🚩कहीं ऐसा तो नहीं ⁉ @ ✒GBG⚔

1.  यदि आप खुद को, इस देश के साथ, अपने समुदाय से पहले जोड़ के देखते हैं, तो अवश्य पढ़िए, और अगर आप  भारतीय होने की बनिस्बत,  हिन्दू, मुसलमान, सिक्ख ईसाई, भाजपायी अथवा काग्रेसी होना ज्यादा महत्वपूर्ण समझते हैं, तो चाहे न पढ़िए, क्यों की जो मैं कहने जा रहा हूँ, वह किसी भी वर्ग विशेष को न प्रस्सन करने के लिए  है और न क्षुब्ध करने के लिए ।वह केवल सच्चाई है, लेकिन थोड़ी कड़वी।

2.  आप भारतीय हैं तो, आप के मन में अवश्य यह विचार उठना चाहिये, कि राष्ट्रवाद के नाम पर, देशभक्ति के नाम पर या हिन्दू,  मुस्लिम अथवा सिक्ख प्राइड के नाम पर कहीं आप, केवल दाएं बाज़ू सरमायेदार दबंगता को मजबूत तो नहीं कर रहे ❓

3.  कहीं ऐसा तो नहीं, की जैसे समाजवाद के नाम पर खुद को समाजवादी कहने वाले, और ग़रीबों का उल्लू बना कर राज हासिल करने वालों ने, उत्तर प्रदेश में अपार धन संम्पदा और राजनीतिक ताकत हासिल कर ली है,  समाजवाद का नारा लगा कर वहां के दबंग नेताओं ने जिस तरहं केवल परिवारवाद को बढ़ावा दिया है,
जैसे बिहार में लालू एंड पार्टी बिल्लियनर बन गये हैं, बिलकुल वैसे ही,
कहीं ऐसा तो नही की अब हिंदु अथवा सिक्ख प्राइड के नाम पर आप केवल सरमायेदारों और कॉरपोरेट घरानों के राजनितिक गुर्गों का साथ दे रहे हैं ❓

4.  कहीं ऐसा तो नहीं, कि जुमलों और नारों की भृष्ट राजनीती में  आप,  फिर एक बार वही धोखा खा रहे हैं, जो पहले गरीबी हटाओ के नाम पे खाया था❓

5.  कहीं ऐसा तो नहीं कि आप, धार्मिकता, या राष्ट्रीयता अथवा खोखली देशभक्ति के नाम पर देश को अपनी निजी सम्पती बनाने वालों का साथ दे रहे हैं ❓

6.  कहीं 'सब का विकास, सब का साथ' का नारा देनेवालों के जुमलों पे मस्त हो कर आप फ़िर 'बांटो और राज करो' की नीती अपनाने वालों का और सत्ता प्राप्त कर के अपने और अपने अत्ती-धनवान साथियों के खज़ाने  भरने वालों का साथ तो नहीं दे रहे ❓

7.  कहीं ऐसा तो नहीं, हिन्दू राष्ट्रवाद के नाम पे हिन्दू होने का गर्व करते करते, हम भारतीय होने पे गर्व करना छोड़ रहे हैं ❓

8.  कहीं ऐसा तो नहीं  की भृष्ट व्यवस्था की पैदाइश, भृष्ट नेताओं द्वारा हम एक बार फिर छले जा रहे हैं ❓

9.   यदी हैं, तो यह समस्त देश के लिए चिंता, चिंतन और चर्चा, सभी का विषय है।
🚩सत्य ही ईश्वर है🚩
🔱संघर्ष ही इबादत है🚩
©✒गुरु बलवन्त गुरने⚔

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