादी से कम नहीँ हैं। यह तो उस से भी ख़तरनाक हैं, क्यों की ये, आप को, आप के अपने बन कर, यहां तक की आप के नायक बन क लूटते हैं।
7. इस भृष्ट व्यवस्था से आज़ादी की लड़ाई लड़ना भी अत्यंत आवश्यक है, लेकिन फ़िलहाल इस की सम्भावना केवल एक ही शब्द में है। इस कोढ़ को काटने का मात्र एक ही उपाय है। और वह उपाय है जन जगृति के लिए विराट जनसम्पर्क, जिस का बेहतरीन माध्यम है, सोशल मीडिया।
हमें देश भर में 'अनेकता में एकता' का अलख जगाना हो गा, और आपस की फूट का फायदा उठाने वाले राजनेताओं को खत्म करना हो गा।
🔱सत्य ही भगवान है🚩
🚩 संघर्ष ही इबादत है 🔱
✒गुरु बलवन्त गुरुने⚔
2. जो थोडा सा जातीय, धार्मिक या रिजनल डिफ़रेंस होता है, या किसी छोटी सी कश्मकश को एक बड़ी स्थानीय लड़ाई में, यहां तक की दंगो और खून खराबे में बदल दिया जाता है, उस का असली कारण देश की नेचुरल रिलीजियस, कल्चरल, और भाषीय विविधता का कोई नेचुरल कोन्फ्लिक्ट नहीं, बल्कि हमारे कमीने, वोटे-लोलुप नेता हैं, जो हमारी भृष्ट व्यवस्था की हराम की वह औलादे हैं, जो निजी स्वार्थ के लिए, समाजिक विवधिताओं को, समाज में द्वेष पैदा करने का माध्यम बना लेते हैं।
3. यह कमीने नेता वोट बैंक की राजनीती करने के चक्कर में, कभी बीफ, कभी भगवा, कभी हरे तो कभी केसरी के नाम पे राजनीती उकसा कर, कभी हिन्दू, सिख तो कभी मुस्लिम को मन्दिर मस्जिद गुरुद्वारा के नाम पे उकसा कर, देश का दोहन कर रहे हैं। आज कल लेटेस्ट ट्रेंडिंग कमीनागिरी है, उत्तराखण्ड में सिखों के वाहनों से उन के धार्मिक ध्वज को उतारने की क़वायद।
4. इस में तो दो राय नहीं हो सकती कि ऐसा कोई भी काम, राजनितिक निर्देश के बिना नहीं हो सकता। कभी मन्दिर मस्जिद की राजनीती, कभी बीफ की राजनीती, कभी भगवा या सब्ज़ की राजनीती, करने वाले, क्लिपटोक्रेटिक नेताओं को इतिहास कभी माफ नहीँ करे गा, लेकिन इन हरामी राजनेताओं के चक्कर में अब भारत वासियों को भी ज्यादा दिन नहीं आना है, देशवासियों को सब से ज्यादा सचेत इस आंतरिक खतरे की और होने की आवश्यकता है।
5. पहली स्वतंत्रता की लड़ाई जो देश ने लड़ी, वह अँगरेज़ के खिलाफ, अँगरेज़ से आज़ादी पाने के लिए लड़ी थी, लेकिन अब जो बड़ी लड़ाई देश को लड़नी है, वह है देश की भृष्ट व्यवस्था से आज़ादी पाने की लड़ाई, इस व्यवस्था से जन्मे और इस पे काबिज़ भृष्ट राजनेताओं से आज़ादी पाने की लड़ाई।
6. यह सभी भृष्ट नेता, इन का दल कोई भी हो, या निशान कोई भी हो, यह झूठ और फ़रेब के व्यपारी, किसी आतंकवादी से कम नहीँ हैं। यह तो उस से भी ख़तरनाक हैं, क्यों की ये, आप को, आप के अपने बन कर, यहां तक की आप के नायक बन क लूटते हैं।
7. इस भृष्ट व्यवस्था से आज़ादी की लड़ाई लड़ना भी अत्यंत आवश्यक है, लेकिन फ़िलहाल इस की सम्भावना केवल एक ही शब्द में है। इस कोढ़ को काटने का मात्र एक ही उपाय है। और वह उपाय है जन जगृति के लिए विराट जनसम्पर्क, जिस का बेहतरीन माध्यम है, सोशल मीडिया।
हमें देश भर में 'अनेकता में एकता' का अलख जगाना हो गा, और आपस की फूट का फायदा उठाने वाले राजनेताओं को खत्म करना हो गा।
🔱सत्य ही भगवान है🚩
🚩 संघर्ष ही इबादत है 🔱
✒गुरु बलवन्त गुरुने⚔