1. दिल्ली चुनाव के मानसिक विश्लेषण के बाद मैंने लिखा था कि इस चुनाव में एक अर्ध -प्रदेश के मुख्यमंत्री को हराने के लिए जरूरत से ज्यादा राजनीतिक असलाह इस्तेमाल किया जा रहा है, जो काउंटर प्रोडक्टिव सिद्घ होगा, वैसा ही हुआ भी।
2. भाजपा ने इस युद्ध में खुद प्रधानमंत्री मोदी और ग्रह मंत्री शाह की सिपहसालारी में 11 मुख्यमंत्री, 240 सांसद, और यूपी, बिहार, पंजाब, हिमाचल, और हरियाणा के हजारों वर्करों की फौज लगा दी, लेकिन यह सभी मिल कर भी ज्यादा कुछ नहीं कर सके।
3. भाजपा ने ध्रुवीकरण की राजनीति का राह चुना, गोली मारो गद्दारों को जैसे नारे लगाए, और केजरीवाल को आतंकी तक कह डाला। पाकिस्तान, मियां, जिनहा वाली आज़ादी जैसे जुमलों का भी जम के प्रयोग किया गया, लेकिन सभी कुछ कांउटरप्रोडक्टिव निकला।
4 . भाजपा ने केजरीवाल पर कई निजी हमले बोले। उन के मफलर और खांसी को ले कर मज़ाक उड़ाया, यहां तक कि उन्हें अनार्किस्ट और आतंकवादी इत्यादि भी कह डाला, जिस से राजनीति निम्नस्तर से भी नीचे सरक गई।
5. इस सब का नतीजा यह निकला कि मंदी से चरमराई हुए जनता ने नेगेटिव राजनीति को बिल्कुल नकार दिया।
6. इस के विपरीत केजरीवाल ने सभ्य और सौम्य राजनीति का रास्ता पकड़ा। मोदी या शाह पे कोई पर्सनल अटैक नहीं किया। अपनी केंपेन को शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी, देश की एकता इत्यादि पे ही केंद्रित रखा।
7. अंत में श्री हनुमान जी को भी केंपेन्न में उतार कर, केजरीवाल ने हिन्दू धर्म और सिंबलज़ को, भाजपा की इकलौती बपौती होने के दावे की भी ध्ज्जियां उड़ा दी। अब हनुमान जी का आशीर्वाद भी अरविंद को प्राप्त हो गया।
8. रिजल्ट ये निकला के आप पार्टी 62 सीट जीत गई, और केजरीवाल ने दिल्ली में हैट्रिक लगाई। भाजपा का भजिया, जिस में जदयू और अकाली दल भी शामिल था, 8 सीटों पे सिमट कर रह गए। कांग्रेस की तो 63 सीटों पे जमानत ही जप्त हो गई।
9. मैंने अपने ब्लॉग द्वारा स्पष्ट किया था कि जनता फुक्रा पंथी, दंभ और दादागिरी की राजनीति का उपुक्त उत्तर देगी। लो दबा दिया बटन, और लगा दिया करंट। जनता ने झूठ, जुमलों, नारों और नफ़रत की राजनीति को पूरी तरह नकारते हुए ज़मीनी काम के हक में वोट दिया है।
10. दिल्ली की जनता, केजरीवाल और आप पार्टी, सच्ची मुबारकबाद की हक्कदार हैं। दिल्ली की आप विजय ने भारतीय राजनीति के समीकरण ही बदल कर रख दिए हैं।
🚩🔱सत्यम शिवम🔱🚩
@✒गुरु बलवंत गूरुने⚔
2. भाजपा ने इस युद्ध में खुद प्रधानमंत्री मोदी और ग्रह मंत्री शाह की सिपहसालारी में 11 मुख्यमंत्री, 240 सांसद, और यूपी, बिहार, पंजाब, हिमाचल, और हरियाणा के हजारों वर्करों की फौज लगा दी, लेकिन यह सभी मिल कर भी ज्यादा कुछ नहीं कर सके।
3. भाजपा ने ध्रुवीकरण की राजनीति का राह चुना, गोली मारो गद्दारों को जैसे नारे लगाए, और केजरीवाल को आतंकी तक कह डाला। पाकिस्तान, मियां, जिनहा वाली आज़ादी जैसे जुमलों का भी जम के प्रयोग किया गया, लेकिन सभी कुछ कांउटरप्रोडक्टिव निकला।
4 . भाजपा ने केजरीवाल पर कई निजी हमले बोले। उन के मफलर और खांसी को ले कर मज़ाक उड़ाया, यहां तक कि उन्हें अनार्किस्ट और आतंकवादी इत्यादि भी कह डाला, जिस से राजनीति निम्नस्तर से भी नीचे सरक गई।
5. इस सब का नतीजा यह निकला कि मंदी से चरमराई हुए जनता ने नेगेटिव राजनीति को बिल्कुल नकार दिया।
6. इस के विपरीत केजरीवाल ने सभ्य और सौम्य राजनीति का रास्ता पकड़ा। मोदी या शाह पे कोई पर्सनल अटैक नहीं किया। अपनी केंपेन को शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी, देश की एकता इत्यादि पे ही केंद्रित रखा।
7. अंत में श्री हनुमान जी को भी केंपेन्न में उतार कर, केजरीवाल ने हिन्दू धर्म और सिंबलज़ को, भाजपा की इकलौती बपौती होने के दावे की भी ध्ज्जियां उड़ा दी। अब हनुमान जी का आशीर्वाद भी अरविंद को प्राप्त हो गया।
8. रिजल्ट ये निकला के आप पार्टी 62 सीट जीत गई, और केजरीवाल ने दिल्ली में हैट्रिक लगाई। भाजपा का भजिया, जिस में जदयू और अकाली दल भी शामिल था, 8 सीटों पे सिमट कर रह गए। कांग्रेस की तो 63 सीटों पे जमानत ही जप्त हो गई।
9. मैंने अपने ब्लॉग द्वारा स्पष्ट किया था कि जनता फुक्रा पंथी, दंभ और दादागिरी की राजनीति का उपुक्त उत्तर देगी। लो दबा दिया बटन, और लगा दिया करंट। जनता ने झूठ, जुमलों, नारों और नफ़रत की राजनीति को पूरी तरह नकारते हुए ज़मीनी काम के हक में वोट दिया है।
10. दिल्ली की जनता, केजरीवाल और आप पार्टी, सच्ची मुबारकबाद की हक्कदार हैं। दिल्ली की आप विजय ने भारतीय राजनीति के समीकरण ही बदल कर रख दिए हैं।
🚩🔱सत्यम शिवम🔱🚩
@✒गुरु बलवंत गूरुने⚔