🔥देश के ज्वलंत प्रश्न और उन का संक्षिप्त उत्तर🕯✒द्वारा गुरु बलवन्त गुरुने⚔

क्या देश बदले गा ?
क्या व्यवस्था बदले गी ?
क्या भारत विश्वगुरु बने गा ?
क्या भ्र्ष्टाचार, समाप्त हो गा ?
हर चिंतन प्रेमी चिंतनशील की ज़ुबान पर आज यह ही सवाल है।

मैंने भी इस विषय पर गहन विचार किया। और मेरा निष्कर्ष कुछ इस तरहं है।

भारत अवश्य बदले गा, और भारत अवश्य विश्व गुरु बन सकता है, यदी राजनितिक नेतृत्व में ईमानदारी हो, कम से कम न्यूनतम ईमानदारी।

वरना तो ख़ुद को आध्यात्मिक और योग गुरु कहने वाले भी आज अती धनाढ्य व्यापारी बन रहे हैं, और या फिर अपराधी राजनेता बन रहे हैं।

जन मानस की सोच बदलने से ही देश बदले गा, जो फिर से किसी महात्मा गांधी जैसे जनसंचार की प्रतिभा रखने वाले नेता द्वारा ही सम्भव है, फिर जरूरी नहीं की वह केवल लंगोट डाले, या 10 लाख का सूट। यदी आज का नेतृत्व बदलाव लाने में विफ़ल रहा, तो मजबूरन भगत सिंह और चन्द्र शेखर आज़ाद जैसे युवाओं को पुन्ह आगे आना पड़े गा।

आज सारे बदलाव का दारमदार केवल राजनितिक नेतृत्व की  ईमानदारी पर निर्भर है, और यह बदलाव धर्म, जात पात और परिवारवाद से हट कर केवल नेशन बिल्डिंग की राजनीती नहीं, बल्कि नेशन बिल्डिंग की निति की बेसिज़ पर ही सम्भव है।

राजनेताओं को कुर्सी और सत्ता के मोह से उभरना हो गा और देश प्रेम ही को मुख्य रखना हो गा ।

आज की तारीख में, एक शक्स है, जो राजनीती और सिस्टम के  कचरे को सम्पूर्ण समाप्त कर सकता है, और वह है नमो, यदी वह इस काम का बीड़ा उठाने की ठान ले।

कल की ख़बर केवल काल को है, लेकिन आज का सच्च केवल यही है।

नमो मन की बात करते हैं, लेकिन नमो के मन की बात, केवल नमो ही को ज्ञात है, और नमो का, आज भारत की राजनीती पर, स्वामित्व, महाकाल का  ही इरादा है।

इस महाकाल के पिटारे में से अवश्य कुछ ऐसा निकलने वाला है, जो भारत को परिवर्तित कर सकता है ।

समाज में फैले हर जहर को केवल जहर ही से मारा जा सकता है, और इस कड़वी दवा का वैद्य आज गद्दी पर बैठा है।

अब कुछ मित्र कहें गे की यह विशफुल थिंकिंग है। अवश्य है, और मैं इस से भी सहमत हूँ।

लेकिन एक फक्कड़ फ़कीर का फ़र्ज़ है की वह दर दर जा कर अलख जगाये, अलख निरंजन का उदघोष करे । मैं भी एक फक्कड़ फ़क़ीर हूँ जो दोस्तों के सोशल मीडिया के दरवाजों पर बदलाव की उम्मीद जगाता रहता हूँ।

बदलाव तो हो भी रहा है, लेकिन निरर्थक बदलाव को सार्थक बदलाव में बदलने की आवश्यकता है।

आप सच्च जानिये तो नमो और बहुत से अन्य लोग, कोई कलम से, कोई राजनीती से, कोई कविता से तो कोई व्यख्यान से व्यवस्था की जड़ों पे बहुत ज़बरदस्त चोट करने की क़वायद में जुटे हुए हैं। नमों भी इन्ही में से एक है, जो एक सक्षम और अथक योद्धा है, और एक ज्वलन्त दिमाग़ का मालिक भी, जो दुश्मनों और दोस्तों को न सिर्फ पहचानता है, बल्कि उन का संयोजन भी भली भांती करना जानता है।

अडानियों अम्बानियों से मित्रता, तथा और भी बहुत से समीकरण, नमो की मजबूरी है। कलयुग में कोई फक्कड़ फ़कीर योद्धा ,  जो कलयुगी हथियारों का इस्तेमाल करने में पारंगत हो, केवल वह ही बदलाव की सम्भावना बन सकता है। अब नमों में अलख तो अवश्य जगा है, लेकिन वह कोई भी बदलाव यकलख्त नहीं ला सकता। अभी भूमी तैयार की जा रही है, जैसा कि बिटवीन द लाइन्स हिडन स्क्रिप्ट को पढ़ने से ज्ञात होता है।

आज राजनीती अय्यारों से भरी हुई है जिन की काट कोई नमो जैसा महान अय्यार ही कर सकता है। एक अती साधारण परिवार में जन्म लेने के बावजूद, दुनिया की सब से बड़ी आबादी वाले राजनितिक जनतन्त्र के शीर्ष स्थान पर जा बैठना, अपने आप में कुदरत के किसी करिश्मे से कम नहीं।

कुदरत अलख है और निरंजन भी। कुदरत के काम , न तो दुनियादारी की आँख को नज़र ही आते हैं, और न ही उन की व्याख्या ही की जा सकती है।  कुदरत के खेल अनोखे हैं, और अदृश्य भी। आज कुदरत ने नमो को एक अद्वित्य स्थिति में ला खड़ा किया है,  तो यह अनर्थक नही जाने वाला। India has gambled on Namo for a reason, and Namo knows it well enough.

Nature has its own unique ways of functioning, and it has a method to its madness. It is continously functional without caring for human reasoning and judgement. So fevery thing, micro-cosmic has macro-cosmic designs hidden in it and every thing macroscopic has microscopic movements hidden in it.

यदी नमों भी बदलाव लाने में असफल रहा, तो कम से कम वह युवाओं में इतना गुस्सा जरूर भर दे गा, की क्रांती की सम्भावनाएं ज्वलन्त हो उठें गी।  या तो नमो कुछ कर गुज़रे गा, और या फिर कुछ कर गुज़रने के लिये सरकट युवाओं के वास्ते, इतने कारण पैदा कर दे गा, कि युवा कुछ कर गुज़रने से, गुरेज़ न करें गे।

 यदी अब भी व्यवस्था में सुधार न हुआ तो अवश्य महाकाल, क्रांती की महाकालिका को यह काम सौंपने वाले हैं, और उस हालत में भगत सिंह जैसे गर्म ख्यालशुदा क्रांतिकारी  ही महाकालिका की प्रचण्ड तेग का काम करें गे।

When all means of bringing  change are going to fail, the change will only be possible via the barrels of guns, and so it shall be, if the political leadership fails to deliever. वन्देमातरम।

🚩📿तत्त सत्त श्री अकाल⚔🚩
✒🕯गुरु बलवन्त गुरुने 📚⚔

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