1. कुछ लोग बेवजह शोर मचा रहे हैं, कि कश्मीर में ज़ुल्म हो रहा है। यह वही लोग हैं, जो दरअसल जुल्मों सितम से आज़ाद हैं, वह तमाशबीन जो ऑपरेशन टेबल के इर्द गिर्द केवल तमाशा देखने के लिए जुड़ते हैं। ना इन्हें मरीज़ का दर्द पता होता है, ना डाक्टर की टेंशन।
2. मेरा उन से यही पूछना है, कि कश्मीर के इस दर्द की शुरुआत किस ने की ? आतंकियों द्वारा पण्डित समुदाय के बलात्कार और क़त्ल ने, या 370 के स्वाहा ने।
3. कोई भी नयाय प्रिय खोजी हृदय और मस्तिक्ष, इस का उत्तर सरल ही जान सकता है। इस ज़ख्म को देने वाला खंजर, अलगाववाद और बांटो और राज करो का खंजर ही है, अन्यथा कुछ नहीं।
4. 70 साल के नासूर को भरते भरते वक्त लगे गा।
5. कश्मीर एक ऐसे बरगद के पेड़ सा है, जिस की जड़ें तो हिन्दुस्तानी हैं, लेकिन जिस पे मुद्दत से फंडामेंटल और वहाबी सुन्नी मुसलमान एकस्ट्रीमिस्ट सोच के नाग का वास हो गया, जो फ्रॉड इस्लामिक स्टेट ऑफ पाकिस्तान में बनाया गया।
6. देशवासियों, हमारे पास सर्प मेध यज्ञ के इलावा और कोई उपाय नहीं था। कश्मीर में सर्प मेध हवन कार्य जारी है। देश भक्त मुस्लिम भाई भी इस में संलग्न हैं, सिक्ख भी, इसाई भी।
7. यदि कोई डर रहा है, तो वह है आतंकवाद का तक्षक नाग, जिस का स्वाहा होना निश्चित है। शेख रशीद जैसे पाकिस्तानी फौज के चमचे, और पाकिस्तान के तमाम लुटेरे राजनेता, इस हवन को नाकामयाब करना चाहते हैं, लेकिन वह शम्मा क्या बुझेगी, जिसे रोशन हवा करे।
8. सभी अलगाववादियों से भारत को ऐसे ही निपटना होगा। सफ़र लंबा है, लेकिन नामुमकिन नहीं। यदी भारत को बनना है, तो अलगाववाद को मिटना ही होगा।
🚩 तत्त्व स्त्व अकाल।🚩
✒ गुरु बलवंत गुरुने⚔